मऊ में 174 आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की सेवा समाप्त, अन्य की हो रही जांच
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राज्य सरकार ने 62 वर्ष की आयु सीमा पूरी करने वाली आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं की सेवा समाप्त करने का निर्णय लिया है। इसके साथ-साथ आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के क्रिया कलापों की जांच भी कराई जा रही। इस दौरान मऊ जिले में 174 आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की सेवा समाप्त कर दी गई है। इनका मानदेय रोक दिया गया है। साथ ही काम करने की आयु पूरी करने वालों का पता लगाया जा रहा है।
एक साथ 174 आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की सेवा समाप्त किए जाने से जिला कार्यक्रम कार्यालय से संचालित होने वाले कार्य प्रभावित होने लगें है। हालांकि, जिला कार्यक्रम अधिकारी दुुुर्गेश कुमार की माने तो आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के हटने से अभी तक कोई कार्य प्रभावित नहीं हुआ है। क्योंकि कोरोना काल में आंगनबाड़ी केंद्र बंद रखे गए है।
शासन को निरंतर यह शिकायत मिल रही है कि सरकार के दिशा-निर्देश के विपरीत अब भी 62 साल से ज्यादा आयु की आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं से सेवा ली जा रही है। उनको मानदेय दिया जा रहा है। इसको लेकर विशेष सचिव ने बीते 22 जुलाई को बाल विकास सेवा एवं पुष्टाहार के निदेशक को पत्र जारी किया।
इसमें काम करने की के लिए तय उम्र वालों की आयु सीमा निर्धारित कर उन्हें सेवानिवृत्त करने को कहा गया। इस पर जिले के नौ ब्लॉकों में तैनात 174 आगनबाड़ी कार्यकर्ता को चिह्नित कर उनकी सेवा समाप्त करने के लिए पत्र शासन को भेजा गया। इसमें 47 आंगनबाड़ी सहायिका और 127 आंगनबाड़ी कार्यकर्ता शामिल हैं।
जिला कार्यक्रम अधिकारी दुर्गेश कुमार ने बताया कि जनपद में मौजूदा समय में 2587 आंगनबाड़ी और 2587 सहायिका हैं। इसमें बीते माह 62 साल पूरा कर चुकी 174 की सेवा समाप्त करने का आदेश शासन ने जारी किया। लॉकडाउन के बाद से जिले के सभी आंगनबाड़ी केंद्रों के बंद चलने और जांच कार्य में उन आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की ड्यूटी लगाई गई, जिनकी उम्र पचास वर्ष से कम थी। ऐसे में इन कार्यकर्ताओं के हटने से फिलहाल कोई कार्य प्रभावित नहीं हुआ है। लेकिन विभागीय सूत्रों की मानें तो कार्यकर्ताओं के साथ सहायिकाओं के हटाए जाने से बाल पुष्टाहार वितरण का कार्य प्रभावित हुुआ है।
संबंधित केंद्र के कर्मचारी की जिम्मेदारी बढ़ी
सेवा समाप्ति के बाद कई आंगनबाड़ी केंद्रों में जगह खाली होने से परेशानी का सामना संबंधित केंद्र के कर्मचारी को करना पड़ रहा है। बताते चलें कि हर आंगनबाड़ी केंद्र पर एक आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और उसकी मदद के लिए एक सहायिका की तैनाती होती है।
ऐसे में 47 सहायिका के हटने से वहां की आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं पर केंद्र का बोझ आ गया है। वहीं 147 आंगनबाड़ी कार्यकर्ता के हटने पर वहां की जिम्मेदारी संबंधित केंद्र के कर्मचारी पर आ पड़ी हैं। विभाग इस कमी को दूर करने के लिए प्रस्ताव बनाकर शासन को भेज रहा है।