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सावधान सक्रिय है साइबर अपराधी, संभलकर रहें आप
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मऊ। ऑनलाइन सेवाओं से जहां लोगों को सहूलियत हुई है वहीं साइबर अपराध की घटनाएं बढ़ी हैं। साइबर अपराध से बचने के लिए सतर्कता से बचाव का एकमात्र साधन है। साइबर अपराधी सक्रिय हैं और वे घटनाओं को अंजाम देते चले जा रहे हैं। जिले के आकड़ों पर नजर डालें तो एक वर्ष में 106 लोग साइबर अपराध के शिकार हुए। इन मामलों में रिपोर्ट दर्ज कर पुलिस ने 43 लाख 91 हजार 100 रुपये रिकवर किया। इस दौरान 35 लोग गिरफ्तार किए गए। साइबर सेल का मानना है कि यह अपराध तभी रुकेगा जब आम जनता जागरूक होगी।
जनवरी से दिसंबर 2020 के बीच जिले में साइबर अपराध के कुल 106 मामले पंजीकृत किए गए। इसमें अपराधियों ने 54 लाख 67 हजार 899 रुपये उड़ाए। समय से सूचना मिलने पर पुलिस ने कार्रवाई की और 43 लाख 91 हजार 100 रुपये बरामद किया। इस काम में शामिल 35 लोगों को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। इन मामलों में सबसे बड़ी घटना का पर्दाफाश घोसी में हुआ। यहां साइबर अपराधियों ने मनोज शर्मा नामक व्यक्ति के खाते से नौ लाख रुपया उड़ा दिया। जबकि पीड़ित बाहर रहता था, घर लौटने पर उसे घटना की जानकारी हुई, इस दौरान पुलिस रिपोर्ट दर्ज कर जांच शुरू की। जांच के दौरान 26 जून को पुलिस ने पांच लोगों को गिरफ्तार किया। पकड़े गए आरोपियों में दो जनसेवा केंद्र संचालक शामिल थे। वो आधार कार्ड से रुपया निकालने आने वालों का फर्जी तरीके से अंगुष्ठ छाप बनाने का काम कर खाते से रुपया निकालने का काम करते है। आरोपियों के पास से पुलिस ने दो चार पहिया वाहन के साथ लैपटॉप, हैकिंग के दौरान प्रयोग होने वाली डिवाइस के साथ अंगूठे का क्लोन बरामद किया।
सतर्कता ही बचाव का एकमात्र उपाय
मऊ। पुलिस अधीक्षक सुशील घुले ने बताया कि साइबर अपराध की जानकारी संबंधित व्यक्ति को तब होती है जब नुकसान हो गया होता है। सतर्क और जागरूक रहकर ही साइबर क्राइम से बचा जा सकता है। इन दिनों कोरोना वैक्सीन के नाम पर ऑनलाइन ठगी हो रही है। ऐसे में वैक्सीन के लिए ऑन लाइन पंजीकरण नहीं कराना चाहिए। ओटीपी शेयर न करें और न ही किसी को आधार कार्ड का नंबर बताएं। यदि कोई काल कोरोना वैक्सीन से संबंधित आए तो साइबर सेल को सूचना दें। एटीएम का प्रयोग करते समय सावधानी बरतें। एटीएम कार्ड या पिन नंबर शेयर न करें। एटीएम का पासवर्ड जन्म तिथि न बनाएं। एटीएम की रसीद को संभाल कर रखें। बैंक कर्मचारी बनकर आने वाली फेक काल से सावधान रहें। बैंक कभी फोनकर कोई डिटेल नहीं मांगता है। सोशल मीडिया पर अनजान से दोस्ती ना करें।
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कोट
साइबर अपराध से बचने के लिए सावधानी और जागरूकता आवश्यक है। अपराधी लापरवाह लोगों को टारगेट करते हैं। ऐसे में सतर्क ही बचाव का उपाय है। घटना होने पर तत्काल इसकी सूचना साइबर सेल को दें। संदिग्ध व्यक्ति दिखे तो पुलिस को सूचित करें।-सुशील घुले, एसपी मऊ।
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जनवरी से दिसंबर 2020 के बीच जिले में साइबर अपराध के कुल 106 मामले पंजीकृत किए गए। इसमें अपराधियों ने 54 लाख 67 हजार 899 रुपये उड़ाए। समय से सूचना मिलने पर पुलिस ने कार्रवाई की और 43 लाख 91 हजार 100 रुपये बरामद किया। इस काम में शामिल 35 लोगों को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। इन मामलों में सबसे बड़ी घटना का पर्दाफाश घोसी में हुआ। यहां साइबर अपराधियों ने मनोज शर्मा नामक व्यक्ति के खाते से नौ लाख रुपया उड़ा दिया। जबकि पीड़ित बाहर रहता था, घर लौटने पर उसे घटना की जानकारी हुई, इस दौरान पुलिस रिपोर्ट दर्ज कर जांच शुरू की। जांच के दौरान 26 जून को पुलिस ने पांच लोगों को गिरफ्तार किया। पकड़े गए आरोपियों में दो जनसेवा केंद्र संचालक शामिल थे। वो आधार कार्ड से रुपया निकालने आने वालों का फर्जी तरीके से अंगुष्ठ छाप बनाने का काम कर खाते से रुपया निकालने का काम करते है। आरोपियों के पास से पुलिस ने दो चार पहिया वाहन के साथ लैपटॉप, हैकिंग के दौरान प्रयोग होने वाली डिवाइस के साथ अंगूठे का क्लोन बरामद किया।
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सतर्कता ही बचाव का एकमात्र उपाय
मऊ। पुलिस अधीक्षक सुशील घुले ने बताया कि साइबर अपराध की जानकारी संबंधित व्यक्ति को तब होती है जब नुकसान हो गया होता है। सतर्क और जागरूक रहकर ही साइबर क्राइम से बचा जा सकता है। इन दिनों कोरोना वैक्सीन के नाम पर ऑनलाइन ठगी हो रही है। ऐसे में वैक्सीन के लिए ऑन लाइन पंजीकरण नहीं कराना चाहिए। ओटीपी शेयर न करें और न ही किसी को आधार कार्ड का नंबर बताएं। यदि कोई काल कोरोना वैक्सीन से संबंधित आए तो साइबर सेल को सूचना दें। एटीएम का प्रयोग करते समय सावधानी बरतें। एटीएम कार्ड या पिन नंबर शेयर न करें। एटीएम का पासवर्ड जन्म तिथि न बनाएं। एटीएम की रसीद को संभाल कर रखें। बैंक कर्मचारी बनकर आने वाली फेक काल से सावधान रहें। बैंक कभी फोनकर कोई डिटेल नहीं मांगता है। सोशल मीडिया पर अनजान से दोस्ती ना करें।
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साइबर अपराध से बचने के लिए सावधानी और जागरूकता आवश्यक है। अपराधी लापरवाह लोगों को टारगेट करते हैं। ऐसे में सतर्क ही बचाव का उपाय है। घटना होने पर तत्काल इसकी सूचना साइबर सेल को दें। संदिग्ध व्यक्ति दिखे तो पुलिस को सूचित करें।-सुशील घुले, एसपी मऊ।