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Mau News: बारिश में हो गई 250 चकबंधों की मरम्मत, 20 पक्के निर्माण भी किए
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फतहपुर मंडाव ब्लॉक के लधुआई ग्राम पंचायत में बेचन के घर से गुफरान के खेत होते हुए सरवन के घर तक
मऊ। जिले में वीबी-जीरामजी के जरिये कराए जा रहे कच्चे और पक्के विकास कार्यों में भ्रष्टाचार और अनियमितता थमने का नाम नहीं ले रही है। 29 और 30 अक्तूबर को जिले में लगातार बारिश होती रही, जिसके कारण जमीन पर सभी कच्चे-पक्के निर्माण कार्य पूरी तरह ठप थे।
लेकिन जब आसमान से पानी बरस रहा था, तब विभाग के डिजिटल पोर्टल पर हजारों मजदूर पसीना बहा रहे थे। दो दिनों के भीतर कागजों पर 5010 मजदूरों की हाजिरी दर्ज कर करीब 250 चकबंधों और पक्के कामों को पूरा दिखा दिया गया। जब इस डिजिटल खेल की जमीनी पड़ताल की गई, तो भ्रष्टाचार की कलई खुलकर सामने आ गई।
सरकारी आंकड़ों और वीबी-जीरामजी पोर्टल के मुताबिक, 29 और 30 अक्तूबर को जब आम जनजीवन बारिश के कारण अस्त-व्यस्त था, तब जिले में रिकॉर्ड तोड़ विकास कार्य हो रहा था। पोर्टल पर दर्ज डेटा के मुताबिक, इन दो दिनों में 5010 मजदूरों ने मुस्तैदी से काम किया। यही नहीं, इन मजदूरों ने मूसलाधार बारिश के बीच 250 चकबंधों की मरम्मत का काम भी कागजों पर मुकम्मल कर दिया।
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इसके अलावा, तकनीकी रूप से बेहद संवेदनशील माने जाने वाले 20 पक्के निर्माण कार्यों को भी इसी अवधि में पूरा होना दर्शा दिया गया है। पोर्टल पर दोपहर तक धड़ाधड़ लग रही ऑनलाइन हाजिरी ने जब शक पैदा किया, तो मामले की हकीकत जानने के लिए टीम ने 15 अलग-अलग कार्यस्थलों पर पहुंचकर पड़ताल की। ग्राउंड जीरो पर पहुंचते ही पोर्टल के दावों की हवा निकल गई।
जिन जगहों पर कागजों में दर्जनों मजदूर चकबंध दुरुस्त करते हुए दिखाए गए थे, वहां बारिश के पानी के अलावा एक भी मददगार या मजदूर मौजूद नहीं था। टीम फतहपुर मंडाव ब्लॉक के लखनौर पहुंची वहां आरआरसी (कूड़ा घर) से चक होते हुए ईंट भट्ठा तक चक बंध कार्य पर मजदूर काम करते नहीं मिले।
फूलपुर में खेल मैदान के उत्तरी छोर से चक तक चकमार्ग पर मिट्टी कार्य पर मजदूर नहीं मिले। लधुवाई ग्राम पंचायत में मुस्तफाबाद में खेत होते हुए चकमार्ग मिट्टी कार्य पर भी मजदूर नहीं मिले।
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लेकिन जब आसमान से पानी बरस रहा था, तब विभाग के डिजिटल पोर्टल पर हजारों मजदूर पसीना बहा रहे थे। दो दिनों के भीतर कागजों पर 5010 मजदूरों की हाजिरी दर्ज कर करीब 250 चकबंधों और पक्के कामों को पूरा दिखा दिया गया। जब इस डिजिटल खेल की जमीनी पड़ताल की गई, तो भ्रष्टाचार की कलई खुलकर सामने आ गई।
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सरकारी आंकड़ों और वीबी-जीरामजी पोर्टल के मुताबिक, 29 और 30 अक्तूबर को जब आम जनजीवन बारिश के कारण अस्त-व्यस्त था, तब जिले में रिकॉर्ड तोड़ विकास कार्य हो रहा था। पोर्टल पर दर्ज डेटा के मुताबिक, इन दो दिनों में 5010 मजदूरों ने मुस्तैदी से काम किया। यही नहीं, इन मजदूरों ने मूसलाधार बारिश के बीच 250 चकबंधों की मरम्मत का काम भी कागजों पर मुकम्मल कर दिया।
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इसके अलावा, तकनीकी रूप से बेहद संवेदनशील माने जाने वाले 20 पक्के निर्माण कार्यों को भी इसी अवधि में पूरा होना दर्शा दिया गया है। पोर्टल पर दोपहर तक धड़ाधड़ लग रही ऑनलाइन हाजिरी ने जब शक पैदा किया, तो मामले की हकीकत जानने के लिए टीम ने 15 अलग-अलग कार्यस्थलों पर पहुंचकर पड़ताल की। ग्राउंड जीरो पर पहुंचते ही पोर्टल के दावों की हवा निकल गई।
जिन जगहों पर कागजों में दर्जनों मजदूर चकबंध दुरुस्त करते हुए दिखाए गए थे, वहां बारिश के पानी के अलावा एक भी मददगार या मजदूर मौजूद नहीं था। टीम फतहपुर मंडाव ब्लॉक के लखनौर पहुंची वहां आरआरसी (कूड़ा घर) से चक होते हुए ईंट भट्ठा तक चक बंध कार्य पर मजदूर काम करते नहीं मिले।
फूलपुर में खेल मैदान के उत्तरी छोर से चक तक चकमार्ग पर मिट्टी कार्य पर मजदूर नहीं मिले। लधुवाई ग्राम पंचायत में मुस्तफाबाद में खेत होते हुए चकमार्ग मिट्टी कार्य पर भी मजदूर नहीं मिले।

फतहपुर मंडाव ब्लॉक के लधुआई ग्राम पंचायत में बेचन के घर से गुफरान के खेत होते हुए सरवन के घर तक