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वृंदावन: अपनों से दूर, कान्हा के आंगन में मनाई दिवाली; विधवा माताओं ने जलाए दिवाली पर दीप
Fri, 06 Nov 2026 09:02 PM IST
Arun Parashar
संवाद न्यूज एजेंसी, मथुरा
संवाद न्यूज एजेंसी, मथुरा
Published by: Arun Parashar
Updated Fri, 06 Nov 2026 09:02 PM IST
सार
विभिन्न आश्रय सदनों में रह रही विधवा माताएं 500 वर्ष पुराने गोपीनाथ मंदिर में एकत्र हुईं। रंग-बिरंगे दीये जलाए और उल्लास के साथ दिवाली मनाई।
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विधवा माताओं ने दिवाली पर जलाए दीप।
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
विस्तार
पश्चिम बंगाल सहित विभिन्न राज्यों से आकर वृंदावनवास कर रही विधवा एवं वृद्ध महिलाओं ने शुक्रवार को प्राचीन गोपीनाथ मंदिर में दिवाली मनाई। उन्होंने हरिनाम संकीर्तन के मध्य ठाकुर श्रीराधागोपीनाथ के आंगन में दीप जलाए। यह कार्यक्रम सुलभ इंटरनेशनल द्वारा आयोजित किया गया।
सुलभ इंटरनेशनल की कार्यकारी संयोजक नित्या पाठक ने कहा कि देश में पीढ़ियों से विधवाओं को त्योहारों व शुभ अवसरों से दूर रखा जाता था। ऐसे आयोजन इस सामाजिक कलंक को तोड़ने और सांस्कृतिक जीवन में उनकी भागीदारी सुनिश्चित करने का प्रयास हैं। विभिन्न राज्यों की सैकड़ों महिलाएं दशकों से वृंदावनवास कर रही हैं। अपने घर और अपनों से दूर रह रही महिलाओं के साथ दिवाली के अवसर पर दीपदान किया गया।
गोपीनाथ मंदिर में यह उत्सव न केवल रोशनी का त्योहार है, बल्कि इन महिलाओं के लिए आशा, गरिमा और समावेश के प्रतीकात्मक प्रकाश का भी प्रतीक है। विभिन्न आश्रय सदनों में रह रही विधवा माताएं 500 वर्ष पुराने गोपीनाथ मंदिर में एकत्र हुईं, रंग-बिरंगे दीये जलाए और उल्लास के साथ दिवाली मनाई। एक विधवा महिला छवि दासी ने कहा कि क्रांतिकारी पहलों की श्रृंखला से प्रेरित होकर, विधवा माताएं अब खुश हैं। भगवान कृष्ण की नगरी में अपने प्रवास का आनंद ले रही हैं। सुलभ इंटरनेशनल 2012 से वृंदावन और वाराणसी के विभिन्न आश्रमों में रहने वाली सैकड़ों माताओं की देखभाल कर रहा है। सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के आलोक में सुलभ विभिन्न आश्रमों में रहने वाली विधवा महिलाओं की देखभाल करता है।
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सुलभ इंटरनेशनल की कार्यकारी संयोजक नित्या पाठक ने कहा कि देश में पीढ़ियों से विधवाओं को त्योहारों व शुभ अवसरों से दूर रखा जाता था। ऐसे आयोजन इस सामाजिक कलंक को तोड़ने और सांस्कृतिक जीवन में उनकी भागीदारी सुनिश्चित करने का प्रयास हैं। विभिन्न राज्यों की सैकड़ों महिलाएं दशकों से वृंदावनवास कर रही हैं। अपने घर और अपनों से दूर रह रही महिलाओं के साथ दिवाली के अवसर पर दीपदान किया गया।
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गोपीनाथ मंदिर में यह उत्सव न केवल रोशनी का त्योहार है, बल्कि इन महिलाओं के लिए आशा, गरिमा और समावेश के प्रतीकात्मक प्रकाश का भी प्रतीक है। विभिन्न आश्रय सदनों में रह रही विधवा माताएं 500 वर्ष पुराने गोपीनाथ मंदिर में एकत्र हुईं, रंग-बिरंगे दीये जलाए और उल्लास के साथ दिवाली मनाई। एक विधवा महिला छवि दासी ने कहा कि क्रांतिकारी पहलों की श्रृंखला से प्रेरित होकर, विधवा माताएं अब खुश हैं। भगवान कृष्ण की नगरी में अपने प्रवास का आनंद ले रही हैं। सुलभ इंटरनेशनल 2012 से वृंदावन और वाराणसी के विभिन्न आश्रमों में रहने वाली सैकड़ों माताओं की देखभाल कर रहा है। सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के आलोक में सुलभ विभिन्न आश्रमों में रहने वाली विधवा महिलाओं की देखभाल करता है।
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