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पांचों पुत्रों को बनाया अधिकारी
Updated Sat, 17 Jun 2017 11:23 PM IST
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घोसी। वैसे समाज में हर पिता अपने बच्चों की तरक्की के लिए दिन रात एक कर देता है। लेकिन आर्थिक रूप से कमजोर व्यक्ति जब अपने पांच पुत्रों को पढ़ा-लिखकार अफसर बना दे तो यह बेहद सराहनीय हो जाता है। ऐसा कुछ घोसी तहसील मुख्यालय स्थित कस्बा के मदापुर समसपुर निवासी एक बुनकर पिता ने किया। बुनकरी कर महफूजुल हक़ ने अपने पांच पुत्रों के साथ पुत्रियों को भी उच्च शिक्षा दिलाया। आज महफ़ूजुलहक अंसारी के बेटों ने अच्छे मुकाम पर पहुंचाकर मिसाल कायम किया है। इन्हें देख पड़ोस के लोगों में भी अपने बच्चों को उच्च शिक्षा दिलाने की ललक पैदा हुई।
घोसी नगर के तहसील के पीछे मदापुर समसपुर मोहल्ला निवासी बुनकर महफ़ूजुलहक अंसारी के पिता भी गरीब बुनकर थे। जिनके पिता ने गरीब में ही इनको आठवीं कक्षा तक शिक्षा दिया। शिक्षा के महत्व को समझते हुए महफ़ूजुलहक अंसारी ने अपने पांचों पुत्रो को लूम चला कर अधिकारी बनाया, इनके बड़े पुत्र शमीम अख्तर का चयन दूरसंचार विभाग में टीडीएम पद पर हुआ। कड़ी मेहनत के बल पर जीएम पद तक पहुंचकर सेवानिवृत हुए। दूसरे पुत्र विमान पत्तन विभाग में मेन्टिनेस इंजीनियर हैं। वर्तमान में इंदिरा गांधी एयरपोर्ट पर तैनात है। इसीक्रम में तीसरे पुत्र डा.शमीम अख्तर वर्तमान में आजमगढ़ अतिरिक्त मुख्यचिकित्सा अधिकारी के पद पर तैनात है। चौथे पुत्र हसन अख्तर परिषदीय जूनियर हाईस्कूल मानिकपुर असना में शिक्षक है। इसीक्रम में पांचवें पुत्र युसूफ अख्तर सिंचाई विभाग में जूनियर इंजीनियर पद तैनात है। महफ़ूजुलहक अंसारी ने अपने पुत्री शाहीन अख्तर को बीए कराने के बाद शादी किया। आज महफ़ूजुलहक अंसारी और इनका परिवार नगर में एक साथ रहते हैं। नगर क्षेत्र के लोग महफ़ूजुलहक अंसारी के परिवार को आइडियल के रूप में देखते है। गरीबी में भी कष्ट उठाकर भी बच्चों को उच्च शिक्षा दिलवाने वाले महफ़ूजुलहक अंसारी अपने बच्चों को लूम नहीं चलाने दिए। इनके शिक्षा के प्रति रुझान और बच्चों के उच्च पदों पर पहुंचने को देख कर पड़ोस के लोगों ने भी अपने बच्चों को अच्छी शिक्षा दिया। आज इनका मोहल्ला पढ़े लिखे लोगो का मोहल्ला बन गया है।
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घोसी नगर के तहसील के पीछे मदापुर समसपुर मोहल्ला निवासी बुनकर महफ़ूजुलहक अंसारी के पिता भी गरीब बुनकर थे। जिनके पिता ने गरीब में ही इनको आठवीं कक्षा तक शिक्षा दिया। शिक्षा के महत्व को समझते हुए महफ़ूजुलहक अंसारी ने अपने पांचों पुत्रो को लूम चला कर अधिकारी बनाया, इनके बड़े पुत्र शमीम अख्तर का चयन दूरसंचार विभाग में टीडीएम पद पर हुआ। कड़ी मेहनत के बल पर जीएम पद तक पहुंचकर सेवानिवृत हुए। दूसरे पुत्र विमान पत्तन विभाग में मेन्टिनेस इंजीनियर हैं। वर्तमान में इंदिरा गांधी एयरपोर्ट पर तैनात है। इसीक्रम में तीसरे पुत्र डा.शमीम अख्तर वर्तमान में आजमगढ़ अतिरिक्त मुख्यचिकित्सा अधिकारी के पद पर तैनात है। चौथे पुत्र हसन अख्तर परिषदीय जूनियर हाईस्कूल मानिकपुर असना में शिक्षक है। इसीक्रम में पांचवें पुत्र युसूफ अख्तर सिंचाई विभाग में जूनियर इंजीनियर पद तैनात है। महफ़ूजुलहक अंसारी ने अपने पुत्री शाहीन अख्तर को बीए कराने के बाद शादी किया। आज महफ़ूजुलहक अंसारी और इनका परिवार नगर में एक साथ रहते हैं। नगर क्षेत्र के लोग महफ़ूजुलहक अंसारी के परिवार को आइडियल के रूप में देखते है। गरीबी में भी कष्ट उठाकर भी बच्चों को उच्च शिक्षा दिलवाने वाले महफ़ूजुलहक अंसारी अपने बच्चों को लूम नहीं चलाने दिए। इनके शिक्षा के प्रति रुझान और बच्चों के उच्च पदों पर पहुंचने को देख कर पड़ोस के लोगों ने भी अपने बच्चों को अच्छी शिक्षा दिया। आज इनका मोहल्ला पढ़े लिखे लोगो का मोहल्ला बन गया है।
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