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राहुल सांकृत्यायन के साहित्य को जन-जन तक पहुंचाने की जरूरत

Tue, 10 Apr 2018 10:52 PM IST
Updated Tue, 10 Apr 2018 10:52 PM IST
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राहुल सांकृत्यायन के साहित्य को जन-जन तक पहुंचाने की जरूरत
मऊ। राहुल सांकृत्यायन सृजन पीठ एवं जन संस्कृति मंच मऊ के संयुक्त तत्वावधान में राहुल सांकृत्यायन की 125वीं वर्षगांठ पर नगर के निजामुद्दीनपुरा में विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया। मुख्य अतिथि रींवा विश्वविद्यालय के हिंदी विभागाध्यक्ष डॉ. निदेश कुशवाह रहे। इस मौके पर मुख्य अतिथि डॉ. निदेश कुशवाह ने कहा कि राहुल सांकृत्यायन जैसे महानायक सदियों में कभी-कभी पैदा होते हैं। साहित्य, कला, संस्कृति, इतिहास, पुरातत्व, वैचारिकी, यायावरी, भाषा, लिपि, अनुवाद हर विधा में राहुल जी का लेखन बेजोड़ है। नए सिरे से राहुल जी को पढ़ने और समझने की आज जरूरत है। उन्होंने बोल्गा से गंगा, सतमी के बच्चे तुम्हारी क्षय हो और भागो नहीं दुनिया को बदलो को संदर्भित करते हुए विस्तार से प्रकाश डाला।
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डॉ. संजय राय ने कहा कि राहुल सांकृत्यायन का बहुआयामी व्यक्तित्व और विशाल साहित्य आज के दौर में जनसामान्य के हितों के लिए किया जाना चाहिए। उनका साहित्य जनसंघर्षों के लिये ऊर्जा प्रदान करता है। उनके साहित्य को जन-जन पहुंचाने की जरूरत है। बलिया से आए राजकीय महिला महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. रामप्रकाश कुशवाहा ने राहुल सांकृत्यायन के वैज्ञानिक बोध को रेखांकित करते हुए करते हुए कहा कि बार-बार अपने आपको अतिक्रमित करते हुए आगे बढ़ना राहुल जी का शगल था। लोक जीवन और लोक संवेदना के पारखी थे राहुल जी। सहज पठनीयता और भाषायी प्रवाह उनके साहित्य को लोकधर्मी साहित्य बनाता है। गोरखपुर से आए डॉ. दिवाकर सिंह ने राहुल सांकृत्यायन की तिब्बत की चारों यात्राओं के साथ बौद्ध साहित्य के संरक्षण एवं संवर्धन में उनके योगदान की विस्तार से चर्चा की। गोष्ठी को सत्यप्रकाश सिंह, असलम एडवोकेट, लक्ष्मी चैरसिया, डॉ. गिरी ने भी राहुल पर विचार रखे।
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गोष्ठी का दूसरा सत्र हिंदी के सर्वाधिक स्थापित कवि केदारनाथ सिंह के निधन पर श्रद्धांजलि गोष्ठी के रूप में संपन्न हुआ। डॉ. दिनेश कुशवाह, डॉ. संजय राय, रामप्रकाश, राघवेंद्र सिंह, असलम एडवोकेट, डॉ. शकील अहमद, इस्माईल, सईदुल्लाशाद आदि ने केदारनाथ सिंह की कविताओं पर विचार रखते हुये अपनी कविता का पाठ किया। दूसरे सत्र का समापन दिनेश कुशवाहा के वक्तव्य और कविता पाठ से हुआ। इस अवसर पर रामअवतार सिंह, बसंत कुमार, अर्चना उपाध्याय, रामहर्ष मौर्य, रजनीश भारती, वीरेंद्र कुमार, रामभवन, अतुल सिंह, शमसुल हक चौधरी, बृकेश आदि उपस्थित रहे। गोष्ठी की अध्यक्षता अखिलानंद पांडेय एवं संचालन जयप्रकाश धूमकेतु ने किया।
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