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Mau News: ओपीडी में आने वालों में 45 प्रतिशत सांस के मरीज, दो दिन में 20% बढ़ गई संख्या
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जिला अस्पताल के पीआईसीयू वार्ड में भर्ती बच्चे को देखतीं नर्स।संवाद
मऊ। मौसम में बदलाव और दीपावली के बाद पटाखों के धुओं के चलते जिला अस्पताल में सांस के मरीजों की संख्या दोगुनी हो चुकी है। जिला अस्पताल में फिजिशियन की ओपीडी में पहुंचने वालों में 45 फीसदी सांस के मरीज आ रहे हैं। दीपावली के बाद इनकी संख्या में 20 फीसदी का इजाफा हुआ है।
वहीं बच्चों में निमोनिया की शिकायत भी बढ़ी है। हर दिन तीन से चार बच्चे निमोनिया की शिकायत लेकर जिला अस्पताल के पीआईसीयू वार्ड पहुंच रहे हैं। इस दौरान बुखार के बाद जोड़ों में दर्द और पेट में इंफेक्शन ने भी लोगों को परेशान कर दिया है। शुक्रवार को ही जिला अस्पताल की ओपीडी में 120 मरीज सांस तो 225 बच्चे वायरल फीवर, निमोनिया की शिकायत लेकर पहुंचे थे।
शुक्रवार को बच्चों के उपचार के लिए बने बालरोग विभाग के पीआईसीयू में पहुंची शहर के निजामुद्दीनपुरा निवासी ममता देवी ने बताया कि बेटे को बीते पांच दिन से बुखार था, दवा देने के बाद बुखार उतर जा रहा है लेकिन असर खत्म होते ही बुखार चढ़ जा रहा है। यहां पहुंचने पर जांच में पाया कि कई दिन से वायरल होने के चलते अब बेटे को निमोनिया हो गयक्है।
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वहीं दुबारी के धूंस निवासी रामवती ने भी बताया कि बेटे को दीपावली की सुबह गले में खरास के बाद शाम को तेज बुखार आया था। दवा देने के बाद भी राहत नहीं मिली। इंजेक्शन और पानी से शरीर पोछने पर राहत मिली। बुखार ठीक होने के बाद अब पेट दर्द परेशान कर रहा है। वहीं बालरोग विशेषज्ञ डॉ. सीएस साहनी ने बताया कि मौसम बदलने के दौरान छोटे बच्चों को विशेष सुरक्षा की आवश्यकता होती है।
इस समय ठंडी हवा और तापमान में अचानक गिरावट के कारण बच्चों को सर्दी-जुकाम, खांसी और बुखार की शिकायतें आम हो जाती हैं, जो आगे चलकर निमोनिया में बदल जाती हैं। कई बच्चों में सांस लेने में तकलीफ और सीने में घरघराहट जैसी समस्या भी देखी जा रही है। बताया कि वर्तमान में रोज तीन से चार बच्चे निमोनिया की शिकायत लेकर पहुंच रहे हैं।
बताया कि निमोनिया गंभीर संक्रमण है, जो फेफड़ों को प्रभावित करता है। सांस लेने में भी परेशानी होती है। ऐसे कुछ मरीज आ रहे हैं। इनका समय पर इलाज न होने पर यह जानलेवा भी साबित हो सकता है। उन्होंने कहा कि इस मौसम में माता-पिता को सतर्क रहने की जरूरत है।
लक्षण हो तो लापरवाही नहीं बरते अभिभावक : सीएमओ डॉ. राहुल सिंह ने बताया कि माता-पिता बच्चों को ठंड से बचाने के साथ ही खान-पान और साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखें। बच्चे जमीन पर नंगे पैर न चलें, ठंडी चीजें न खाएं, गंदे पानी में खेलने से परहेज करें।
साथ ही जिन बच्चों को सांस में तकलीफ, तेज बुखार या लगातार खांसी की शिकायत हो, उन्हें तुरंत नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र या अस्पताल में दिखाया जाए। महिला जिला अस्पताल की बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. कंचनलता आजाद ने वर्तमान में मौसम में बदलाव बच्चों को सबसे ज्यादा बीमार बना रहा है।
अभिभावक बच्चों को गुनगुना पानी पिलाएं, संतुलित आहार दें और भीड़भाड़ वाले स्थानों पर जाने से बचाएं। कहा कि मौसम में हो रहे उतार-चढ़ाव को हल्के में न लें और किसी भी प्रकार के श्वसन संक्रमण को नजरअंदाज न करें। शुरुआती लक्षणों पर ही इलाज कराने से निमोनिया जैसी गंभीर बीमारी से बचाव संभव है।
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वहीं बच्चों में निमोनिया की शिकायत भी बढ़ी है। हर दिन तीन से चार बच्चे निमोनिया की शिकायत लेकर जिला अस्पताल के पीआईसीयू वार्ड पहुंच रहे हैं। इस दौरान बुखार के बाद जोड़ों में दर्द और पेट में इंफेक्शन ने भी लोगों को परेशान कर दिया है। शुक्रवार को ही जिला अस्पताल की ओपीडी में 120 मरीज सांस तो 225 बच्चे वायरल फीवर, निमोनिया की शिकायत लेकर पहुंचे थे।
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शुक्रवार को बच्चों के उपचार के लिए बने बालरोग विभाग के पीआईसीयू में पहुंची शहर के निजामुद्दीनपुरा निवासी ममता देवी ने बताया कि बेटे को बीते पांच दिन से बुखार था, दवा देने के बाद बुखार उतर जा रहा है लेकिन असर खत्म होते ही बुखार चढ़ जा रहा है। यहां पहुंचने पर जांच में पाया कि कई दिन से वायरल होने के चलते अब बेटे को निमोनिया हो गयक्है।
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वहीं दुबारी के धूंस निवासी रामवती ने भी बताया कि बेटे को दीपावली की सुबह गले में खरास के बाद शाम को तेज बुखार आया था। दवा देने के बाद भी राहत नहीं मिली। इंजेक्शन और पानी से शरीर पोछने पर राहत मिली। बुखार ठीक होने के बाद अब पेट दर्द परेशान कर रहा है। वहीं बालरोग विशेषज्ञ डॉ. सीएस साहनी ने बताया कि मौसम बदलने के दौरान छोटे बच्चों को विशेष सुरक्षा की आवश्यकता होती है।
इस समय ठंडी हवा और तापमान में अचानक गिरावट के कारण बच्चों को सर्दी-जुकाम, खांसी और बुखार की शिकायतें आम हो जाती हैं, जो आगे चलकर निमोनिया में बदल जाती हैं। कई बच्चों में सांस लेने में तकलीफ और सीने में घरघराहट जैसी समस्या भी देखी जा रही है। बताया कि वर्तमान में रोज तीन से चार बच्चे निमोनिया की शिकायत लेकर पहुंच रहे हैं।
बताया कि निमोनिया गंभीर संक्रमण है, जो फेफड़ों को प्रभावित करता है। सांस लेने में भी परेशानी होती है। ऐसे कुछ मरीज आ रहे हैं। इनका समय पर इलाज न होने पर यह जानलेवा भी साबित हो सकता है। उन्होंने कहा कि इस मौसम में माता-पिता को सतर्क रहने की जरूरत है।
लक्षण हो तो लापरवाही नहीं बरते अभिभावक : सीएमओ डॉ. राहुल सिंह ने बताया कि माता-पिता बच्चों को ठंड से बचाने के साथ ही खान-पान और साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखें। बच्चे जमीन पर नंगे पैर न चलें, ठंडी चीजें न खाएं, गंदे पानी में खेलने से परहेज करें।
साथ ही जिन बच्चों को सांस में तकलीफ, तेज बुखार या लगातार खांसी की शिकायत हो, उन्हें तुरंत नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र या अस्पताल में दिखाया जाए। महिला जिला अस्पताल की बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. कंचनलता आजाद ने वर्तमान में मौसम में बदलाव बच्चों को सबसे ज्यादा बीमार बना रहा है।
अभिभावक बच्चों को गुनगुना पानी पिलाएं, संतुलित आहार दें और भीड़भाड़ वाले स्थानों पर जाने से बचाएं। कहा कि मौसम में हो रहे उतार-चढ़ाव को हल्के में न लें और किसी भी प्रकार के श्वसन संक्रमण को नजरअंदाज न करें। शुरुआती लक्षणों पर ही इलाज कराने से निमोनिया जैसी गंभीर बीमारी से बचाव संभव है।

जिला अस्पताल के पीआईसीयू वार्ड में भर्ती बच्चे को देखतीं नर्स।संवाद