फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Mau News ›   20 hour power supply is very tough at mau

आदेश हो गया जारी मगर 20 घंटे बिजली आपूर्ति करना है बड़ी चुनौती

Fri, 14 Apr 2017 12:59 AM IST
ब्यूरो,अमर उजाला,मऊ
ब्यूरो,अमर उजाला,मऊ Updated Fri, 14 Apr 2017 12:59 AM IST
विज्ञापन
20 hour power supply is very tough at mau
तार, फीडर, इंसुलेटर और अन्य उपकरण हैं जर्जर - फोटो : amar ujala
20 घंटे बिजली आपूर्ति का निर्देश तो जारी कर दिया गया है, लेकिन स्थानीय तहसील मुख्यालय पर 20 घंटे बिजली की सप्लाई देना विभाग के लिए बड़ी चुनौती है। दियारा से लेकर बेलौली तक 40 किलोमीटर लंबे क्षेत्र में फैले बिजली के जर्जर तार और दशकों पूर्व लगी फीडरों पर मशीनें यही कहती हैं।
विज्ञापन


जर्जर तार व बिजली विभाग में कर्मचारियों की कमी से भी इसमें तमाम अड़चनें भी आनी शुरू हो गई हैं। इसके अलावा तार, इंसुलेटर आदि भी दुरुस्त और पर्याप्त मात्रा चाहिए। इन सबसे इतर बिजली चोरी रोकना भी किसी चुनौती से कम नहीं है।
विज्ञापन


  कस्बा मधुबन को वर्तमान समय में बिजली पलिया सब स्टेशन और इसके आसपास बसे सैकड़ों गांवों को सब स्टेशन कटघरा शंकर रौजा, मोलनापुर और बेलौली सब स्टेशन से बिजली मिलती है। जबकि इन सब स्टेशनों को बिजली सेमरी जमालपुर सब स्टेशन से मिलती है। सेमरी जमालपुर से रौजा तक आने वाली एचटी लाईन लगभग छह दशक पुरानी है। जिसमें गर्मी के दिनों में आये दिन बिजली रहने के समय जर्जर  तारों की वजह से तार टूटकर गिरते रहते है। जर्जर तारों के चलते हल्की हवा आदि में भी तार आपस में टकराकर टूटते रहते हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन



रौजा स्थित एक पुरानी मशीन काम करने की स्थिति में नहीं है। संसाधनों की भी बेहद कमी है। अगर कहीं भी कोई सामान खराब होता है तो उसके लिए जिला हेडक्वार्टर गए बिना काम नहीं चलता है। ऐसी  स्थिति में 18 से 20 घंटे बिजली देने के लिए पहले जर्जर तारों, खंभों और  इंसुलेटर आदि को बदलने की दरकार है। यही नहीं निर्बाध बिजली चालू रखने के लिए  कर्मचारियों की भी कमी आड़े आती है।

सेमरी और मधुबन के बीच लंबी दूरी होने  के कारण रात में तार में फाल्ट आने पर सुबह का ही इंतजार करना पड़ता है। तीन फीडरों पर कुल  छह लाइनमैन हैं इनकी संख्या कम से कम दस होनी चाहिए। इसके अलावा तीन शिफ्ट के  लिए 12 एसएसओ होने चाहिए जबकि वर्तमान समय में इनकी बेहद कमी है। यही हाल कस्बे का है हालांकि कस्बे की सप्लाई के लिए तार नए बिछाए गए हैं, लेकिन कस्बे में आज भी पुराने तारों पर ही काम चलाया जा रहा है।



अवर अभियंता मुकेश कुमार का कहना है कि पेट्रोलिंग, लाइनमैन और  एसएसओ की कमी है जर्जर तार भी हैं अगर इनकी कमी दूर हो जाए और समय से इंस्ट्रूमेंट मिल जाए तो शासन की मंशा के अनुरूप बिजली दी जा सकती है।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed