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शबीहे ताबूत वो अलम का जुलूस निकाला
Updated Sat, 02 Sep 2017 12:36 AM IST
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घोसी। नगर पंचायत के बड़ागांव स्थित नीम तले काजिम हुसैन के आवास से बृहस्पतिवार रात 8 बजे सबीहे ताबूत अलम का जुलूस निकाला गया। परंपरागत रास्तों से होते हुए देर रात यह जुलूस राष्ट्रीय राजमार्ग के रास्ते सदर शिया इमाम बाड़े पर पहुंचकर नौहाख्वानी के बाद समाप्त हुआ।
जिसमें अंजुमन सज्जादिया के तरफ से हाजी ग़जनफर अब्बास,साजिद हुसैन, शमीम हैदर,तफहीम हैदर, इफ़्तेख़ार हुसैन ने नौहा पढ़ा। पैगंबर मोहम्मद साहब के नवासे इमाम हुसैन के द्वारा कूफ़ा में भेजे गए अपने दूत सफिरे जनाब मुस्लिम की शहादत की याद में हर साल निकलने वाला ताबूत और अलम का जुलूस गुरुवार की रात 8 बजे नीम तले से निकला गया। जो मुख़्तार साहब के दरवाजे, बड़ा दरवाजा होते हुए रेल लाइन पार कर सदर इमाम बाड़ा पहुंच कर समाप्त हुआ। इस दौरान तकरीर करते हुए मोलानाओं ने कहा कि कूफ़ा की जनता ने जालिम बादशाह से निजात पाने के लिए इमाम हुसैन को कूफ़ा बुलाने के लिए कई बार निवेदन वाला पत्र भेजा। कूफ़ियों की वफ़ादारी की पुष्टि करने के लिए इमाम हुसैन ने योद्धा मुस्लिम बिन अक़ील को स्थिति का निरीक्षण करने के लिए कूफ़ा भेज दिया। जब बिन अक़ील कूफ़ा पहुंचे तो देखा करीब 30हजार कूफ़ियों ने उन के हाथों पैर बैय्यत के साथ-साथ अपनी वफादरी का सबूत दिया। मस्जिदे कूफ़ा में मुस्लिम बिन अक़ील मग़रिब की नमाज पढ़ाने के लिए खड़े हुए उनके पीछे 30 हजार लोग खड़े हुए। लेकिन ईशा की उस नमाज के खत्म होने तक सिर्फ एक व्यक्ति वहां रह गया था। 9 जिल्हिज्जा सन 60 हिजरी जब मुसलमान ईदुल अजहा का उत्सव मानाने के लिए तैयार हो रहे थे। उसी दिन कर्बला की लड़ाई के पहले शहीद मुस्लिम बिन अक़ील की सहादत हुई उन्हें कूफ़ा में दफन किया गया। हर साल लाखों लोग उनकी क़ब्र की ज्यारत के लिए कूफ़ा जाते हैं।जुलूस में हाजी इक़बाल अहमद, शाहीद हुसैन,गुलाम हैदर,अली हैदर, जफर, अजहर हुसैन, अहमद औन, तनवीर अब्बास, नसीम हैदर, सफात अब्बास, फराग अब्बास,असगर अली, मजहर हुसैन,अलमदार, नूर मोहम्मद,अनीसुल हसन, शहजादे,हिकमत अली, सुहैल अब्बास, जाबिर अली, मासूम रजा,सरकार हुसैन आदि उपस्थित रहे।
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जिसमें अंजुमन सज्जादिया के तरफ से हाजी ग़जनफर अब्बास,साजिद हुसैन, शमीम हैदर,तफहीम हैदर, इफ़्तेख़ार हुसैन ने नौहा पढ़ा। पैगंबर मोहम्मद साहब के नवासे इमाम हुसैन के द्वारा कूफ़ा में भेजे गए अपने दूत सफिरे जनाब मुस्लिम की शहादत की याद में हर साल निकलने वाला ताबूत और अलम का जुलूस गुरुवार की रात 8 बजे नीम तले से निकला गया। जो मुख़्तार साहब के दरवाजे, बड़ा दरवाजा होते हुए रेल लाइन पार कर सदर इमाम बाड़ा पहुंच कर समाप्त हुआ। इस दौरान तकरीर करते हुए मोलानाओं ने कहा कि कूफ़ा की जनता ने जालिम बादशाह से निजात पाने के लिए इमाम हुसैन को कूफ़ा बुलाने के लिए कई बार निवेदन वाला पत्र भेजा। कूफ़ियों की वफ़ादारी की पुष्टि करने के लिए इमाम हुसैन ने योद्धा मुस्लिम बिन अक़ील को स्थिति का निरीक्षण करने के लिए कूफ़ा भेज दिया। जब बिन अक़ील कूफ़ा पहुंचे तो देखा करीब 30हजार कूफ़ियों ने उन के हाथों पैर बैय्यत के साथ-साथ अपनी वफादरी का सबूत दिया। मस्जिदे कूफ़ा में मुस्लिम बिन अक़ील मग़रिब की नमाज पढ़ाने के लिए खड़े हुए उनके पीछे 30 हजार लोग खड़े हुए। लेकिन ईशा की उस नमाज के खत्म होने तक सिर्फ एक व्यक्ति वहां रह गया था। 9 जिल्हिज्जा सन 60 हिजरी जब मुसलमान ईदुल अजहा का उत्सव मानाने के लिए तैयार हो रहे थे। उसी दिन कर्बला की लड़ाई के पहले शहीद मुस्लिम बिन अक़ील की सहादत हुई उन्हें कूफ़ा में दफन किया गया। हर साल लाखों लोग उनकी क़ब्र की ज्यारत के लिए कूफ़ा जाते हैं।जुलूस में हाजी इक़बाल अहमद, शाहीद हुसैन,गुलाम हैदर,अली हैदर, जफर, अजहर हुसैन, अहमद औन, तनवीर अब्बास, नसीम हैदर, सफात अब्बास, फराग अब्बास,असगर अली, मजहर हुसैन,अलमदार, नूर मोहम्मद,अनीसुल हसन, शहजादे,हिकमत अली, सुहैल अब्बास, जाबिर अली, मासूम रजा,सरकार हुसैन आदि उपस्थित रहे।
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