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मरम्मत न होने से जर्जर हुआ पीएचसी
Updated Sat, 14 Jul 2018 11:48 PM IST
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रानीपुर। रानीपुर ब्लाक के खुरहट स्थित प्राथमिक स्वास्थ्य शासन की लापरवाही के चलते अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहा है। 35 साल पहले बने इस अस्पताल का भवन इतना जर्जर हो चुका है कि मरीज से लेकर चिकित्सक तक इस भवन के अंदर जाने से खौफ खाते हैं। भवन की हालत इतनी खस्ता है कि यहां रोजाना छत से मलबे के नीचे गिरते हैं। विभाग की तरफ से अस्पताल की सुध ना लेनेे के कारण न केवल मरीज बल्कि चिकित्सक और कर्मचारी भी अस्पताल के अंदर जाने से कतराने लगे हैं।
मालूम हो कि 1985 में शासन द्वारा ब्लाक के 71 गांवों के हजारों ग्रामीणों को स्वास्थ सुविधाएं मुहैया कराने के लिए प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र बनाया गया। लेकिन इसके बाद एक बार भी मरम्मत कार्य न होने के चलते वर्तमान में अस्पताल जर्जर हालात में पहुंच चुका हैं। अस्पताल का ऑपरेशन कक्ष, लैब और स्टॉफ कक्ष और वार्ड कक्ष के क्षतिग्रस्त होने के चलते प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में चिकित्सक से लेकर कर्मचारी और मरीज तक जाने में कतराते हैं। कई बार अस्पताल में कमरे के छतों से छोटे मोटे मलबे गिरते रहते हैं। इसके बावजूद न केवल मरीज बल्कि यहां तैनात चिकित्सक और कर्मचारी भी जान हथेली पर रखकर अस्पताल के अंदर जाने को मजबूर है।
इस बावत अस्पताल के प्रभारी चिकित्साधिकारी डॉ. इफ्तेखार अहमद अंसारी का कहना है कि विभागीय उच्चाधिकारियों को पत्र लिखकर अवगत कराया गया है। इसके बावजूद भवन का मरम्मत कार्य नहीं कराया जा रहा है।
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मालूम हो कि 1985 में शासन द्वारा ब्लाक के 71 गांवों के हजारों ग्रामीणों को स्वास्थ सुविधाएं मुहैया कराने के लिए प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र बनाया गया। लेकिन इसके बाद एक बार भी मरम्मत कार्य न होने के चलते वर्तमान में अस्पताल जर्जर हालात में पहुंच चुका हैं। अस्पताल का ऑपरेशन कक्ष, लैब और स्टॉफ कक्ष और वार्ड कक्ष के क्षतिग्रस्त होने के चलते प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में चिकित्सक से लेकर कर्मचारी और मरीज तक जाने में कतराते हैं। कई बार अस्पताल में कमरे के छतों से छोटे मोटे मलबे गिरते रहते हैं। इसके बावजूद न केवल मरीज बल्कि यहां तैनात चिकित्सक और कर्मचारी भी जान हथेली पर रखकर अस्पताल के अंदर जाने को मजबूर है।
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इस बावत अस्पताल के प्रभारी चिकित्साधिकारी डॉ. इफ्तेखार अहमद अंसारी का कहना है कि विभागीय उच्चाधिकारियों को पत्र लिखकर अवगत कराया गया है। इसके बावजूद भवन का मरम्मत कार्य नहीं कराया जा रहा है।
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