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प्राणियों में सद्भावना हो: मानस कोकिला विजय लक्ष्मी शुक्ला
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प्राणियों में सद्भावना हो: विजय लक्ष्मी
हलधरपुर। रतनपुरा ब्लाक क्षेत्र के भीमहर गांव स्थित दुर्गा मंदिर परिसर में चल रहे शतचंडी महायज्ञ के पांचवें दिन गुरुवार को श्रद्धालुओं ने यज्ञ स्थल की परिक्रमा कर पुण्य प्राप्त किया। साथ ही प्रवचन में कथा का रसपान करते रहे।
इस मौके पर गोरखपुर से पधारीं मानस कोकिला विजय लक्ष्मी शुक्ला ने कहा कि धर्म की जय हो, अधर्म का नाश हो। प्राणियों में सद्भावना हो। विश्व का कल्याण हो। गो -हत्या बंद हो, गंगा पवित्र हों। कहा कि जब राम को वन जाने का समय आ गया तो कैकयी के कक्ष में राजा दशरथ अचेत पड़े थे। श्रीराम जब उनके कक्ष में पहुंचे तो राम ने माताजी से पूछा कि पिताजी दुखी क्यों हैं। कहा कि हे राम तुम 14 वर्ष के लिए वन चले जाओ तो पिता का दुख दूर हो जाएगा। माता पिता की आज्ञा पर राम वन चले गए। वेद मंत्रोच्चार के बीच हवन पूजन होने से वातावरण भक्तिमय हो गया।
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हलधरपुर। रतनपुरा ब्लाक क्षेत्र के भीमहर गांव स्थित दुर्गा मंदिर परिसर में चल रहे शतचंडी महायज्ञ के पांचवें दिन गुरुवार को श्रद्धालुओं ने यज्ञ स्थल की परिक्रमा कर पुण्य प्राप्त किया। साथ ही प्रवचन में कथा का रसपान करते रहे।
इस मौके पर गोरखपुर से पधारीं मानस कोकिला विजय लक्ष्मी शुक्ला ने कहा कि धर्म की जय हो, अधर्म का नाश हो। प्राणियों में सद्भावना हो। विश्व का कल्याण हो। गो -हत्या बंद हो, गंगा पवित्र हों। कहा कि जब राम को वन जाने का समय आ गया तो कैकयी के कक्ष में राजा दशरथ अचेत पड़े थे। श्रीराम जब उनके कक्ष में पहुंचे तो राम ने माताजी से पूछा कि पिताजी दुखी क्यों हैं। कहा कि हे राम तुम 14 वर्ष के लिए वन चले जाओ तो पिता का दुख दूर हो जाएगा। माता पिता की आज्ञा पर राम वन चले गए। वेद मंत्रोच्चार के बीच हवन पूजन होने से वातावरण भक्तिमय हो गया।
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