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बीज उत्पादक किसानों की परेशानी बढ़ी
Updated Sun, 18 Jun 2017 10:51 PM IST
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मऊ । जिला मुख्यालय पर लाखों की लागत से बने भवन में संचालित उप्र बीज प्रमाणीकरण संस्थान को पूरनपुर (पीलीभीत) स्थानांतरित कर दिया गया है। साथ ही मऊ को वाराणसी कार्यालय से संबद्ध कर दिया गया है। ऐसे में बीज उत्पादक किसानों की समस्याओं का निस्तारण नहीं हो पा रहा है।
पूर्वांचल में बीज उत्पादन में किसानों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए जिला मुख्यालय पर उप्र बीज प्रमाणीकरण संस्थान खोला गया। विभाग की तरफ से 52.75 लाख की लागत से भवन बनाया गया, लेकिन 24 नवंबर 2016 को संस्थान को पीलीभीत स्थानांतरण कर दिया गया। मऊ सहित पूर्वांचल के अन्य जनपदों को वाराणसी से संबद्ध कर देने से किसानों को सुविधा नहीं मिल पा रही है। इस मामले में अखिल भारतीय ग्राहक पंचायत के जिला संयोजक राघवेंद्र राय शर्मा ने मुख्यमंत्री कार्यालय को पत्र भेजा। मुख्यमंत्री कार्यालय ने जन सुनवाई पोर्टल पर शिकायत दर्ज करते हुए जिलाधिकारी से रिपोर्ट मांगी। डीएम के निर्देश पर उप निदेशक कृषि ने अपनी रिपोर्ट में लिखा है कि प्रभारी उप निदेशक उप्र बीज प्रमाणीकरण ने बीज प्रमाणीकरण संस्थान को पीलीभीत स्थानांतरित कर दिया है। उक्त संस्था को जनपद में दोबारा स्थापित करने के लिए पत्राचार चल रहा है। उधर, किसानों की मानें तो संस्थान से मऊ, गाजीपुर, बलिया, आजमगढ़ जिले के 700 से अधिक किसानों को वैज्ञानिक विधि से बीज उत्पादन के गुर सिखाए जा रहे थे। किसान धान और गेहूं का बीज उत्पादन कर मुनाफा कमा रहे थे। लेकिन जनपद को वाराणसी कार्यालय से संबद्ध कर दिए जाने के चलते किसानों को सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं।
इस संबंध में शिकायतकर्ता राघवेंद्र राय शर्मा का कहना था कि विभागीय अधिकारियों ने तुगलकी फरमान के तहत बीज प्रमाणीकरण संस्थान को पीलीभीत स्थानांतरित कर दिया। जबकि वहां 23 किमी के अंदर ही बीज प्रमाणीकरण संस्था खोली गई है। ऐसे में जिले के किसानों के हित में बीज प्रमाणीकरण संस्थान को दोबारा यहां खोला जाय। उधर, उप निदेशक कृषि डॉ. आशुतोष मिश्र ने बताया कि बीज प्रमाणीकरण संस्थान को जनपद में पुर्नस्थापित कराने के लिए संबंधित विभाग से पत्राचार जारी है।
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पूर्वांचल में बीज उत्पादन में किसानों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए जिला मुख्यालय पर उप्र बीज प्रमाणीकरण संस्थान खोला गया। विभाग की तरफ से 52.75 लाख की लागत से भवन बनाया गया, लेकिन 24 नवंबर 2016 को संस्थान को पीलीभीत स्थानांतरण कर दिया गया। मऊ सहित पूर्वांचल के अन्य जनपदों को वाराणसी से संबद्ध कर देने से किसानों को सुविधा नहीं मिल पा रही है। इस मामले में अखिल भारतीय ग्राहक पंचायत के जिला संयोजक राघवेंद्र राय शर्मा ने मुख्यमंत्री कार्यालय को पत्र भेजा। मुख्यमंत्री कार्यालय ने जन सुनवाई पोर्टल पर शिकायत दर्ज करते हुए जिलाधिकारी से रिपोर्ट मांगी। डीएम के निर्देश पर उप निदेशक कृषि ने अपनी रिपोर्ट में लिखा है कि प्रभारी उप निदेशक उप्र बीज प्रमाणीकरण ने बीज प्रमाणीकरण संस्थान को पीलीभीत स्थानांतरित कर दिया है। उक्त संस्था को जनपद में दोबारा स्थापित करने के लिए पत्राचार चल रहा है। उधर, किसानों की मानें तो संस्थान से मऊ, गाजीपुर, बलिया, आजमगढ़ जिले के 700 से अधिक किसानों को वैज्ञानिक विधि से बीज उत्पादन के गुर सिखाए जा रहे थे। किसान धान और गेहूं का बीज उत्पादन कर मुनाफा कमा रहे थे। लेकिन जनपद को वाराणसी कार्यालय से संबद्ध कर दिए जाने के चलते किसानों को सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं।
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इस संबंध में शिकायतकर्ता राघवेंद्र राय शर्मा का कहना था कि विभागीय अधिकारियों ने तुगलकी फरमान के तहत बीज प्रमाणीकरण संस्थान को पीलीभीत स्थानांतरित कर दिया। जबकि वहां 23 किमी के अंदर ही बीज प्रमाणीकरण संस्था खोली गई है। ऐसे में जिले के किसानों के हित में बीज प्रमाणीकरण संस्थान को दोबारा यहां खोला जाय। उधर, उप निदेशक कृषि डॉ. आशुतोष मिश्र ने बताया कि बीज प्रमाणीकरण संस्थान को जनपद में पुर्नस्थापित कराने के लिए संबंधित विभाग से पत्राचार जारी है।
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