{"_id":"596272374f1c1ba46f8b4669","slug":"51499623991-mau-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"87 में से 35 दूकानें निरस्त","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
87 में से 35 दूकानें निरस्त
Updated Sun, 09 Jul 2017 11:47 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
पहसा। रतनपुरा विकास खंड में सार्वजनिक वितरण प्रणाली आज भी पुराने ढर्रे पर चल रही है। सरकार बदलने के बाद भी वितरण व्यवस्था में कोई बदलाव नहीं दिखाई दे रहा है। विकास खंड मे कुल 87 दूकानों में से 35 सस्ते गल्ले की दूकानें निरस्त हैं। इन दूकानों को अन्य दूकानों से संबद्ध किया गया है। लेकिन घटतौली, खाद्यान्न वितरण किये जाने का खेल आज भी जारी है।
रतनपुरा विकास खंड मे कुल 87 कोटे की दुकाने हैं। जिसमें 35 दूकानें विभिन्न अनियमितताओं के चलते निरस्त कर दी गयी हैं। निरस्त दूकानों में से 17 दूकानों का मामला विभिन्न न्यायालयों मे लंबित हैं। निरस्त दूकानों को पास के दूकानों से संबद्ध किया गया है। लोगों का आरोप है कि इन दूकानों से उन्हें समय से राशन नहीं दिया जाता, ऊपर से राशन कार्डो पर सरकार द्वारा निर्धारित मात्रा से कम राशन दिया जाता है। इस तरह अन्त्योदय व पात्र गृहस्थी के लाभार्थियों के राशन में धडल्ले से कटौती की जाती है। रतनपुरा ब्लाक में 29 हजार पांच सौ 47 पात्र गृहस्थी कार्डधारकों की संख्या है जबकि 6 हजार 95 अंत्योदय कार्डधारक हैं। सूत्रों की मानें तो गोदाम से खाद्यन्न उठान करते समय ही कोटेदारों को घटतौली का शिकार बनाया जाता है। सूत्रों के अनुसार खाद्यान्न का तौल किए जाते समय बाटों पर दो बोरे रखकर तौल करने का नियम है परन्तु गोदाम संचालकों द्वारा ऐसा नहीं किया जाता है। जिससे प्रत्येक बोरे में दो से तीन किग्रा कम खाद्यान्न मिलता है। इसके अलावा उठान करते समय सुविधा शुल्क देना पडता है। राशन कार्ड न होने की दशा में कोटेदारों द्वारा इंटरनेट से सूची निकाल कर वितरण किया जाता है। आलम यह है कि दर्जनों ऐसे कार्डधारक है जिन्हें पता तक नहीं है कि उनका सूची में नाम है भी या नहीं । सरकार द्वारा राशन कार्ड वापस कराये जाने के बाद लोगों के सामने समस्या बनी हुई है और प्रत्येक महीने सूची में हेरा- फेरी का खेल जारी है। इस बाबत उपजिलाधिकारी डा. राजेश कुमार कहना है कि घटतौली करने वालों के विरुद्ध प्रभावी कार्रवाई की जाएगी।
विज्ञापन
रतनपुरा विकास खंड मे कुल 87 कोटे की दुकाने हैं। जिसमें 35 दूकानें विभिन्न अनियमितताओं के चलते निरस्त कर दी गयी हैं। निरस्त दूकानों में से 17 दूकानों का मामला विभिन्न न्यायालयों मे लंबित हैं। निरस्त दूकानों को पास के दूकानों से संबद्ध किया गया है। लोगों का आरोप है कि इन दूकानों से उन्हें समय से राशन नहीं दिया जाता, ऊपर से राशन कार्डो पर सरकार द्वारा निर्धारित मात्रा से कम राशन दिया जाता है। इस तरह अन्त्योदय व पात्र गृहस्थी के लाभार्थियों के राशन में धडल्ले से कटौती की जाती है। रतनपुरा ब्लाक में 29 हजार पांच सौ 47 पात्र गृहस्थी कार्डधारकों की संख्या है जबकि 6 हजार 95 अंत्योदय कार्डधारक हैं। सूत्रों की मानें तो गोदाम से खाद्यन्न उठान करते समय ही कोटेदारों को घटतौली का शिकार बनाया जाता है। सूत्रों के अनुसार खाद्यान्न का तौल किए जाते समय बाटों पर दो बोरे रखकर तौल करने का नियम है परन्तु गोदाम संचालकों द्वारा ऐसा नहीं किया जाता है। जिससे प्रत्येक बोरे में दो से तीन किग्रा कम खाद्यान्न मिलता है। इसके अलावा उठान करते समय सुविधा शुल्क देना पडता है। राशन कार्ड न होने की दशा में कोटेदारों द्वारा इंटरनेट से सूची निकाल कर वितरण किया जाता है। आलम यह है कि दर्जनों ऐसे कार्डधारक है जिन्हें पता तक नहीं है कि उनका सूची में नाम है भी या नहीं । सरकार द्वारा राशन कार्ड वापस कराये जाने के बाद लोगों के सामने समस्या बनी हुई है और प्रत्येक महीने सूची में हेरा- फेरी का खेल जारी है। इस बाबत उपजिलाधिकारी डा. राजेश कुमार कहना है कि घटतौली करने वालों के विरुद्ध प्रभावी कार्रवाई की जाएगी।
विज्ञापन