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बदहाल पड़ा है बड़रांव सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र
Updated Mon, 16 Apr 2018 11:56 PM IST
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अमिला। बड़राव ब्लॉक मुख्यालय स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बदहाल पड़ा है। यहां विशेषज्ञ डॉक्टरों के पद रिक्त चल रहे हैं। यहां तक की चिकित्सकीय सुविधाओं की कमी है। एक्स-रे मशीन, अल्ट्रासाउंड, ईसीजी की व्यवस्था नहीं होने से केवल साधारण जांच ही हो पाती है। इससे डॉक्टर मरीज को मजबूरन जिला अस्पताल रेफर कर दहेते हैं। इस बावत लोगोें ने सुविधाओं की मांग को लेकर कई बाद स्वास्थ्य विभाग के उच्चाधिकारियों को प्रार्थना पत्र सौंपा लेकिन सीएचसी की बदहाली को दूर करने का कोई प्रयास नहीं किया जा रहा है।
ग्रामीणों को बेहतर चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराने को लेकर करीब डेढ़ दशक पूर्व पीएचसी को सीएचसी के रूप में उच्चीकृत किया गया। यहां पर 30 बेड का सीएचसी बनने के बाद वहां रोग विशेषज्ञ डॉक्टरों की तैनाती नहीं किए गए। इससे गंभीर रूप से बीमार मरीजों को 30 किमी दूर सदर अस्पताल जाना पड़ता है। जबकि सुविधा के नाम पर 30 बेड के साथ इमरजेंसी सेवा के साथ मरीजों के लिए एंबुलेंस की सुविधा भी है। लेकिन अस्पताल में एक्स-रे मशीन, अल्ट्रासाउंड, ईसीजी की व्यवस्था न होने से केवल साधारण जांच हो पाती है। साथ ही सुविधाओं की कमी से डॉक्टर अधिकांश मामलों को जिला अस्पताल रेफर कर दिया जाता है। चंद्रापार निवासी ओमप्रकाश और भेलउर निवासी सुशीला ने बताया कि वह इलाज के लिए अस्पताल में सुबह से दोपहर तक रहे, लेकिन डाक्टर नहीं आए तो मजबूरन घर वापस लौटना पड़ा और अगले दिन सदर अस्पताल जाना पड़ा। डिलीवरी के लिए आई रेनू, प्रेमलता ने बताया कि अस्पताल में दवा न मिलने से मजबूरन बाजार से महंगी दवाइयां खरीदनी पड़ी। सरकार झूठे दावे करती है कि इस अस्पताल में दवाइयां उपलब्ध रहती हैं। इस बावत अस्पताल अधीक्षक डा. श्रवण कुमार ने कहा कि डॉक्टर और संसाधनों को उपलब्ध कराने की मांग को लेकर वे विभागीय उच्चाधिकारियों को अवगत करा चुके हैं।
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ग्रामीणों को बेहतर चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराने को लेकर करीब डेढ़ दशक पूर्व पीएचसी को सीएचसी के रूप में उच्चीकृत किया गया। यहां पर 30 बेड का सीएचसी बनने के बाद वहां रोग विशेषज्ञ डॉक्टरों की तैनाती नहीं किए गए। इससे गंभीर रूप से बीमार मरीजों को 30 किमी दूर सदर अस्पताल जाना पड़ता है। जबकि सुविधा के नाम पर 30 बेड के साथ इमरजेंसी सेवा के साथ मरीजों के लिए एंबुलेंस की सुविधा भी है। लेकिन अस्पताल में एक्स-रे मशीन, अल्ट्रासाउंड, ईसीजी की व्यवस्था न होने से केवल साधारण जांच हो पाती है। साथ ही सुविधाओं की कमी से डॉक्टर अधिकांश मामलों को जिला अस्पताल रेफर कर दिया जाता है। चंद्रापार निवासी ओमप्रकाश और भेलउर निवासी सुशीला ने बताया कि वह इलाज के लिए अस्पताल में सुबह से दोपहर तक रहे, लेकिन डाक्टर नहीं आए तो मजबूरन घर वापस लौटना पड़ा और अगले दिन सदर अस्पताल जाना पड़ा। डिलीवरी के लिए आई रेनू, प्रेमलता ने बताया कि अस्पताल में दवा न मिलने से मजबूरन बाजार से महंगी दवाइयां खरीदनी पड़ी। सरकार झूठे दावे करती है कि इस अस्पताल में दवाइयां उपलब्ध रहती हैं। इस बावत अस्पताल अधीक्षक डा. श्रवण कुमार ने कहा कि डॉक्टर और संसाधनों को उपलब्ध कराने की मांग को लेकर वे विभागीय उच्चाधिकारियों को अवगत करा चुके हैं।
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