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जिले में 102 मरीजों का घर पर हो रहा है उपचार

Sun, 18 Oct 2020 10:18 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Sun, 18 Oct 2020 10:18 PM IST
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102 patients are being treated at home in the district
मऊ। कोरोना संक्रमण काल में एकबारगी मरीजों की संख्या बढ़ने पर प्रदेश सरकार ने जुलाई माह में संक्रमित मरीजों को शर्तों के साथ होम आइसोलेशन में रखने का आदेश जारी किया था। इसमें भी उन्हीं को होम आइसोलेशन में रखना था, जिनके अंदर संक्रमण का लक्षण कम दिखता हो। लेकिन समय के साथ संक्रमण के प्रतिशत में कमी आने पर मरीजों में लक्षण कम होने पर उन्हें होम आइसोलेशन में रखा जा रहा। जिले में कोरोना संक्रमित 2624 मरीज मिल चुके हैं। इसमें 2427 मरीज उपचार के दौरान ठीक हुए हैं। अभी सक्रिय मरीजों में 102 को होम आइसोलेशन में रखा गया है। जबकि 62 मरीजों में संक्रमण ज्यादा होने पर उन्हें उपचार के लिए कोविड अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
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इसमें 33 मरीजों की मौत हो चुकी हैं।
बताते चले जिले में मिले 2624 मरीजों में 33 की मौत हो चुकी है। जून और जुलाई माह में जब कोरोना संक्रमित मरीजों की संख्या मिलने लगी तो कोविड अस्पवताल एल-1 पर बोझा बढ गया। इस दौरान चालीस बेड के अस्पताल में पचास मरीजों को रखे जाने लगा। लेकिन जब संख्या और बढ़ी तो प्राइवेट अस्पताल बापू आयुर्वेद कालेज को प्रशासन ने हायर किया। लेकिन प्रति दिन चालीस से पचास मरीजों के मिलने से यह अस्पताल भी जवाब देने लगा। इसी बीच प्रदेश सरकार ने होम आइसोलेशन की सुविधा बहाल कर दिया। इसका परिणाम रहा कि पॉजिटिव मिलने वाले मरीजों में से 70 फीसदी को होम आइसोलेशन में रखे जाने लगे।
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बताते चले कि प्रदेश सरकार की घोषणा के बाद होम आइसोलेशन की सुविधा जिलेमें 24 जुलाई से शुरू हुई थी। इसके बाद ऐसे संक्रमित मरीज जिनके अंदर सामान्य बीमारी के लक्षण है, उन्हें होम आईसोलेशन में रखकर उनका इलाज शुरू किया गया। 19 अक्तूबर 2020 तक मिले 2624 मरीजों में 2427 मरीज रिकवर हो चुके है। जबकि 164 मरीज सक्रिय है, इसमें 102 मरीजों को होम आईसोलेशन में इलाज किया जा रहा है। इस बाबत सीएमओ डॉ. सतीशचंद्र सिंह का कहना है कि होम आइसोलेशन होने से अस्पतालों पर बोझ कम हुआ है, लेकिन स्वास्थ्य विभाग की जिम्मेदारी भी बढ़ी है। बोले कि होम आइसोलेशन की सुविधा उन्हीं जो बिना लक्षण या हल्के लक्षण वाले हैं। जिन मरीजों को सांस लेने में तकलीफ है या और कोई क्रॉनिक बीमारी है तो उन्हें इसकी छूट नहीं है।
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