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कलाकारों के शानदार प्रस्तुति पर खूब बजी ताली
Updated Sat, 20 Jan 2018 12:12 AM IST
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मऊ। नगर स्थित हिंदी भवन के सभागार में चल रहे समूहन भ्राम्यमान नाट्य समारोह की दूसरी संध्या में कलाकारों के शानदार प्रस्तुति पर खूब ताली बटोरी। एंबियांस प्रस्तुति में यूपी के लोक गीत गायन पर दर्शकों की जमकर वाह वाही पाई। मुख्य अतिथि पुलिस अधीक्षक ललित कुमार सिंह, विशिष्ट अतिथि डॉ. पी एल गुप्ता, अध्यक्ष आइएमए डॉ. शिवकुमार सिंह रहे।
समारोह की नाट्य प्रस्तुति अजब गजब इंसाफ इहा कै का प्रभावशाली मंचन हुआ। 19वीं शताब्दी के अंतिम वर्षों में इंशाअल्ला खां की फारसी बहुल, राजा लक्ष्मण प्रसाद सिंह की संस्कृत बहुल और लल्लू लाल की ब्रज मिश्रित खडी बोली से उबार कर हिंदी की मूल अस्मिता को प्रतिष्ठित करने वाले भारतेंदु हरिश्चंद्र ने हिंदी गद्य की सभी विधाओं की शुरूआत कर प्रगति का मार्ग प्रशस्त किया। इन्हीं भारतेंदु बाबू की आज से सवा सौ वर्ष पूर्व की एक रचना इस नाटक का मूल आधार है, जो आज भी समीचीन है। राजनीतिक सत्ता और शासन व्यवस्था पर यह अनूठा व्यंग्य है।समाज की विभिन्न व्यवस्थाओं पर हास्यपूर्ण माहौल में करारा व्यंग्य किया गया है और इस बात की ओर संकेत किया गया है कि आदमी में विवेक न हो तो उसे आदमी कहलाने का हक नहीं है। भोजपुरी भाषा की मिट्टी की खूशबू और आधुनिक तथा लोक रंगो से सजी संगीतमय प्रस्तुति जो लोक और विभिन्न रंग उपकरणों का सृजनात्मक संगम है। इन्ही लोक और रंग परंपराओं से सजी अपनी दुनिया की कहानी रंग खिलौनों की जुबानी प्रस्तुत करने में राजकुमार शाह अपनी निर्देशकीय प्रभाव छोडने में अत्यंत सफल रहे। नाटक में महात्मा की भूमिका आशीष सिंह, गोवर्धन दास अजीत पटेल, नारायण दास सुजीत प्रजापति, चूरनवाला सत्यम कुमार, अखबार वाला अवनीश यादव, सब्जीवाली रिंपी वर्मा , कविता सोनकर, अनीता रूपा कुमारी, मिठाईवाला और कोतवाल रिशीकेश वर्मा, जातवाला दीपक निषाद, बनिया राकेश यादव, राजा हर्षवर्धन गुप्ता, मंत्री शेर सिंह राना, सिपाही के रूप में अवनीश यादव, अनुज मौर्या,दीपक निषाद, फरियादी कविता सोनकर और ठिकेदार की भूमिका में सिद्धार्थ यादव ने सराहना पाई। मंच परे संगीत अर्जुन टंडन, प्रवीण पाण्डेय का, कॉस्ट्यूम रोजी दूबे का और प्रकाश टोनी सिंह का सफल रहा। नाट्य आलेख राम प्रकाश शुक्ल ‘निर्मोही’ ने लिखा है। प्रॉडक्शन कंट्रोलर साधना सोनकर की भूमिका नाटक को सफल बनाने में सार्थक रही। प्रस्तुति परिकल्पना एवं निर्देशन राजकुमार शाह और रोजी दूबे ने किया।
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समारोह की नाट्य प्रस्तुति अजब गजब इंसाफ इहा कै का प्रभावशाली मंचन हुआ। 19वीं शताब्दी के अंतिम वर्षों में इंशाअल्ला खां की फारसी बहुल, राजा लक्ष्मण प्रसाद सिंह की संस्कृत बहुल और लल्लू लाल की ब्रज मिश्रित खडी बोली से उबार कर हिंदी की मूल अस्मिता को प्रतिष्ठित करने वाले भारतेंदु हरिश्चंद्र ने हिंदी गद्य की सभी विधाओं की शुरूआत कर प्रगति का मार्ग प्रशस्त किया। इन्हीं भारतेंदु बाबू की आज से सवा सौ वर्ष पूर्व की एक रचना इस नाटक का मूल आधार है, जो आज भी समीचीन है। राजनीतिक सत्ता और शासन व्यवस्था पर यह अनूठा व्यंग्य है।समाज की विभिन्न व्यवस्थाओं पर हास्यपूर्ण माहौल में करारा व्यंग्य किया गया है और इस बात की ओर संकेत किया गया है कि आदमी में विवेक न हो तो उसे आदमी कहलाने का हक नहीं है। भोजपुरी भाषा की मिट्टी की खूशबू और आधुनिक तथा लोक रंगो से सजी संगीतमय प्रस्तुति जो लोक और विभिन्न रंग उपकरणों का सृजनात्मक संगम है। इन्ही लोक और रंग परंपराओं से सजी अपनी दुनिया की कहानी रंग खिलौनों की जुबानी प्रस्तुत करने में राजकुमार शाह अपनी निर्देशकीय प्रभाव छोडने में अत्यंत सफल रहे। नाटक में महात्मा की भूमिका आशीष सिंह, गोवर्धन दास अजीत पटेल, नारायण दास सुजीत प्रजापति, चूरनवाला सत्यम कुमार, अखबार वाला अवनीश यादव, सब्जीवाली रिंपी वर्मा , कविता सोनकर, अनीता रूपा कुमारी, मिठाईवाला और कोतवाल रिशीकेश वर्मा, जातवाला दीपक निषाद, बनिया राकेश यादव, राजा हर्षवर्धन गुप्ता, मंत्री शेर सिंह राना, सिपाही के रूप में अवनीश यादव, अनुज मौर्या,दीपक निषाद, फरियादी कविता सोनकर और ठिकेदार की भूमिका में सिद्धार्थ यादव ने सराहना पाई। मंच परे संगीत अर्जुन टंडन, प्रवीण पाण्डेय का, कॉस्ट्यूम रोजी दूबे का और प्रकाश टोनी सिंह का सफल रहा। नाट्य आलेख राम प्रकाश शुक्ल ‘निर्मोही’ ने लिखा है। प्रॉडक्शन कंट्रोलर साधना सोनकर की भूमिका नाटक को सफल बनाने में सार्थक रही। प्रस्तुति परिकल्पना एवं निर्देशन राजकुमार शाह और रोजी दूबे ने किया।
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