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जीवन में सुखपूर्वक जीने के लिए होती है अनेक गुणों की आवश्यकता
Updated Sun, 02 Sep 2018 11:04 PM IST
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आर्य समाज मंदिर परिसर में चल रहा आर्य समाज का वेद प्रचार सप्ताह रविवार को संपन्न हो गया। समापन दिवस के यजमान डीएवी इंटर कॉलेज के प्राचार्य देवभाष्कर तिवारी तथा युवा भारत के सह राज्य प्रभारी बृजमोहन पांडेय सपत्नीक उपस्थित रहे।
इस मौके पर लखनऊ से पधारे यज्ञ ब्रह्मा आचार्य विश्वव्रत शास्त्री ने कहा कि जीवन में सुखपूर्वक जीने के लिए हमें अनेक गुणों की आवश्यकता होती है। वे गुण हमें सुख देते हैं और यदि जीवन में अच्छे गुण न हों, दोष हों, तो वे दुख देते हैं। इसलिए व्यक्ति को सदा सावधान गुणवान, बुद्धिमान, धार्मिक, सदाचारी, नम्र, सुशील ईश्वर भक्त चरित्रवान इत्यादि गुणों वाला बनना चाहिए। जिससे कि वह सदा सुखी रहे। झूठ, छल, कपट, धोखा, बेईमानी, चरित्रहीनता, अभिमान इत्यादि दोषों से सदा बचना चाहिए। क्योंकि ये सारे दोष उस व्यक्ति को भी दुख देते हैं तथा दूसरों को भी दुख देते हैं। इन्हीं गुणों में एक गुण है नम्रता का। बहुत ही अच्छा है, अन्य गुणों के साथ-साथ नम्रता भी सीखनी चाहिए। नम्र व्यक्ति सदा प्रफुल्लित, आनंदित रहता है। आप भी अपने जीवन में नम्रता लाकर देखें, फिर पता चलेगा जीवन में कितना आनंद है। श्रीकृष्ण जी की महिमा का गुणगान करते हुए कहा कि वैदिक परंपरा में कृष्ण को योगेश्वर कहा जाता है, परंतु आज समाज के अज्ञानी लोगों ने उनके अलग-अलग नाम रखकर योगीराज कृष्ण जी के पवित्र नाम को बदनाम करने में लगे हुए हैं, किसी ने उन्हें मनिहारन का रूप कहा, तो किसी ने उन्हें छलिया और माखनचोर नाम से पुकारा। क्योंकि उन लोगों के कृष्ण के वास्तविक स्वरूप का पता नहीं है। दिल्ली से पधारे पं. दिनेशदत्त आर्य ने बताया कि कृष्ण एक नाम है मुंह बोलती सच्चाई का, इस अवसर पर दिनेशनंदन राय, सर्वेशराय, पं. हरिशंकर मिश्र, सत्यप्रकाश आर्य, सुरेंद्र आर्य, प्रशांतरत्नम सिंह, रमेश्चन्द्र आर्य, शिवमुनि, रमाशंकर आर्य, बब्बन वर्मा, चंद्रजीत आर्य, भैरोनाथ आर्य, संतोष आर्य, वीरेंद्र आर्य, सुरेन्द्र आर्य, राजेश वर्मा आदि शामिल रहे।
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इस मौके पर लखनऊ से पधारे यज्ञ ब्रह्मा आचार्य विश्वव्रत शास्त्री ने कहा कि जीवन में सुखपूर्वक जीने के लिए हमें अनेक गुणों की आवश्यकता होती है। वे गुण हमें सुख देते हैं और यदि जीवन में अच्छे गुण न हों, दोष हों, तो वे दुख देते हैं। इसलिए व्यक्ति को सदा सावधान गुणवान, बुद्धिमान, धार्मिक, सदाचारी, नम्र, सुशील ईश्वर भक्त चरित्रवान इत्यादि गुणों वाला बनना चाहिए। जिससे कि वह सदा सुखी रहे। झूठ, छल, कपट, धोखा, बेईमानी, चरित्रहीनता, अभिमान इत्यादि दोषों से सदा बचना चाहिए। क्योंकि ये सारे दोष उस व्यक्ति को भी दुख देते हैं तथा दूसरों को भी दुख देते हैं। इन्हीं गुणों में एक गुण है नम्रता का। बहुत ही अच्छा है, अन्य गुणों के साथ-साथ नम्रता भी सीखनी चाहिए। नम्र व्यक्ति सदा प्रफुल्लित, आनंदित रहता है। आप भी अपने जीवन में नम्रता लाकर देखें, फिर पता चलेगा जीवन में कितना आनंद है। श्रीकृष्ण जी की महिमा का गुणगान करते हुए कहा कि वैदिक परंपरा में कृष्ण को योगेश्वर कहा जाता है, परंतु आज समाज के अज्ञानी लोगों ने उनके अलग-अलग नाम रखकर योगीराज कृष्ण जी के पवित्र नाम को बदनाम करने में लगे हुए हैं, किसी ने उन्हें मनिहारन का रूप कहा, तो किसी ने उन्हें छलिया और माखनचोर नाम से पुकारा। क्योंकि उन लोगों के कृष्ण के वास्तविक स्वरूप का पता नहीं है। दिल्ली से पधारे पं. दिनेशदत्त आर्य ने बताया कि कृष्ण एक नाम है मुंह बोलती सच्चाई का, इस अवसर पर दिनेशनंदन राय, सर्वेशराय, पं. हरिशंकर मिश्र, सत्यप्रकाश आर्य, सुरेंद्र आर्य, प्रशांतरत्नम सिंह, रमेश्चन्द्र आर्य, शिवमुनि, रमाशंकर आर्य, बब्बन वर्मा, चंद्रजीत आर्य, भैरोनाथ आर्य, संतोष आर्य, वीरेंद्र आर्य, सुरेन्द्र आर्य, राजेश वर्मा आदि शामिल रहे।
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