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रोजेदारों की सेवाकर चौधरी परिवार ने कायम रखी है साप्रदायिक सौहार्द
Updated Fri, 25 May 2018 12:12 AM IST
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मुस्लिम समुदाय का पवित्र रमजान माह चल रहा है। समुदाय के रोजेदार पूरे मनोयोग और पाक तौर तरीकों से रोजा रख रहे है। मुहम्मदाबाद गोहना कस्बा अपनी हिन्दू मुस्लिम एकता की मिशाल के लिए पूरे क्षेत्र में अलग पहचान रखता है। धर्म और मजहब के नाम पर समुदायों में जहां एक तरफ बहुत बड़ी खाई और दीवार दिखाई देती है तो दूसरी तरफ कुछ हिंदू परिवार ऐसे भी है जो रमजान माह में रोजा रखने और मुहर्रम के दौरान ताजिया रखकर एकता और अखंडता की मिशाल बने हुए हैं।
मोहम्मदाबाद गोहना कस्बा शेखवाड़ा मोहल्ला का चौधरी परिवार के सदस्य कुछ साल पहले तक पूरे माह रोजा रखते थे, रमजान की पवित्रता के साथ ही आपसी भाईचारगी और एकता का आदर्श कायम किए है। मौजूदा परिस्थितियों में अब चौधरी परिवार के सदस्य तो रोजा नही रखते है, लेकिन इसके चलते इस परिवार की आस्था मुस्लिम धर्म और रमजान के प्रति कही से कम नही हुई है। रमजान में रोजेदारों की सेवा करना और अपने सामर्थ्य के अनुसार उन्हें इफ्तार कराना इस परिवार कर्तव्यों में शुमार है। चौधरी परिवार के सदस्य महाजन, साजन, मोहन जमुना आदि आज भी मुहर्रम के दौरान अपने दरवाजे पर ताजिया रखते है और मुहर्रम के दौरान किए जाने वाले सभी प्रकार के गतिविधियों में शामिल होते है। हिन्दू मुस्लिम एकता की मिशाल का आदर्श उदाहरण यह है कि साड़ी और कपड़ा व्यवसाय से जुड़े महाजन और साजन चौधरी ने अपने प्रतिष्ठान का नाम अशरफ और महक साड़ी सेंटर रखा हुआ है। एक तरफ जहां अधिकांश लोगों में धर्म, मजहब, जाति आदि को लेकर तमाम विकार और वैचारिक मतभेद पैदा हो रहे है तो वही दूसरी तरफ चौधरी परिवार का यह संदेश सभी लोगो के लिए आदर्श बना हुआ है। बात करने पर चौधरी परिवार ने बताया कि सभी उपर वाले की इबादत करते है, बस मनाने का तरीका और नजरिया अपना अपना अलग होता है। इस लिए वो किसी भी धर्म में भेद नहीं रखते।
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मोहम्मदाबाद गोहना कस्बा शेखवाड़ा मोहल्ला का चौधरी परिवार के सदस्य कुछ साल पहले तक पूरे माह रोजा रखते थे, रमजान की पवित्रता के साथ ही आपसी भाईचारगी और एकता का आदर्श कायम किए है। मौजूदा परिस्थितियों में अब चौधरी परिवार के सदस्य तो रोजा नही रखते है, लेकिन इसके चलते इस परिवार की आस्था मुस्लिम धर्म और रमजान के प्रति कही से कम नही हुई है। रमजान में रोजेदारों की सेवा करना और अपने सामर्थ्य के अनुसार उन्हें इफ्तार कराना इस परिवार कर्तव्यों में शुमार है। चौधरी परिवार के सदस्य महाजन, साजन, मोहन जमुना आदि आज भी मुहर्रम के दौरान अपने दरवाजे पर ताजिया रखते है और मुहर्रम के दौरान किए जाने वाले सभी प्रकार के गतिविधियों में शामिल होते है। हिन्दू मुस्लिम एकता की मिशाल का आदर्श उदाहरण यह है कि साड़ी और कपड़ा व्यवसाय से जुड़े महाजन और साजन चौधरी ने अपने प्रतिष्ठान का नाम अशरफ और महक साड़ी सेंटर रखा हुआ है। एक तरफ जहां अधिकांश लोगों में धर्म, मजहब, जाति आदि को लेकर तमाम विकार और वैचारिक मतभेद पैदा हो रहे है तो वही दूसरी तरफ चौधरी परिवार का यह संदेश सभी लोगो के लिए आदर्श बना हुआ है। बात करने पर चौधरी परिवार ने बताया कि सभी उपर वाले की इबादत करते है, बस मनाने का तरीका और नजरिया अपना अपना अलग होता है। इस लिए वो किसी भी धर्म में भेद नहीं रखते।
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