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सभी भाषाओं की जननी है संस्कृत
Updated Sun, 13 Aug 2017 12:27 AM IST
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मऊ। वरिष्ठ नागरिक नागरिक सेवा संस्थान के तत्वावधान में संस्कृत दिवस के अवसर पर सारस्वत समारोह का आयोजन किया गया। जिसमे संस्कृत के प्रखर विद्वान एवं पूर्व एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. विनोद कुमार तिवारी को सम्मानित किया गया।
इस मौके पर मृत्युंजय तिवारी ने संस्कृत भाषा को देव भाषा के रूप में प्रतिष्ठित किया। डॉ. चंद्र प्रकाश राय ने विनोद तिवारी के व्यक्तित्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि डॉ. तिवारी का संस्कृत दिवस पर सम्मान किया जाना सर्वथा उचित है । कमलेश राय ने कहा कि संस्कृत के विकास के लिए यह अति आवश्यक है कि इसमें समय के अनुरूप सहजता लाई जाए। डॉ. तिवारी ने संस्कृत को सभी भाषाओं की जननी बताया। सम्मान पत्र वाचन दयाशंकर तिवारी ने किया। इस अवसर पर विनोद तिवारी ने कहा कि संस्कृत के विकास में ही भारत तथा भारतीय समाज का विकास है। राम जी उपाध्याय ने अतिथियों के स्वागत के क्रम में संस्कृत भाषा को बच्चो के अंदर सम्मान के रूप में विकसित करने पर बल दिया। इस अवसर पर रमाकांत पाण्डेय, ऋषिकेश पाण्डेय, संतोष मिश्र आदि तमाम वरिष्ठ नागरिक मौजूद रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता राजनाथ तिवारी ने व संचालन राम निवास राय ने तथा शारदा वंदना परमानंद पांडेय ने किया। ब्यूरो
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इस मौके पर मृत्युंजय तिवारी ने संस्कृत भाषा को देव भाषा के रूप में प्रतिष्ठित किया। डॉ. चंद्र प्रकाश राय ने विनोद तिवारी के व्यक्तित्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि डॉ. तिवारी का संस्कृत दिवस पर सम्मान किया जाना सर्वथा उचित है । कमलेश राय ने कहा कि संस्कृत के विकास के लिए यह अति आवश्यक है कि इसमें समय के अनुरूप सहजता लाई जाए। डॉ. तिवारी ने संस्कृत को सभी भाषाओं की जननी बताया। सम्मान पत्र वाचन दयाशंकर तिवारी ने किया। इस अवसर पर विनोद तिवारी ने कहा कि संस्कृत के विकास में ही भारत तथा भारतीय समाज का विकास है। राम जी उपाध्याय ने अतिथियों के स्वागत के क्रम में संस्कृत भाषा को बच्चो के अंदर सम्मान के रूप में विकसित करने पर बल दिया। इस अवसर पर रमाकांत पाण्डेय, ऋषिकेश पाण्डेय, संतोष मिश्र आदि तमाम वरिष्ठ नागरिक मौजूद रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता राजनाथ तिवारी ने व संचालन राम निवास राय ने तथा शारदा वंदना परमानंद पांडेय ने किया। ब्यूरो
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