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Mau News: रोशनपुर से दुबारी तक बनेगा 17 किमी बंधा, बाढ़ के दंश से मिलेगी आजादी
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मधुबन/दुबारी। देवाराचंल इलाकों के लोगों के लिए नया साल बाढ़ की विभीषिका से हमेशा के लिए आजादी दिलाने वाला साल बन सकता है। दरअसल बाढ़ की विभीषिका झेलने वाले इस इलाके के 100 से ज्यादा गांव को बाढ़ से बचाव को लेकर 17 किमी लंबा बंधा बनाने की योजना तैयार की जा चुकी है। इसको लेकर बाकायदा प्रदेश सरकार से अनुमति मिल चुकी है, अब केवल केंद्र सरकार की मुहर लगनी बाकी है।
इस काम को मधुबन विधायक रामविलास चौहान ने अपने ड्रीम प्रोजोक्ट में शामिल किया था। विधायक के इस प्रस्ताव को सिंचाई विभाग ने प्रदेश सरकार के अनुमति के बाद केंद्र सरकार के सेंट्रल वाटर कमीशन की आपत्ति का जवाब भेज दिया है। इस परियोजना पर 50 करोड़ रुपये खर्च होने की उम्मीद है। इस बंधे के बनने से मधुबन तहसील क्षेत्र के बाढ़ पीड़ितों की सबसे बड़ी समस्या का समाधान हो जाएगा।
जिले से गुजरने वाली सरयू नदी मधुबन तहसील के दुबारी के साथ दोहरीघाट ब्लॉक के 100 गांव के लिए हर साल किसी तबाही से कम नहीं है। इसका उदाहरण मधुबन तहसील का बिंदटोलिया गांव, केवटलिया, पंचपड़वा सहित कई गांव हैं। बीते पांच साल में 300 ग्रामीण सरयू की बाढ़ में अपना खेत नहीं, बल्कि अपना आशियाना गंवा चुके हैं, जिन्हें प्रशासन द्वारा 14 जगहों पर बसाया गया है। बाढ़ के चलते इन गांवों की हजारों हेक्टेयर फसल हर वर्ष इससे प्रभावित होती है। इतना ही नहीं इसका नुकसान मिट्टी की उपजाऊ क्षमता पर पड़ रहा है। बाढ़ से बचाव को लेकर लोगों की उम्मीद अब साकार होती दिख रही है।
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सिंचाई विभाग के अधिशाषी अभियंता मनोज सिंह ने बताया कि रिंग बंधा के लिए 50 करोड़ रुपये का प्रस्ताव भेजा गया था। इसके लिए राज्य सरकार से मंजूरी मिल गई है। दस्तावेज केंद्र सरकार के पास मंजूरी के लिए भेजा गया है। उम्मीद है कि इसी माह केंद्र सरकार से इस प्रस्ताव पर हरी झंडी मिल सकती है, इसके बाद 17 किमी लंबा बंधा बनाने का मार्ग खुल जाएगा। इसके बनने से दुबारी ग्राम पंचायत के साथ बखरिया, सिसवा, नुरुल्लाहपुर, धर्मपुर विशुनपुर सहित दर्जनों गांवों के लोग बाढ़ की विभीषिका से बच सकेंगे।
हर साल करोड़ों रुपये मुआवजा देता है प्रशासन
मधुबन। सरयू नदी में हर साल नेपाल द्वारा पानी छोड़े जाने के बाद बाढ़ का असर सबसे ज्यादा देवारांचल में ही दिखता है। इससे हर साल हजारों हेक्टेयर फसल डूब जाती है। इस साल भी सितंबर में दुबारी, विशुनपुर सहित कई गांव बाढ़ से घिर गए थे, जहां फसल बाढ़ में डूब गई थी, स्थिति यह थी कि बाढ़ से कई संपर्क मार्ग भी कट गए। प्रशासन ने इस संंबंध में सर्वे कर दस हजार से ज्यादा किसानों के खाते में आठ करोड़ की राशि भेजी थी। इसी तरह से क्षति आकलन की रिपोर्ट के आधार पर 2022 में तहसील मधुबन में आई बाढ़ से जनपद स्तर से 11,568 किसानों को 7,64,72,132 करोड़ की धनराशि भेजी गई थी। सरयू नदी में बाढ़ के चलते हर साल संपर्क मार्ग, मार्ग की मरम्मत पर ही लाखों रुपये खर्च होते हैं। लेकिन रिंग बंधा बनने से न केवल इस क्षेत्र के लोगों को बाढ़ से बचाव में मदद मिलेगा बल्कि प्रशासन-शासन का भी बजट इससे बचेगा।
इस काम को मधुबन विधायक रामविलास चौहान ने अपने ड्रीम प्रोजोक्ट में शामिल किया था। विधायक के इस प्रस्ताव को सिंचाई विभाग ने प्रदेश सरकार के अनुमति के बाद केंद्र सरकार के सेंट्रल वाटर कमीशन की आपत्ति का जवाब भेज दिया है। इस परियोजना पर 50 करोड़ रुपये खर्च होने की उम्मीद है। इस बंधे के बनने से मधुबन तहसील क्षेत्र के बाढ़ पीड़ितों की सबसे बड़ी समस्या का समाधान हो जाएगा।
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जिले से गुजरने वाली सरयू नदी मधुबन तहसील के दुबारी के साथ दोहरीघाट ब्लॉक के 100 गांव के लिए हर साल किसी तबाही से कम नहीं है। इसका उदाहरण मधुबन तहसील का बिंदटोलिया गांव, केवटलिया, पंचपड़वा सहित कई गांव हैं। बीते पांच साल में 300 ग्रामीण सरयू की बाढ़ में अपना खेत नहीं, बल्कि अपना आशियाना गंवा चुके हैं, जिन्हें प्रशासन द्वारा 14 जगहों पर बसाया गया है। बाढ़ के चलते इन गांवों की हजारों हेक्टेयर फसल हर वर्ष इससे प्रभावित होती है। इतना ही नहीं इसका नुकसान मिट्टी की उपजाऊ क्षमता पर पड़ रहा है। बाढ़ से बचाव को लेकर लोगों की उम्मीद अब साकार होती दिख रही है।
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सिंचाई विभाग के अधिशाषी अभियंता मनोज सिंह ने बताया कि रिंग बंधा के लिए 50 करोड़ रुपये का प्रस्ताव भेजा गया था। इसके लिए राज्य सरकार से मंजूरी मिल गई है। दस्तावेज केंद्र सरकार के पास मंजूरी के लिए भेजा गया है। उम्मीद है कि इसी माह केंद्र सरकार से इस प्रस्ताव पर हरी झंडी मिल सकती है, इसके बाद 17 किमी लंबा बंधा बनाने का मार्ग खुल जाएगा। इसके बनने से दुबारी ग्राम पंचायत के साथ बखरिया, सिसवा, नुरुल्लाहपुर, धर्मपुर विशुनपुर सहित दर्जनों गांवों के लोग बाढ़ की विभीषिका से बच सकेंगे।
हर साल करोड़ों रुपये मुआवजा देता है प्रशासन
मधुबन। सरयू नदी में हर साल नेपाल द्वारा पानी छोड़े जाने के बाद बाढ़ का असर सबसे ज्यादा देवारांचल में ही दिखता है। इससे हर साल हजारों हेक्टेयर फसल डूब जाती है। इस साल भी सितंबर में दुबारी, विशुनपुर सहित कई गांव बाढ़ से घिर गए थे, जहां फसल बाढ़ में डूब गई थी, स्थिति यह थी कि बाढ़ से कई संपर्क मार्ग भी कट गए। प्रशासन ने इस संंबंध में सर्वे कर दस हजार से ज्यादा किसानों के खाते में आठ करोड़ की राशि भेजी थी। इसी तरह से क्षति आकलन की रिपोर्ट के आधार पर 2022 में तहसील मधुबन में आई बाढ़ से जनपद स्तर से 11,568 किसानों को 7,64,72,132 करोड़ की धनराशि भेजी गई थी। सरयू नदी में बाढ़ के चलते हर साल संपर्क मार्ग, मार्ग की मरम्मत पर ही लाखों रुपये खर्च होते हैं। लेकिन रिंग बंधा बनने से न केवल इस क्षेत्र के लोगों को बाढ़ से बचाव में मदद मिलेगा बल्कि प्रशासन-शासन का भी बजट इससे बचेगा।