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35 भवन स्वामियों को नोटिस, मांगा साक्ष्य
Updated Thu, 02 Aug 2018 12:15 AM IST
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मऊ। शहर के लिए शासन से जारी मास्टर प्लान का उल्लंघन करते हुए नदी की तलहटी की हरित पट्टी में मकान का निर्माण कराने की शिकायत को मास्टर प्लान विभाग ने गंभीरता से लिया है। विभाग के नोडल अधिकारी सिटी मजिस्ट्रेट ने 35 भवन स्वामियों को नोटिस जारी करते हुए उनसे बने मकान का साक्ष्य प्रस्तुत करने का आदेश दिया है। ताकि यह तय किया जा सके कि शिकायत में कितना दम है।
बताते चले 19 नंबर 1989 को मऊ जिले का सृजन किया गया, इस दरम्यान उस समय आनन फानन में विनियमित क्षेत्र के लिए मास्टर प्लान इस उद्देश्य से लागू किया गया, कि जबतक नया मास्टर प्लान लागू होगा, इसी नक्शे के आधार पर मकान आदि का नक्शा पास किया जाएगा। जिला गठित हुए 29 वर्ष हो चुका है। लेकिन नया मास्टर प्लान नहीं लागू किया जा सका। विभागीय अधिकारियों की मानें तो नया प्लान बनाने की प्रक्रिया चल रही है। दूसरी तरफ सशक्त मास्टर प्लान न होने के कारण शहर में लोग मनमाने तरह से मकान का निर्माण करा रहें है। ढेकुलिया घाट स्थित तमसा तट के किनारे लोगों ने अपने हिसाब से मकानों का निर्माण करा लिया है। इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि यदि नदी बढे तो धारा इन मकानों को जद में लेकर ही गुजरेगी।
पूर्व सभासद छोटेलाल गांधी ने मकान निर्माण में मास्टर प्लान की अनदेखी की शिकायत करते हुए सिटी मजिस्ट्रेट को ज्ञापन सौंपा। इसमें उन्होनें 35 लोगों पर ग्रीन लैंड में मकान का निर्माण कराने का आरोप लगाया। इस शिकायत के आधार पर सिटी मजिस्ट्रेट हंसराज यादव ने सभी मकान स्वामियों को साक्ष्य प्रस्तुत करने के लिए नोटिस जारी किया। सिटी मजिस्ट्रेट ने बताया कि जिन लोगों को नोटिस जारी किया गया है, उनको 15 दिन का समय दिया गया कि वो अपने दस्तावेज लेकर कार्यालय आए। ताकि यह देखा जाए कि शिकायत कितनी सही है।
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अमृत योजना में चयनित हुआ है जिला
मऊ। नगर क्षेत्र में मास्टर प्लान के अनुरुप कार्य हो और गलत निर्माण कराने वाले के विरूद्घ कार्रवाई करने के लिए तैनात जेई असगरी ने बताया कि अमृत योजना के तहत मऊ शहर के लिए मास्टर प्लान तैयार करने के लिए चयनित किया गया है। बोले वर्तमान में सेटलाइट से सर्वे का काम चल रहा। जल्द ही शहर के लिए नया मास्टर प्लान लागू होने की संभावना है। पूछे जाने पर जेई नहीं बता सके कि नगर क्षेत्र में ग्रीन लैंड के तहत कितना क्षेत्र आरक्षित किया गया है।
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बताते चले 19 नंबर 1989 को मऊ जिले का सृजन किया गया, इस दरम्यान उस समय आनन फानन में विनियमित क्षेत्र के लिए मास्टर प्लान इस उद्देश्य से लागू किया गया, कि जबतक नया मास्टर प्लान लागू होगा, इसी नक्शे के आधार पर मकान आदि का नक्शा पास किया जाएगा। जिला गठित हुए 29 वर्ष हो चुका है। लेकिन नया मास्टर प्लान नहीं लागू किया जा सका। विभागीय अधिकारियों की मानें तो नया प्लान बनाने की प्रक्रिया चल रही है। दूसरी तरफ सशक्त मास्टर प्लान न होने के कारण शहर में लोग मनमाने तरह से मकान का निर्माण करा रहें है। ढेकुलिया घाट स्थित तमसा तट के किनारे लोगों ने अपने हिसाब से मकानों का निर्माण करा लिया है। इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि यदि नदी बढे तो धारा इन मकानों को जद में लेकर ही गुजरेगी।
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पूर्व सभासद छोटेलाल गांधी ने मकान निर्माण में मास्टर प्लान की अनदेखी की शिकायत करते हुए सिटी मजिस्ट्रेट को ज्ञापन सौंपा। इसमें उन्होनें 35 लोगों पर ग्रीन लैंड में मकान का निर्माण कराने का आरोप लगाया। इस शिकायत के आधार पर सिटी मजिस्ट्रेट हंसराज यादव ने सभी मकान स्वामियों को साक्ष्य प्रस्तुत करने के लिए नोटिस जारी किया। सिटी मजिस्ट्रेट ने बताया कि जिन लोगों को नोटिस जारी किया गया है, उनको 15 दिन का समय दिया गया कि वो अपने दस्तावेज लेकर कार्यालय आए। ताकि यह देखा जाए कि शिकायत कितनी सही है।
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अमृत योजना में चयनित हुआ है जिला
मऊ। नगर क्षेत्र में मास्टर प्लान के अनुरुप कार्य हो और गलत निर्माण कराने वाले के विरूद्घ कार्रवाई करने के लिए तैनात जेई असगरी ने बताया कि अमृत योजना के तहत मऊ शहर के लिए मास्टर प्लान तैयार करने के लिए चयनित किया गया है। बोले वर्तमान में सेटलाइट से सर्वे का काम चल रहा। जल्द ही शहर के लिए नया मास्टर प्लान लागू होने की संभावना है। पूछे जाने पर जेई नहीं बता सके कि नगर क्षेत्र में ग्रीन लैंड के तहत कितना क्षेत्र आरक्षित किया गया है।