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पीक आवर में अधिकांश माइनरों में नहीं आ रहा पानी
Updated Wed, 20 Sep 2017 10:55 PM IST
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मऊ। कम बारिश होने से जिले में सूखे की स्थिति उत्पन्न हो गई है। कम बारिश होने के बाद भी जिले में उपलब्ध सिंचाई संसाधनों को बेहतर करने के लिए जिला प्रशासन की तरफ से ठोस कार्य योजना तक नहीं बनाई जा सकी। कहने को तो जिले में तीन प्रमुख नहरें हैं, लेकिन अधिकांश माइनरों में टेल तक पानी ही नहीं पहुंच पा रहा है। अघोषित बिजली कटौती और विद्युत उपकेंद्रों में आए दिन तकनीकी खामी से घंटों बिजली गुल रहती है। ऐसे में निजी नलकूप भी अपेक्षा के अनुरूप पानी नहीं दे रहे हैं। सिंचाई के अभाव में धान की फसल पर विपरीत असर पड़ रहा प्रभावित है। सब कुछ जानकर भी प्रशासनिक अधिकारी मौन साधे हुए हैं।
जिले में 2477 हजार हेक्टेयर कृषि योग्य भूमि की सिंचाई के लिए जिले में करोड़ों की लागत से बनी तीन नहरें है। इन तीनों प्रमुख नहरों के 70 माइनर हैं। धान की फसल को पानी की जरूरत है। किसी माइनर में पानी पहुंच भी रहा है तो तली में ही है। चौधरी चरण सिंह पंप कैनाल दोहरीघाट से मऊ और बलिया मिलाकर हजारों हेक्टेयर भूमि सिंचित की जाने की क्षमता है, लेकिन खरीफ फसल के पीक आवर मेें मुख्य नहर में कम पानी रहने से अधिकांश माइनरों में पानी न आने से प्रमुख नहर और माइनर किसानों के लिए अनुपयोगी साबित हो रहे हैं। नहर का लाभ न मिल पाने से किसानों का गुस्सा बढ़ता ही जा रहा है। खुरहट पंप कैनाल भी खेत का पेट नहीं भर पा रहा है। शारदा सहायक खंड 32 भी बैशाखी के भरोसे है। कभी कभार दोहरीघाट पंप कैनाल से पानी छ़ोड़ दिया जाता है। इस संबंध में किसान नेता देवप्रकाश राय, देवेंद्र सिंह, राकेश सिंह, सूर्यप्रकाश यादव, महेंद्र नाथ का कहना है कि माइनरों में आवश्यकता के अनुरुप पानी ही नहीं आता है। इस समय धान की फसल में सिंचाई की सख्त जरूरत है, लेकिन माइनरों में पानी ही नहीं आ रहा है। माइनरों में पानी अविलंब नहीं छोड़ा गया तो हम लोग चुप नहीं बैठेंगे। इस बाबत दोहरीघाट पंप कैनाल के अधिशासी अभियंता धीरेंद्र पासवान का कहना है कि लो वोल्टेज के चलते पंप कैनाल का मोटर नहीं चल पा रहा है। इसके चलते समस्या आ रही है।
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