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जिला अस्पताल में चरमराई व्यवस्था
Mau
Updated Thu, 22 May 2014 05:31 AM IST
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मऊ। जिला अस्पताल मेें चिकित्सा व्यवस्था चरमरा गई है। एंटीबायोटिक दवाओं का हमेशा अकाल है। सफाई व्यवस्था दयनीय है। अस्पताल के ओपीडी में चिकित्सक चैंबर में चिकित्सकों की नेम प्लेट लगा दी गई है। चैंबर भी खोल दिया गया है, लेकिन चिकित्सकों की कहां पर ड्यूटी लगी है मरीजों को पता नहीं चल पा रहा है। भीषण गर्मी में परेशान मरीज ओपीडी में इलाज कराने के लिए चिकित्सकों की राह ताकते रहे।
जिला अस्पताल में चिकित्सा और स्वास्थ्यकर्मियों की अनियमित दिनचर्या से आम लोगों की मुश्किलें बढ़ती ही जा रही है। ग्रामीण इलाकों में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों से रेफर होने वाले मरीजों को बैरंग लौटना पड़ रहा है। जिन चिकित्सकों की ड्यूटी लगी भी रहती है। वह इधर-उधर घूमते रहते हैं। मरीज जब अधीक्षक के पास शिकायत दर्ज कराते हैं तो यह बताकर लौटा दिया जाता है कि इमरजेंसी में ड्यूटी लगा दी गई है। जिला अस्पताल के ओपीडी में चिकित्सकों का चैंबर तो बना दिया गया है, लेकिन चिकित्सक की ड्यूटी कहां लगी है मरीजों को जानकारी नहीं हो पा रही है। वह इधर-उधर ओपीडी कक्ष में पर्ची जमा कर अस्पताल में सुबह नौ बजे से ही मरीज चिकित्सक के आने की राह ताकते रहे। ओपीडी में अपराह्न 12.17 बजे कक्ष संख्या दो बंद था। अपराह्न 12.20 बजे कक्ष संख्या चार तो खुला था, लेकिन चिकित्सक नदारद थे। मरीज चिकित्सक के आने का इंतजार करते देखे गए। अपराह्न 12.25 बजे ओपीडी कक्ष छह खुला था, लेकिन चिकित्सक कक्ष से गायब रहे। सर्जन के कक्ष पर चिकित्सक के उपार्जित अवकाश पर चले जाने की सूचना चस्पा की गई है, लेकिन वैकल्पिक व्यवस्था नहीं की जा सकी है। सफाई व्यवस्था दिन ब दिन दयनीय होती जा रही है। अस्पताल के लान में खर पतवार का जंगल लगा हुआ है। अस्पताल में भर्ती मरीजों तथा तीमारदारों को बीमारियों के फैलने का डर सताता रहता है। इस संबंध में इलाज कराने आए जानकी देवी, मीना सिंह, बिंदू देवी, मनोज प्रसाद, बलवंत यादव, भृगुनाथ राम, श्रीराम शर्मा का कहना है कि पंजीकरण कराए तीन घंटा से भी अधिक समय हो गया, लेकिन चिकित्सक कब आएंगे पता नहीं चल रहा है। शिकायत करने पर टालमटोल जवाब दे दिया जाता है।
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जिला अस्पताल में चिकित्सा और स्वास्थ्यकर्मियों की अनियमित दिनचर्या से आम लोगों की मुश्किलें बढ़ती ही जा रही है। ग्रामीण इलाकों में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों से रेफर होने वाले मरीजों को बैरंग लौटना पड़ रहा है। जिन चिकित्सकों की ड्यूटी लगी भी रहती है। वह इधर-उधर घूमते रहते हैं। मरीज जब अधीक्षक के पास शिकायत दर्ज कराते हैं तो यह बताकर लौटा दिया जाता है कि इमरजेंसी में ड्यूटी लगा दी गई है। जिला अस्पताल के ओपीडी में चिकित्सकों का चैंबर तो बना दिया गया है, लेकिन चिकित्सक की ड्यूटी कहां लगी है मरीजों को जानकारी नहीं हो पा रही है। वह इधर-उधर ओपीडी कक्ष में पर्ची जमा कर अस्पताल में सुबह नौ बजे से ही मरीज चिकित्सक के आने की राह ताकते रहे। ओपीडी में अपराह्न 12.17 बजे कक्ष संख्या दो बंद था। अपराह्न 12.20 बजे कक्ष संख्या चार तो खुला था, लेकिन चिकित्सक नदारद थे। मरीज चिकित्सक के आने का इंतजार करते देखे गए। अपराह्न 12.25 बजे ओपीडी कक्ष छह खुला था, लेकिन चिकित्सक कक्ष से गायब रहे। सर्जन के कक्ष पर चिकित्सक के उपार्जित अवकाश पर चले जाने की सूचना चस्पा की गई है, लेकिन वैकल्पिक व्यवस्था नहीं की जा सकी है। सफाई व्यवस्था दिन ब दिन दयनीय होती जा रही है। अस्पताल के लान में खर पतवार का जंगल लगा हुआ है। अस्पताल में भर्ती मरीजों तथा तीमारदारों को बीमारियों के फैलने का डर सताता रहता है। इस संबंध में इलाज कराने आए जानकी देवी, मीना सिंह, बिंदू देवी, मनोज प्रसाद, बलवंत यादव, भृगुनाथ राम, श्रीराम शर्मा का कहना है कि पंजीकरण कराए तीन घंटा से भी अधिक समय हो गया, लेकिन चिकित्सक कब आएंगे पता नहीं चल रहा है। शिकायत करने पर टालमटोल जवाब दे दिया जाता है।
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