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चार सालों में चकमार्ग से नहीं हटा अतिक्रमण

Wed, 22 Nov 2017 11:18 PM IST
Updated Wed, 22 Nov 2017 11:18 PM IST
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चार सालों में चकमार्ग से नहीं हटा अतिक्रमण
पहसा(मऊ)। राजस्व अधिकारियों और कर्मचारियों की भ्रष्ट और लापरवाह कार्यप्रणाली की वजह से एक सरकारी चकमार्ग से अतिक्रमण नहीं हटाया जा सका है। गांव के लोग पिछले चार साल से इस अतिक्रमित चकमार्ग को अतिक्रमण से मुक्त कराने के लिए अधिकारियों के यहां चक्कर लगा रहे हैं। यहां तक एक व्यक्ति ने दिल्ली जाकर गृह मंत्री राजनाथ सिंह से मुलाकात कर इस चकमार्ग को अतिक्रमण से मुक्त कराने की गुहार लगाई थी। मंडलायुक्त और जिलाधिकारी को दिए गए प्रार्थनापत्रों पर राजस्व कर्मियों द्वारा लीपापोती की गई और कागजी कार्रवाई करके खाना पूरी कर दिया। मामला रतनपुरा ब्लाक के इटौरा ग्राम पंचायत का है।
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इटौरा गांव के गाटा संख्या 846 चकमार्ग और 845 नाली है। लगभग दो किलोमीटर लंबा और 20 कड़ी चौड़ा यह चकमार्ग एक गांव से दूसरे गांव की सीमा को जोड़ता है। लेकिन इस पर लगभग एक किलोमीटर की लंबाई में चकमार्ग के अगल-बगल के चकदारों ने अतिक्रमण कर लिया है। इसे अवमुक्त कराने के लिए गांव के जयप्रकाश सिंह, मीरा मिश्र और अनीता सिंह आदि ने जिलाधिकारी को शिकायती प्रार्थनापत्र दिया। ये ग्रामीण मंडलायुक्त और जिलाधिकारी को प्रार्थनापत्र देकर चकमार्ग को अतिक्रमण मुक्त कराने की गुहार लगाई। ये गांव वासी वर्ष 2013 से लेकर अब तक लगातार सभी तहसील दिवसों से लेकर जन सुनवाई दिवसों में प्रार्थनापत्र देते आ रहे हैं। 6 जून 2017 को डीएम ने एसडीएम को चकमार्ग को अतिक्रमण से मुक्त कराने का निर्देश दिया। राजस्व कर्मियों ने खानापूरी करके पैमाईश कर दिया। पुराने राजकीय नलकूप की नाली को मिलाकर ही चकमार्ग पैमाईश की खानापूरी कर दी गई। शिकायत कर्ताओं को इसकी भनक तक नहीं लगी और न ही कोई स्पाट मेमो बनाया गया । ग्राम पंचायत की ओर से इस पर कुछ दूरी तक मिट्टी डलवाने का कार्य भी कर दिया गया। लेकिन जब इसकी जानकारी गांव वालों को हुई तो उन्होंने उपायुक्त श्रम रोजगार को दी। उपायुक्त श्रम रोजगार ने बीडीओ से पैमाईश का स्पाट मेमो उपलब्ध कराने को कहा। बीडीओ ने 9 नवंबर 2017 को उपजिलाधिकारी सदर को पत्र लिखकर स्पाट मेमो उपलब्ध कराने का अनुरोध किया है। गांव के जय प्रकाश सिंह बताते हैं कि इस प्रकरण को निस्तारित कराने के लिए वे दिल्ली तक गए और गृह मंत्री राजनाथ सिंह से मुलाकात उन्हें प्रार्थनापत्र दिया। फिर भी मामला जस का तस है। यह हाल तब है जब मुख्यमंत्री का एंटी भू माफिया अभियान चल रहा है। इस बाबत उपजिलाधिकारी डॉ. राजेश कुमार का कहना है कि पैमाईश कराई गई थी, लेकिन इस पर कुछ लोगों ने निर्माण कार्य करा रखा है। इसके लिए गाइड लाइन के लिए उच्चाधिकारियों को पत्र लिखा गया है।
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इनसेट
राजकीय नलकूप तक जाने को नहीं है रास्ता
चकमार्ग पर अतिक्रमण के चलते नये राजकीय नलकूप तक जाने को रास्ता ही नहीं है। जब नलकूप के पंप में खराबी आती है तो गांव के लोग कंधे पर लादकर मोटरअथवा पंप ले जाते हैं। नाली पर अतिक्रमण के चलते नलकूप का पानी भी सभी खेतों तक नहीं पहुंच पाता है।
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