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तमसा और घाघरा नदियों के बालू खनन पर लगी है 20 साल से रोक

Sun, 05 Aug 2018 12:48 AM IST
Updated Sun, 05 Aug 2018 12:48 AM IST
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तमसा और घाघरा नदियों के बालू खनन पर लगी है 20 साल से रोक
जनपद की दो नदियों से सफेद बालू का अवैध खनन सालों साल धड़ल्ले से होता है। इन दोनों नदियों से बालू खनन के ठेके पर हाई कोर्ट ने पिछले 20 सालों से रोक लगा रखी है। लेकिन फिर से यह धंधा शुरू हो गया है। गैर जिलों से आने वाले मोरंग बालू पर जिले में वन अथवा एआरटीओ अधिवहन शुल्क की वसूली तो नहीं होती लेकिन पड़ोसी जिले तक वसूली होती है। तमसा नदी से बालू निकालने को लेकर पिछले सालों में शहर केेतवाली और कोपागंज थाना क्षेत्रों में कई हत्याएं हो चुकी हैं। कोपागंज थाना क्षेत्र के सहरोज के पास और हलधरपुर थाना क्षेत्र पिपरसाथ सहित तमसा के तटवर्ती गांवों में बालू का अवैध खनन होता रहता है।
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यही हाल घाघरा नदी के बालू का है। घोसी और मधुबन तहसीलों क्षेत्रों में पड़ने वाले देवाररा क्षेत्रों से सालों साल सफेद बालू का काला धंधा बेरोक टोक चलता रहता है। रात में अवैध बालू खनन की होड़ में कई ट्रैक्टर चालकों की जान चली गई है। इनमें कई लोगों के विरुद्ध मुकदमे भी दर्ज हो गए हैं। शासन की ओर से निवर्तमान जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक को चेतावनी भी दी जा चुकी है। लेकिन इसके बावजूद जिले में अवैध खनन पर रोक मानों असंभव सी हो गई है। हालांकि डीएम और एसपी की ओर से संबंधित एसडीएम और थानाध्यक्षों को जिम्मेदारी दी गई है। लेकिन मामला जस का तस है। इसी साल जनवरी में तत्कालीन एसडीएम सदर कुमार हर्ष ने हलधरपुर थाना क्षेत्र के पिपरसाथ गांव और आस पास रात में अवैध खनन वाले स्थानों पर छापेमारी किया था। इस दौरान कई ट्रैक्टर ट्रालियों को पकड़ा था। कोपागंज थाना क्षेत्र के सहरोज गांव में अवैध बालू खनन कर रहे एक मजदूर की संदिग्ध मौत को लेकर काफी बखेड़ा हुआ था।
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कोट
जिले में तमसा और घाघरा नदियों से सफेद बालू के खनन पर हाई कोर्ट से रोक लगी हुई है। अभियान चलाकर अवैध खनन में लिप्त लोगों के विरुद्ध प्रभावी कार्रवाई की जाती है। बाहर से आने वाले मोरंग बालू पर जिले में कोई अधिवहन शुल्क की वसूली नहीं होती है। वन विभाग से एनओसी मांगी जाती है।
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डीपी पाल, अपर जिलाधिकारी
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