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13 दवाओं को एंटी टीबी के रूप में शामिल करने पर जोर
Updated Wed, 24 Jan 2018 12:12 AM IST
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दवा विक्रेता कल्याण संघ घोसी की बैठक मंगलवार को सीता कुंड स्थित संगठन के कार्यालय पर हुई। इसमें सरकार द्वारा टीबी की 13 दवाओं को एंटी टीबी के रूप में सम्मलित करने पर विरोध जताया गया।
बैठक को संबोधित करते हुए संगठन के अध्यक्ष अरविंद पांडेय ने कहा कि टीबी की 13 दवाओं को एंटी टीबी की दवाओं के ग्रुप में रखना अव्यवहारिक है। शेड्यूल एच1में आने से सबसे अधिक परेशानी गरीबों को होगी। उपरोक्त दवाओं को अब एमबीबीएस या एमडी ही लिख सकता है। इनकी फीस देने में गरीब असमर्थ रहेगा। कहा कि टीबी एक गंभीर बीमारी है। इसके चपेट में ज्यादातर रिक्शा वाला, मजदूर, बुनकर आदि आते हैं। इनके लिए अब इलाज कठिन होगा। दवाओं को पूर्व की भांति रखा जाए या टीबी के इलाज के लिए सरकार जगह-जगह शिविर लगाकर इलाज किया जाए और दवा दी जाए। इस अवसर पर रजनीश श्रीवास्तव, बृजेश, गोपाल सहानी, राजेश सहानी, संतोष आदि रहे।
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बैठक को संबोधित करते हुए संगठन के अध्यक्ष अरविंद पांडेय ने कहा कि टीबी की 13 दवाओं को एंटी टीबी की दवाओं के ग्रुप में रखना अव्यवहारिक है। शेड्यूल एच1में आने से सबसे अधिक परेशानी गरीबों को होगी। उपरोक्त दवाओं को अब एमबीबीएस या एमडी ही लिख सकता है। इनकी फीस देने में गरीब असमर्थ रहेगा। कहा कि टीबी एक गंभीर बीमारी है। इसके चपेट में ज्यादातर रिक्शा वाला, मजदूर, बुनकर आदि आते हैं। इनके लिए अब इलाज कठिन होगा। दवाओं को पूर्व की भांति रखा जाए या टीबी के इलाज के लिए सरकार जगह-जगह शिविर लगाकर इलाज किया जाए और दवा दी जाए। इस अवसर पर रजनीश श्रीवास्तव, बृजेश, गोपाल सहानी, राजेश सहानी, संतोष आदि रहे।
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