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नहर में पानी न आने से किसानों को सताने लगी नर्सरी पिछड़ने की चिंता
Updated Thu, 31 May 2018 12:04 AM IST
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मऊ। मुख्य नहर सहित माइनरों में पानी न छोड़े जाने से किसानों को धान की नर्सरी के पिछड़ने की चिंता सताने लगी है। नहर में पानी न होने से किसान अभी नर्सरी के लिए खेत की तैयारी नहीं कर पाए हैं। यही नहीं गर्मी की बोई गई सब्जी की फसल सूख रही है। कहने को तो जिले में तीन प्रमुख नहरें हैं, लेकिन किसानों की कसौटी पर खरी नहीं उतर पा रही हैं। किसानों की जरूरत के समय मरम्मत के नाम पर 13 जून तक के लिए मुख्य नहर बंद चल रही है। जबकि विभागीय अधिकारी 10 दिन पूर्व नहर को चलवाने का दावा किया है। जिले में 2477 हजार हेक्टेयर कृषि योग्य भूमि की सिंचाई के लिए जिले में तीन प्रमुख नहरें है। इन तीनों प्रमुख नहरों के 70 माइनर हैं। चौधरी चरण सिंह पंप कैनाल दोहरीघाट से मऊ और बलिया मिलाकर हजारों हेक्टेयर भूमि सिंचित किए जाने की क्षमता है। किसानों की जरूरत के समय मरम्मत के नाम पर 13 जून तक के लिए मुख्य नहर बंद चल रही है। मुख्य नहर बंद होने से संबंधित माइनरें किसानों के लिए अनुपयोगी साबित हो रही हैं। खुरहट पंप कैनाल अंतिम सांस गिन रहा है। शारदा सहायक खंड में कभी कभार ही पानी आता है। अगैती धान की खेती के लिए धान की नर्सरी डालने का समय है। जरूरत के समय मुख्य नहर तथा माइनरों में पानी न छोड़े जाने से किसानों की मुश्किलें बढ़ती ही जा रही हैं। किसान खेत की तैयारी तक नहीं कर पाए हैं। जो किसान किसी तरह नर्सरी डाल भी दिए हैं। सिंचाई के अभाव में नर्सरी सूख रही है। इसके अलावा गन्ना, चारे की फसल, गर्मी की बोई गई सब्जी की फसल भी दम तोड़ रही है। इस संबंध में किसान नेता देवेंद्र सिंह, राकेश सिंह, सूर्यप्रकाश यादव, सचितानंद तिवारी का कहना है कि नहर तथा माइनरों में जरूरत के समय पानी ही नहीं छोड़ा जाता है। इस समय नर्सरी की सिंचाई की सख्त जरूरत है, लेकिन मुख्य नहर सहित माइनरों में पानी ही नहीं आ रहा है। कभी कभार माइनरों में पानी आता भी है तो तली में ही रह जाता है। नहर में पानी अविलंब नहीं छोड़ा गया तो हम लोग चुप नहीं बैठेंगे।
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