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मुसलिम महिलाओं को रिझाने का प्रयास होगा कानून का दुरुपयोग
Updated Thu, 28 Dec 2017 11:37 PM IST
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लोक सभा में तीन तलाक पर गुरुवार को पास हुए बिल से मुसलिम समाज के लोगों में काफी रोष है, बोले महिलाओं को रिझाकर वोट की राजनीति में जुटी केंद्र सरकार को नहीं पता कि इसका दुरुपयोग होगा। इससे महिलाओं की दुश्वारियां और बढ़ जाएगी।
नगर पालिका चेयरमैन तैयब पालकी ने कहा कि भाजपा का यह प्रयास धार्मिक उन्माद फैलाकर मुसलिम महिलाओं का वोट बटोरने का कुचक्र है। बोले यदि भाजपा को मुसलिम महिलाओं की इतनी ही चिंता थी, तो गुजरात में वर्षो से न्याय के लिए भटक रही मुसलिम महिला को इंसाफ दिलाते साथ ही मुसलिम महिलाओं को शिक्षित करने और रोजगार से जोड़ने की व्यस्था करते। यह विधेयक सिर्फ वोट बटोरने की मुहिम है। पूर्व पालिकाध्यक्ष अरशद जमाले ने कहा कि भाजपा द्वारा लाया गया यह बिल मुसलिम महिलाओं की दुश्वारियों को और बढ़ाएगा। इस संवेदनशील मामले पर बिल लाने से पहले मुसलिम धर्मगुरुओं से सलाह मशवरा किया जाना चाहिए था। राजकीय बालिका इंटर कालेज की प्रधानाचार्य शमा शेख ने कहा कि यदि तीन तलाक पर कानून बनेगा तो उसका सम्मान तो करना ही होगा। पालिटेक्निक स्कूल के प्रिंसपल इफ्तेखार ने कहा कि इस मामले में शरीयत में पहले से नियम और कानून बनें है। सरकार को इसमें हस्तक्षेप करने की जरूरत नहीं थी। घोसी के करीमुद्दीनपुर निवासी कारी गुलाम रसूल ने कहा कि तीन तलाक के मामले को जबरी घसीट रही है। बोले सुप्रीम कोर्ट ने तीन तलाक को अवैध करार दिया था। लेकिन सरकार जिस मंशा से कानून बनाई है, कभी सफल नहीं होगी। मुहम्मदाबाद गोहना निवासी समाजसेवी डा. इरफान ने कहा कि लोक सभा में कोई बिल पास हुआ तो अच्छी बात है, लेकिन इसमें उन 19 संशोधनों को शामिल करना चाहिए था, लेकिन ऐसा नहीं किया गया। ऐसे में इस कानून का सदुपयोग कम दुरुपयोग ज्यादा होगा।
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नगर पालिका चेयरमैन तैयब पालकी ने कहा कि भाजपा का यह प्रयास धार्मिक उन्माद फैलाकर मुसलिम महिलाओं का वोट बटोरने का कुचक्र है। बोले यदि भाजपा को मुसलिम महिलाओं की इतनी ही चिंता थी, तो गुजरात में वर्षो से न्याय के लिए भटक रही मुसलिम महिला को इंसाफ दिलाते साथ ही मुसलिम महिलाओं को शिक्षित करने और रोजगार से जोड़ने की व्यस्था करते। यह विधेयक सिर्फ वोट बटोरने की मुहिम है। पूर्व पालिकाध्यक्ष अरशद जमाले ने कहा कि भाजपा द्वारा लाया गया यह बिल मुसलिम महिलाओं की दुश्वारियों को और बढ़ाएगा। इस संवेदनशील मामले पर बिल लाने से पहले मुसलिम धर्मगुरुओं से सलाह मशवरा किया जाना चाहिए था। राजकीय बालिका इंटर कालेज की प्रधानाचार्य शमा शेख ने कहा कि यदि तीन तलाक पर कानून बनेगा तो उसका सम्मान तो करना ही होगा। पालिटेक्निक स्कूल के प्रिंसपल इफ्तेखार ने कहा कि इस मामले में शरीयत में पहले से नियम और कानून बनें है। सरकार को इसमें हस्तक्षेप करने की जरूरत नहीं थी। घोसी के करीमुद्दीनपुर निवासी कारी गुलाम रसूल ने कहा कि तीन तलाक के मामले को जबरी घसीट रही है। बोले सुप्रीम कोर्ट ने तीन तलाक को अवैध करार दिया था। लेकिन सरकार जिस मंशा से कानून बनाई है, कभी सफल नहीं होगी। मुहम्मदाबाद गोहना निवासी समाजसेवी डा. इरफान ने कहा कि लोक सभा में कोई बिल पास हुआ तो अच्छी बात है, लेकिन इसमें उन 19 संशोधनों को शामिल करना चाहिए था, लेकिन ऐसा नहीं किया गया। ऐसे में इस कानून का सदुपयोग कम दुरुपयोग ज्यादा होगा।
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