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सवा लाख राशन कार्ड आधार से लिंक नहीं
Updated Thu, 26 Oct 2017 12:02 AM IST
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मऊ। जनपद के कुल राशन कार्डों में से एक तिहाई अब तक आधार से जोड़े नहीं जा सके हैं। एक लाख 24 हजार 793 राशन कार्ड अब तक आधार से लिंक नहीं किए जा सके हैं। आधार न दे पाने वाले लाभार्थियों को अन्य आईडीप्रूफ लेकर खाद्यान्न देने का विभाग दावा कर रहा है। हालांकि कई लाभार्थियों को इस आधार पर राशन देने से मना कर दिया जा रहा है कि उसके हाथों की अंगुलियों के निशान मैच नहीं कर रहे हैं।
जिले में पात्र गृहस्थी के कुल तीन लाख आठ हजार 913 लाभार्थी हैं। इसमें अन्त्योदय कार्ड धारकों की संख्या 56 हजार 594 है। कुल मिलाकर जिले में तीन लाख 65 हजार 507 राशन कार्ड धारक हैं। इनमें से एक लाख 24 हजार 793 राशन कार्डों को अब तक आधार से लिंक नहीं किया जा सका है। नए आदेश के तहत अब राशन कार्ड धारकों के अंगूठे के निशान का मिलान करके राशन दिया जाना है। लेकिन हालत यह है कि हजारों राशन कार्ड धारकों को सस्ते गल्ले की दुकानों से यह कहकर वापस लौटा दिया जाता है, कि उनकी अंगुलियों के निशान मेल नहीं खा रहे हैं। ऐसे लाभार्थी जिला मुख्यालय पर पहुंचकर शिकायत करते हैं। ऐसे लोगों को जिला पूर्ति अधिकारी कार्यालय से कहा जाता है कि फिर से घर के अन्य सदस्यों की अंगुलियों के छाप का अंकन कराइए और उनके नमूने भी जमा कराइए। यानी घर के अन्य सदस्यों के आधार कार्ड की भी मांग की जाती है। खाद्यान्न से वंचित ऐसे काफी लोग प्रतिदिन जिलापूर्ति अधिकारी कार्यालय पहुंचकर शिकायत करते हैं। लेकिन ऐसी शिकायतों का सिलसिला अनवरत चलता आ रहा है।
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जिले में पात्र गृहस्थी के कुल तीन लाख आठ हजार 913 लाभार्थी हैं। इसमें अन्त्योदय कार्ड धारकों की संख्या 56 हजार 594 है। कुल मिलाकर जिले में तीन लाख 65 हजार 507 राशन कार्ड धारक हैं। इनमें से एक लाख 24 हजार 793 राशन कार्डों को अब तक आधार से लिंक नहीं किया जा सका है। नए आदेश के तहत अब राशन कार्ड धारकों के अंगूठे के निशान का मिलान करके राशन दिया जाना है। लेकिन हालत यह है कि हजारों राशन कार्ड धारकों को सस्ते गल्ले की दुकानों से यह कहकर वापस लौटा दिया जाता है, कि उनकी अंगुलियों के निशान मेल नहीं खा रहे हैं। ऐसे लाभार्थी जिला मुख्यालय पर पहुंचकर शिकायत करते हैं। ऐसे लोगों को जिला पूर्ति अधिकारी कार्यालय से कहा जाता है कि फिर से घर के अन्य सदस्यों की अंगुलियों के छाप का अंकन कराइए और उनके नमूने भी जमा कराइए। यानी घर के अन्य सदस्यों के आधार कार्ड की भी मांग की जाती है। खाद्यान्न से वंचित ऐसे काफी लोग प्रतिदिन जिलापूर्ति अधिकारी कार्यालय पहुंचकर शिकायत करते हैं। लेकिन ऐसी शिकायतों का सिलसिला अनवरत चलता आ रहा है।
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