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जीवन से खिलवाड़ कर रहा नगर पालिका का कचरा
Updated Mon, 12 Jun 2017 11:27 PM IST
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मऊ। स्वच्छ भारत अभियान के स्लोगन एवं आए दिन निकल रही स्वच्छता अभियान की रैलियां महज एक औपचारिता साबित हो रही हैं। कूड़ा निस्तारण योजना की जमीनी हकीकत बहुत ही भयावह है। गांव को तो छोड़ दीजिए नगरपालिका में जहां घनी आबादी है, वहां प्रतिदिन 22 टन कूड़ा निकल रहा है। यह कूड़ा लोगों के जीवन को नरकीय बना रहा है। स्वास्थ्य से लेकर पर्यावरण के लिए यह खतरा बनता जा रहा है।
नगरपालिका में पिछले दस साल से कूड़ा निस्तारण योजना के तहत लगने वाला साइडवेस्ट मैनेजमेंट प्लांट के लिए अभी तक 10 एकड़ भूमि नहीं खरीदी जा सकी है। प्रशासन भी इसे लेकर गंभीर नहीं है जब कि प्रतिदिन कूड़े से पूरे शहर में गंदगी ही गंदगी नजर आ रही है।
सफाई के मामले में हाल में ही हुए सर्वे के मुताबिक जिले को देश में 370वीं रैंक मिली है। इसमें 2000 अंकों में जिले को 622 अंक प्राप्त हुए। यह स्थिति काफी भयावह है। इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि सिर्फ नगरपालिका क्षेत्र में प्रतिदिन 22 टन कचरा निकलता है। इसके निस्तारण की न तो कोई व्यवस्था है और न ही कोई इस प्रकार का गड्डा ही बना है जिसमें कूड़े को कम से कम पाटा जा सके। इसके अभाव में कचरा को प्रतिदिन उठाकर इधर उधर फेंका जा रहा है। कभी तमसा का किनारा तो कभी किसी के घर की नींव या किसी की खाली जमीन पर फेंका जा रहा है। यह कचरा अगर एक माह का देखा जाए तो 600 टन से अधिक प्रतिमाह निकल रहा है। इस प्रकार नगर में इकट्ठा हो रहे कचरे से एक दिन शहर ही न पट जाए, इसे लेकर लोगों में चिंता है। इस संबंध में नगरपालिका ईओ विद्यासागर यादव का कहना है कि कूड़ा निस्तारण योजना के तहत प्लांट के लिए भूमि की तलाश की जा रही है। इसके अभाव में कूड़ा निस्तारण को लेकर दिक्कत होती है लेकिन नगर को 18 सेक्टरों में बांटकर लगभग 100 वाहनों से उन्हें खाली स्थानों पर डंपिंग कराई जाती है। इसके लिए लगभग 500 कर्मचारी लगे हुए हैं।
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नहीं खोजी जा सकी 10 एकड़ भूमि
मऊ। नगरपालिका में कूड़ा निस्तारण योजना के तहत प्लांट लगाने के लिए 10 एकड़ भूमि की आवश्यकता है। इस भूमि को जिला प्रशासन द्वारा खोजा जाना है लेकिन पिछले कई सालों से यह भूमि नहीं खोजी जा सकी है। इसके चलते अभी भी कूड़े का बंदोबस्त नहीं हो सका है। नगरपालिकाध्यक्ष शाहिना अरशद जमाल का कहना है कि शासन ने प्लांट लगाने के लिए भूमि खोजने की जिम्मेदारी जिला प्रशासन को दी थी लेकिन अभी तक प्रशासन इस पर अमल नहीं कर सका। जिला प्रशासन अगर एनओसी दे तो नगरपालिका खुद जमीन खरीदकर इस प्लांट को लगवाने का प्रयास करेगी।
सेहत के साथ पर्यावरण को भी खतरा
मऊ। घरों से निकलने वाला कचरे का अगर सही से निस्तारण न हो तो वह सेहत ही नहीं बल्कि पर्यावरण के लिए भी खतरा बन सकता है। इस संबंध में डीएफओ अनिरुद्ध पांडेय का कहना है कि पर्यावरण को सुरक्षित रखने के लिए प्रदूषण को कम करना होगा। कचरे से उत्पन्न प्रदूषण पर्यावरण को भारी नुकसान पहुंचा रहे हैं।
कहीं नहीं बन रही कंपोस्ट खाद
मऊ। कचरा निस्ताण के लिए केंद्र सरकार ने भले ही इससे कंपोस्ट खाद बनाने पर जोर दिया हो लेकिन शहरी क्षेत्र में निकलने वाले कचरे से कंपोस्ट खाद कहीं भी नहीं बनाई जा रही है। गांवों में कुछ लोग अपने जानवरों के गोबर या घरों से निकलने वाले कचरों को भले ही कंपोस्ट खाद के लिए प्रयोग कर रहे हो लेकिन इसमें भी प्लास्टिक कचरा एवं अन्य अपशिष्ट प्रदूषण ही फैला रहे हैं। शहरों में तो इसकी अधिकता से लोगों का जन जीवन प्रभावित है।
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नगरपालिका में पिछले दस साल से कूड़ा निस्तारण योजना के तहत लगने वाला साइडवेस्ट मैनेजमेंट प्लांट के लिए अभी तक 10 एकड़ भूमि नहीं खरीदी जा सकी है। प्रशासन भी इसे लेकर गंभीर नहीं है जब कि प्रतिदिन कूड़े से पूरे शहर में गंदगी ही गंदगी नजर आ रही है।
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सफाई के मामले में हाल में ही हुए सर्वे के मुताबिक जिले को देश में 370वीं रैंक मिली है। इसमें 2000 अंकों में जिले को 622 अंक प्राप्त हुए। यह स्थिति काफी भयावह है। इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि सिर्फ नगरपालिका क्षेत्र में प्रतिदिन 22 टन कचरा निकलता है। इसके निस्तारण की न तो कोई व्यवस्था है और न ही कोई इस प्रकार का गड्डा ही बना है जिसमें कूड़े को कम से कम पाटा जा सके। इसके अभाव में कचरा को प्रतिदिन उठाकर इधर उधर फेंका जा रहा है। कभी तमसा का किनारा तो कभी किसी के घर की नींव या किसी की खाली जमीन पर फेंका जा रहा है। यह कचरा अगर एक माह का देखा जाए तो 600 टन से अधिक प्रतिमाह निकल रहा है। इस प्रकार नगर में इकट्ठा हो रहे कचरे से एक दिन शहर ही न पट जाए, इसे लेकर लोगों में चिंता है। इस संबंध में नगरपालिका ईओ विद्यासागर यादव का कहना है कि कूड़ा निस्तारण योजना के तहत प्लांट के लिए भूमि की तलाश की जा रही है। इसके अभाव में कूड़ा निस्तारण को लेकर दिक्कत होती है लेकिन नगर को 18 सेक्टरों में बांटकर लगभग 100 वाहनों से उन्हें खाली स्थानों पर डंपिंग कराई जाती है। इसके लिए लगभग 500 कर्मचारी लगे हुए हैं।
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नहीं खोजी जा सकी 10 एकड़ भूमि
मऊ। नगरपालिका में कूड़ा निस्तारण योजना के तहत प्लांट लगाने के लिए 10 एकड़ भूमि की आवश्यकता है। इस भूमि को जिला प्रशासन द्वारा खोजा जाना है लेकिन पिछले कई सालों से यह भूमि नहीं खोजी जा सकी है। इसके चलते अभी भी कूड़े का बंदोबस्त नहीं हो सका है। नगरपालिकाध्यक्ष शाहिना अरशद जमाल का कहना है कि शासन ने प्लांट लगाने के लिए भूमि खोजने की जिम्मेदारी जिला प्रशासन को दी थी लेकिन अभी तक प्रशासन इस पर अमल नहीं कर सका। जिला प्रशासन अगर एनओसी दे तो नगरपालिका खुद जमीन खरीदकर इस प्लांट को लगवाने का प्रयास करेगी।
सेहत के साथ पर्यावरण को भी खतरा
मऊ। घरों से निकलने वाला कचरे का अगर सही से निस्तारण न हो तो वह सेहत ही नहीं बल्कि पर्यावरण के लिए भी खतरा बन सकता है। इस संबंध में डीएफओ अनिरुद्ध पांडेय का कहना है कि पर्यावरण को सुरक्षित रखने के लिए प्रदूषण को कम करना होगा। कचरे से उत्पन्न प्रदूषण पर्यावरण को भारी नुकसान पहुंचा रहे हैं।
कहीं नहीं बन रही कंपोस्ट खाद
मऊ। कचरा निस्ताण के लिए केंद्र सरकार ने भले ही इससे कंपोस्ट खाद बनाने पर जोर दिया हो लेकिन शहरी क्षेत्र में निकलने वाले कचरे से कंपोस्ट खाद कहीं भी नहीं बनाई जा रही है। गांवों में कुछ लोग अपने जानवरों के गोबर या घरों से निकलने वाले कचरों को भले ही कंपोस्ट खाद के लिए प्रयोग कर रहे हो लेकिन इसमें भी प्लास्टिक कचरा एवं अन्य अपशिष्ट प्रदूषण ही फैला रहे हैं। शहरों में तो इसकी अधिकता से लोगों का जन जीवन प्रभावित है।