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प्रेम ही परमात्मा का स्वरूप है

Sat, 19 Jan 2019 11:50 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Sat, 19 Jan 2019 11:50 PM IST
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प्रेम ही परमात्मा का स्वरूप है
प्रेेेम ही परमात्मा का स्वरूप है
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सरसेना। स्थानीय नगर स्थित जमीन बुठान में भागवत कथा के तीसरे दिन शनिवार कथा व्यास गंगोत्री तिवारी मृदुल ने कहा कि प्रेम ही परमात्मा का स्वरूप हैं।भगवान को भाव से ही पाया जा सकता हैं।भगवान भाव के वशीभूत होकर शबरी जैसी भीलनी के जूठे वेर भी खाने को लालायित हो गये थे।भगवान इस बात को भूल गये कि मैं ब्रह्म हूँ । ये साधारण सी भीलनी के प्रेम मे समर्पण की भावना हो लोग कहते हैं। प्यार अन्धा होता है। लेकिन भगवान प्रेम की परिभाषा को दर्शाते हुये कहते हैं। प्रेम जब जीवन मे आता हैं। तो ज्ञान की दृष्टि जागृत हो जाती हैं। इस संबंध को समझते हुए। व्यास ने ध्रुव, द्रोपदी, प्रहलाद, राजा हरिश्चंद्र के बारे मे वर्णन किया महाराज श्री ने समाज मे फैली बुराइयां भांति अन्ध विश्वास भेद भाव पर प्रकाश डालते हुये कहा कि जब हमारे हृदय में ज्ञान रूपी प्रकाश समाहित होगा तो अन्धकार रूपी इन बुराइयों का विनाश होगा। इस अवसर पर मारकन्डेय पान्डेय, चंद्र भूषण पान्डेय,अनूप पान्डेय, विनय, संजय, नितिन, जगदीश, सुधांशु, मुन्ना, अमित, रमेश मिश्रा, शिव कुमार, समेत भारी संख्या मे श्रद्धालु उपस्थित रहे।
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