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उजाड़े गए दलितों ने किया विरोध प्रदर्शन
Updated Mon, 16 Apr 2018 12:04 AM IST
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मऊ। परदहां ब्लाक के भवनाथपुर गांव निवासी और बेघर हुए परिवारों ने आवास की मांग करते हुए रविवार को गांव में प्रदर्शन किया। इस दौरान ग्रामीणों ने प्रशासन पर अनदेखी का आरोप लगाया। ग्रामीणों का आरोप है कि कोर्ट के आदेश पर तो उनके आवासों को प्रशासन ने आनन-फानन में ढहा दिया। लेकिन प्रशासन अब उनको जमीन का आवंटन करने में देर क्यों कर रहा।
एक अप्रैल को कोर्ट के आदेश पर सदर तहसील प्रशासन ने पोखरी के आराजी नंबर पर अनधिकृत तरीके से बने 12 आवासों को ढहा दिया था। तब से ये परिवार खुले आसमान के नीचे भीषण गर्मी और लू के थपेड़े, आंधी-पानी और बारिश का कहर सह रहे हैं। जबकि मकान गिराने के साथ ही एसडीएम ने बेघर हुए लोगों को जमीन का टुकड़ा पट्टा करने की बात कही थी। 15 दिन बीतने के बाद भी जब इन परिवारों को राहत नहीं मिली तो रविवार को उनके सब्र का बांध टूट गया। इस दौरान पीड़ितों ने गांव में धरना-प्रदर्शन किया। पीड़ितों का कहना था कि उन्हें उम्मीद थी कि जमीन के साथ आवास बनाने के लिए रुपये मिल जाएंगे। जिससे वे अपने आशियाने फिर से तैयार कर लेंगे। लेकिन 15 दिन से 12 दलित परिवारों आंधी, बारिश और अब तेज पछुआ हवा के साथ देह झुलसाती लू का सामना कर रहे हैं। एक अप्रैल को प्रशासन ने इस भूमि पर बसे जयराम, लक्षिराम, श्रीराम, बबलू, रवि, अच्छेलाल, व्यास, साहेब, गनेश, राम दरश, बाल किशुन और बालचंद के मकान गिरा दिया था। प्रशासन ने इन्हें भरोसा दिया था कि उन्हें आवास बनाने के लिए जमीन आवंटित कर दी जाएगी। कई लोगों को आवास आवंटित करने का आश्वासन दिया गया था। लेकिन 15 दिन बाद भी प्रशासन ने इनके लिए कुछ नहीं किया तो इनका धैर्य जवाब दे गया। रविवार को इन दलित परिवारों ने प्रशासन को उनके वादों की याद दिलाते विरोध-प्रदर्शन किया। इन परिवारों का कहना था कि उन्हें जल्द मदद दी जाए, जिससे वे अपने परिवारों को सिर छिपाने के लिए आशियाने बना सकें।
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एक अप्रैल को कोर्ट के आदेश पर सदर तहसील प्रशासन ने पोखरी के आराजी नंबर पर अनधिकृत तरीके से बने 12 आवासों को ढहा दिया था। तब से ये परिवार खुले आसमान के नीचे भीषण गर्मी और लू के थपेड़े, आंधी-पानी और बारिश का कहर सह रहे हैं। जबकि मकान गिराने के साथ ही एसडीएम ने बेघर हुए लोगों को जमीन का टुकड़ा पट्टा करने की बात कही थी। 15 दिन बीतने के बाद भी जब इन परिवारों को राहत नहीं मिली तो रविवार को उनके सब्र का बांध टूट गया। इस दौरान पीड़ितों ने गांव में धरना-प्रदर्शन किया। पीड़ितों का कहना था कि उन्हें उम्मीद थी कि जमीन के साथ आवास बनाने के लिए रुपये मिल जाएंगे। जिससे वे अपने आशियाने फिर से तैयार कर लेंगे। लेकिन 15 दिन से 12 दलित परिवारों आंधी, बारिश और अब तेज पछुआ हवा के साथ देह झुलसाती लू का सामना कर रहे हैं। एक अप्रैल को प्रशासन ने इस भूमि पर बसे जयराम, लक्षिराम, श्रीराम, बबलू, रवि, अच्छेलाल, व्यास, साहेब, गनेश, राम दरश, बाल किशुन और बालचंद के मकान गिरा दिया था। प्रशासन ने इन्हें भरोसा दिया था कि उन्हें आवास बनाने के लिए जमीन आवंटित कर दी जाएगी। कई लोगों को आवास आवंटित करने का आश्वासन दिया गया था। लेकिन 15 दिन बाद भी प्रशासन ने इनके लिए कुछ नहीं किया तो इनका धैर्य जवाब दे गया। रविवार को इन दलित परिवारों ने प्रशासन को उनके वादों की याद दिलाते विरोध-प्रदर्शन किया। इन परिवारों का कहना था कि उन्हें जल्द मदद दी जाए, जिससे वे अपने परिवारों को सिर छिपाने के लिए आशियाने बना सकें।
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