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भगवान श्रीराम के धनुष तोड़ते ही जयकारे से गूंज उठा वातावरण
Updated Sat, 02 Dec 2017 12:42 AM IST
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मझवारा। श्रीरामलीला समिति मझवारा की तरफ से प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र परिसर में आयोजित रामलीला में शुक्रवार को धनुष यज्ञ, मेला, भगवान राम व मां सीता स्वयंवर, परशुराम लक्ष्मण संवाद का मंचन किया गया। कलाकारों की मनमोहक प्रस्तुति ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।रामलीला मंचन में राजा जनक द्वारा स्वयंवर में महर्षि विश्वामित्र के साथ राम और लक्ष्मण को बुलाया जाता हैं। लंका के राजा रावण को आमंत्रित नही किया गया, फिर भी स्वप्न देख वे भी पधारे। वहां नभ मार्ग से रावण और बाणासुर पहुंच दोनो योद्धा अपना परिचय बताते हैं और रावण धनुष को उठाने का प्रयास करता है। तभी आकाश से भविष्यवाणी होती है कि उसकी कन्या को शुभनिशि को दानव ले जा रहे हैं। यह सुनकर रावण लंका की तरफ चल देता है। दूर देश से पधारे राजकुमार जब धनुष को हिला भी न सके तो राजा जनक ने निराश होकर कहा कि पृथ्वी वीरों से खाली है। ऐसे में मेरी पुत्री सीता अजीवन अविवाहित रह जाएगी। तब यह सुन विश्वामित्र की आज्ञा पाकर भगवान श्रीराम धनुष पर प्रत्यंचा चढ़ाकर तोड़ देते हैं। इसके बाद मां सीता भगवान श्रीराम के गले में जयमाल डाल देती हैं। इस मंचन के साथ ही मौजूद दर्शक जय श्रीराम का उद्घोष करने लगे। मंच पर उपस्थित कलाकारों ने मधुर गीत गाकर वातावरण को धार्मिक बना दिया। धनुष तोड़ने के बाद परशुराम व लक्ष्मण संवाद मंचन का भी दर्शकों ने भरपूर आनंद लिया। फिर परशुराम भगवान श्रीराम को पहचान कर क्षमा याचना करते हैं। जनक अयोध्या के राजा दशरथ को बारात लाने की सूचना देते हैं और राम सीता का विवाह संपन्न होता है। वहीं दर्शक बीच बीच में जय श्रीराम के नारे भी लगाते रहे। कलाकारों के इस मंचन ने समा बांध दी।
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