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भवन है, डॉक्टर हैं पर नहीं हैं दवाइयां
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मऊ। आयुष विंग के तहत एक ही छत के नीचे जिला अस्पताल परिसर में बने अस्पताल में अलग-अलग विधा के चिकित्सकों की तैनाती तो की गई है, लेकिन यहां एक वर्ष से अधिक समय से दवाओं का अकाल है। तैनात चिकित्सक अपनी विधा से हटकर मरीजों को एलोपैथिक दवा लिखते हैं। यहां सुविधाओं का अभाव होने से सन्नाटा पसरा रहता है। यही नहीं चिकित्सकों की अनियमित दिनचर्या से दूर दराज से आने वाले मरीजों को बैरंग लौटना पड़ता है। शिकायत के बाद भी मामले को गंभीरता से नहीं लिया जा सका है।
राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन की तरफ से जिला अस्पताल परिसर में लाखों की लागत से आयुष विंग का अस्पताल खुला तो जनपदवासियों को एक ही छत के नीचे तीन विधा से इलाज कराने की सुविधा की आस जगी, लेकिन विभागीय लापरवाही से लोगों के सपने पर ग्रहण लग गया। विभाग की तरफ से होमियोपैथिक, आयुर्वेद, यूनानी चिकित्सक के साथ तीन फार्मासिस्ट, स्टाफ नर्स, वार्ड ब्वाय की तैनाती की जानी थी। अलग-अलग विधा के चिकित्सकों की तैनाती तो कर दी, लेकिन अस्पताल में मात्र यूनानी विधा के फार्मासिस्ट की ही तैनाती है। अस्पताल में साफ सफाई की स्थिति दयनीय है। यहां एक वर्ष से अधिक समय से अस्पताल में दवाओं का अकाल है।
तैनात चिकित्सक अपनी विधा से हटकर एलोपैथिक दवाएं ही लिखते हैं। चिकित्सकों की मानें तो विभाग से दवा की आपूर्ति ही नहीं हो रही है। जबकि चिकित्सकों की अनियमित दिनचर्या से दूर दराज से आने वाले मरीजों को बैरंग लौटना पड़ रहा है। गत 15 दिन पूर्व राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के जिला कार्यक्रम प्रबंधक के निरीक्षण में दो चिकित्सक नदारद मिले थे। इलाज कराने के लिए मधुबन कस्बा से आए मरीज श्रीकांत सिंह, संजीव यादव, सुमन देवी का कहना है कि अस्पताल में दवाएं ही नहीं मिलती है। चिकित्सकों की अनियमित दिनचर्या से परेशानी का सामना करना पड़ता है। कई बार आने पर चिकित्सक मिल पाते हैं।
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सीएमओ डॉ. सतीश चंद्र सिंह का कहना है कि जिला कार्यक्रम प्रबंधक से रिपोर्ट मांगी गई है। गड़बड़ी मिलने पर संबंधित के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के जिला कार्यक्रम प्रबंधक रविंद्र नाथ का कहना है कि दवा की आपूर्ति की जाती है। 15 दिन पूर्व अस्पताल का निरीक्षण किया था। चिकित्सक सीट पर नहीं मिले थे। मुख्य चिकित्साधिकारी को रिपोर्ट भेजी गई है।
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राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन की तरफ से जिला अस्पताल परिसर में लाखों की लागत से आयुष विंग का अस्पताल खुला तो जनपदवासियों को एक ही छत के नीचे तीन विधा से इलाज कराने की सुविधा की आस जगी, लेकिन विभागीय लापरवाही से लोगों के सपने पर ग्रहण लग गया। विभाग की तरफ से होमियोपैथिक, आयुर्वेद, यूनानी चिकित्सक के साथ तीन फार्मासिस्ट, स्टाफ नर्स, वार्ड ब्वाय की तैनाती की जानी थी। अलग-अलग विधा के चिकित्सकों की तैनाती तो कर दी, लेकिन अस्पताल में मात्र यूनानी विधा के फार्मासिस्ट की ही तैनाती है। अस्पताल में साफ सफाई की स्थिति दयनीय है। यहां एक वर्ष से अधिक समय से अस्पताल में दवाओं का अकाल है।
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तैनात चिकित्सक अपनी विधा से हटकर एलोपैथिक दवाएं ही लिखते हैं। चिकित्सकों की मानें तो विभाग से दवा की आपूर्ति ही नहीं हो रही है। जबकि चिकित्सकों की अनियमित दिनचर्या से दूर दराज से आने वाले मरीजों को बैरंग लौटना पड़ रहा है। गत 15 दिन पूर्व राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के जिला कार्यक्रम प्रबंधक के निरीक्षण में दो चिकित्सक नदारद मिले थे। इलाज कराने के लिए मधुबन कस्बा से आए मरीज श्रीकांत सिंह, संजीव यादव, सुमन देवी का कहना है कि अस्पताल में दवाएं ही नहीं मिलती है। चिकित्सकों की अनियमित दिनचर्या से परेशानी का सामना करना पड़ता है। कई बार आने पर चिकित्सक मिल पाते हैं।
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सीएमओ डॉ. सतीश चंद्र सिंह का कहना है कि जिला कार्यक्रम प्रबंधक से रिपोर्ट मांगी गई है। गड़बड़ी मिलने पर संबंधित के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के जिला कार्यक्रम प्रबंधक रविंद्र नाथ का कहना है कि दवा की आपूर्ति की जाती है। 15 दिन पूर्व अस्पताल का निरीक्षण किया था। चिकित्सक सीट पर नहीं मिले थे। मुख्य चिकित्साधिकारी को रिपोर्ट भेजी गई है।