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श्री गुरू पूर्णिमा महोत्सव
Updated Sat, 08 Jul 2017 11:51 PM IST
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मझवारा। विकास खंड घोसी अंतर्गत ग्राम पंचायत मझवारा में रामजानकी मंदिर परिसर में श्री गुरु पूर्णिमा महोत्सव के अवसर पर चल रहा नौ दिवसीय आयोजित कार्यक्रम में ससना बहादुरपुर रोड़ से पधारे कन्हैया दास रामायणी ने श्रोताओं को राम चरित मानस के अंशों को उद्ध़ृत करते कथा का वर्णन किया। प्रवचन के दौरान श्रीकृष्ण के बाललीला का वर्णन करते हुए बताया कि जिस ज्ञान में भक्ति नहीं है, वह पंगु है। कहा कि उद्धव जी ज्ञानी तो थे लेकिन उनके अन्दर प्रेमभक्ति नहीं थी। भगवान श्रीकृष्ण ने उद्धव जी को ब्रज में भेज कर प्रेम और भक्ति की शिक्षा दी थी। उद्धव जी ने पहले तो ज्ञान की चर्चा की। कहा कि ब्रह़्म में मन लगाओं, ब्रह्म का चिंतन करो। उल्टे गोपियों ने ही उद्धव को प्रेम भक्ति का पाठ पढ़ा दिया। गोपियों ने उनकी बात सुनकर कहा, हे उद्धव मन न भयो दस बीस मन तो एक है जिसे चुराकर श्रीकृष्ण ले गये है। ब्रह्म के लिए दूसरा मन कहां से लायें। कृष्ण तन, कृष्ण मन, कृष्ण ही हमारो धन, आठो याम उधो हमें श्याम ही से काम है कहते कहते श्रीकृष्ण विरह में व्याकुल गोपियां रोने लगीं। तब गोपियों ने कहा कि ये तो प्रेम की बात है उधो, बन्दगी तेरे बश की नही है। इस दौरान अीच अीच में हो रहे श्रीकृष्ण भजन से पंडाल में बैठे श्रद्धालुझूमने लगे।
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