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गंभीर चोट पहुंचाने में एक दोषी, परिवीक्षा पर छोड़ा गया
Updated Tue, 25 Sep 2018 01:16 AM IST
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मऊ। अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश कोर्ट नंबर तीन आराधना रानी की अदालत ने मारपीट कर गंभीर चोट पहुंचाने के मामले में नामजद दो आरोपियों में एक को दोषी पाया। दोषी पाए जाने के बाद उसकी उम्र को देखते हुए उसे धारा चार परिवीक्षा अधिनियम का लाभ देते हुए एक वर्ष तक सदाचार बनाए रखने की राय देते हुए छोड़ दिया । मामला कोपागंज थाना क्षेत्र का है।
मामले के अनुसार, फैजुल्लापुर गांव निवासी रामानंद राय पुत्र स्व.धनपत राय की तहरीर पर रिपोर्ट दर्ज हुई। वादी का कथन था कि वह तीन सितंबर 2000 को अपने ट्यूवेल पर लेटा था कि उसी समय गांव के आरोपीगण सुमेर पुत्र अलगू और बृजेश पुत्र सुमेर आए और उसे गाली गुप्ता देते हुए मारपीटे जिससे उसका फैक्चर हो गया । पुलिस ने मामले की रिपोर्ट दर्ज कर विवेचना के बाद आरोप पत्र कोर्ट में प्रेषित किया। कोर्ट में आरोपी बृजेश के नाबालिक होने के चलते उसकी पत्रावली किशोर न्याय बोर्ड भेज दी गई। अभियोजन ने आठ गवाहों को पेश किया। एडीजे ने दोनों पक्षों के तर्कों को सुनने तथा पत्रावली पर उपलब्ध साक्ष्यों का अवलोकन करने के बाद सुमेर को मारपीट, गाली और गंभीर चोट पहुंचाने के मामले में दोषी पाया। दोषी पाए जाने के बाद उसे परिवीक्षा अधिनियम नियम का लाभ देते हुए एक वर्ष तक सदाचार बनाए रखने की हिदायत देते हुए छोड़ दिया। इस मामले की क्रास केस में आरोपी रहे रामानंद की मौत हो जाने के चलते उनके मुकदमे की कार्रवाई समाप्त कर दी गई थी।
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मामले के अनुसार, फैजुल्लापुर गांव निवासी रामानंद राय पुत्र स्व.धनपत राय की तहरीर पर रिपोर्ट दर्ज हुई। वादी का कथन था कि वह तीन सितंबर 2000 को अपने ट्यूवेल पर लेटा था कि उसी समय गांव के आरोपीगण सुमेर पुत्र अलगू और बृजेश पुत्र सुमेर आए और उसे गाली गुप्ता देते हुए मारपीटे जिससे उसका फैक्चर हो गया । पुलिस ने मामले की रिपोर्ट दर्ज कर विवेचना के बाद आरोप पत्र कोर्ट में प्रेषित किया। कोर्ट में आरोपी बृजेश के नाबालिक होने के चलते उसकी पत्रावली किशोर न्याय बोर्ड भेज दी गई। अभियोजन ने आठ गवाहों को पेश किया। एडीजे ने दोनों पक्षों के तर्कों को सुनने तथा पत्रावली पर उपलब्ध साक्ष्यों का अवलोकन करने के बाद सुमेर को मारपीट, गाली और गंभीर चोट पहुंचाने के मामले में दोषी पाया। दोषी पाए जाने के बाद उसे परिवीक्षा अधिनियम नियम का लाभ देते हुए एक वर्ष तक सदाचार बनाए रखने की हिदायत देते हुए छोड़ दिया। इस मामले की क्रास केस में आरोपी रहे रामानंद की मौत हो जाने के चलते उनके मुकदमे की कार्रवाई समाप्त कर दी गई थी।
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