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सच्चे गुरु की शरण में जाने से होगी परमात्मा की प्राप्ति
Updated Sun, 29 Jul 2018 11:46 PM IST
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गक्षेत्र के नाजोपट्टी खैराबाद में संत निरंकारी सत्संग भवन परिसर में रविवार को सत्संग का आयोजन किया गया। इस मौके पर महात्मा सत्यप्रकाश मुखी ने कहा कि परमपिता परमात्मा को पाने के लिए हम मानव को सच्चे गुरु की शरण में जाना चाहिए। गुरु वह शक्ति है जो हमें परमात्मा से मिला सकती है। उन्होंने कहा कि सागर में डुबकी लगाने से कीमती रत्नों की प्राप्ति होती है, ठीक वैसे ही प्रभु की महिमा अर्थात सत्संग प्रवचन रूपी सागर में से भक्ति जैसे कीमती रत्नों की प्राप्ति होती है।
उन्होंने कहा कि अगर किसी ने भक्ति रूपी धन को एकत्रित किया है तो वह कभी भी कंगाल नहीं हो सकता। भौतिक धन को छोड़ कर महात्मा बुद्ध ने भक्ति रूपी धन ही एकत्रित किया, अनेक भक्तों ने भौतिक धन को छोडकर भक्ति रूपी संसार में लीन हो गए हैं। इसलिए हम मनुष्य को संसार रूपी इस मोह माया से दूर होकर हमें उस निरंकार प्रभु के चरणों में जाना चाहिए जो हमें और आपको इस दुनिया में भेजा है। उस निरंकार ब्रह्म को प्राप्त करने के लिए हम मानव को इस संसार में सच्चे गुरु की तलाश कर उनके चरणों में जाना चाहिए। गुरु ही हमें इस माया रुपी मोह से दूर कर सकता है एवं उस निरंकार ब्रह्मा तक पहुंचने वाले मार्ग को दिखा सकता है।इस अवसर पर लालमुनि, लालू प्रसाद, सुदर्शन राम, सोनू कुमार, रामाश्रय प्रसाद, राहुल गौड़, निर्मला ,उर्मिला ,धनवती ,कलावती, चंद्रावती नीतू, सुनीता आदि उपस्थित रहे।
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उन्होंने कहा कि अगर किसी ने भक्ति रूपी धन को एकत्रित किया है तो वह कभी भी कंगाल नहीं हो सकता। भौतिक धन को छोड़ कर महात्मा बुद्ध ने भक्ति रूपी धन ही एकत्रित किया, अनेक भक्तों ने भौतिक धन को छोडकर भक्ति रूपी संसार में लीन हो गए हैं। इसलिए हम मनुष्य को संसार रूपी इस मोह माया से दूर होकर हमें उस निरंकार प्रभु के चरणों में जाना चाहिए जो हमें और आपको इस दुनिया में भेजा है। उस निरंकार ब्रह्म को प्राप्त करने के लिए हम मानव को इस संसार में सच्चे गुरु की तलाश कर उनके चरणों में जाना चाहिए। गुरु ही हमें इस माया रुपी मोह से दूर कर सकता है एवं उस निरंकार ब्रह्मा तक पहुंचने वाले मार्ग को दिखा सकता है।इस अवसर पर लालमुनि, लालू प्रसाद, सुदर्शन राम, सोनू कुमार, रामाश्रय प्रसाद, राहुल गौड़, निर्मला ,उर्मिला ,धनवती ,कलावती, चंद्रावती नीतू, सुनीता आदि उपस्थित रहे।
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