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दूसरों को भी स्वदेशी अपनाने के लिए प्रेरित करें स्वयंसेवक : मोहन भागवत
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मथुरा। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख डॉ. मोहन भागवत ने अपने तीन दिवसीय प्रवास के अंतिम दिन फिर पंच परिवर्तन के साथ-साथ नागरिक कर्तव्यों जोर दिया। साथ ही उन्होंने कहा कि नागरिक कर्तव्यों का पालन स्वयंसेवक खुद ही करें और दूसरों को भी इसके लिए जागरूक करें। संघ प्रमुख ने स्वदेशी पर भी चर्चा की और कहा कि स्वदेशी अधिक से अधिक अपनाएं। समाज में जाकर दूसरों को भी स्वदेशी अपनाने के लिए प्रेरित करें।
फरह के गांव परखम स्थित पं. दीनदयाल गो-विज्ञान अनुसंधान एवं प्रशिक्षण केंद्र में चल रहे पश्चिम उत्तर प्रदेश कार्यकर्ता विकास वर्ग-प्रथम में बुधवार को पहुंचे संघ प्रमुख शनिवार को अपने प्रवास के अंतिम दिन सुबह संघ स्थल पर शाखा में शामिल हुए। इसके बाद सुबह 10.50 बजे उन्होंने संवाद सत्र में भाग लिया। इस दौरान उन्होंने स्वयंसेवकों से शताब्दी वर्ष पर जोर देकर कहा कि विजयादशमी पर शताब्दी वर्ष के कार्यक्रम होंगे। इसका प्रारंभ विजयादशमी से पूर्ण गणवेश में होगा।
संघ प्रमुख ने स्वयंसेवकों से कहा कि हमें शताब्दी वर्ष के लिए जो भी दायित्व मिले हैं, उनका पूरी तरह निर्वहन करें। इसके लिए उन्होंने संघ की शाखाओं को विस्तार करने पर जोर दिया और मजबूत करने को कहा। इसके अलावा करीब तीन बजे से उन्होंने स्वयंसेवकों के साथ प्रश्नोत्तरी सत्र में हिस्सा लिया। स्वयंसेवकों ने यहां कई तरह के सवाल कर अपनी जिज्ञासा शांत की। कुछ स्वयंसेवकों ने शाखाओं को मजबूत करने का तरीका पूछा। एक स्वयंसेवक ने शताब्दी वर्ष में किस तरह से कार्य करना है, यह सवाल किया। जबकि पंच परिवर्तन को किस तरीके से समाज में ले जाएं, इस पर भी स्वयंसेवकों ने सवाल किए।
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18 को होगा दीक्षांत समारोह
प्रश्नोत्तरी सत्र में करीब 20 स्वयंसेवकों ने संघ प्रमुख से सवाल किए और उन्होंने विस्तार से सवालों के जवाब दिया। इसके बाद शाम 4:45 बजे संघ प्रमुख यहां से रवाना हो गए। इसके अलावा 17 जून को शिविर का समापन समारोह होगा। इस दौरान प्रशिक्षु पूर्ण गणवेश में योगाभ्यास व संघ की पद्धति का अभ्यास करेंगे। इसके बाद शाम को प्रेस वार्ता होगी। 18 जून को दीक्षांत समारोह का आयोजन होगा। इसमें प्रशिक्षुओं को विदाई दी जाएगी।
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फरह के गांव परखम स्थित पं. दीनदयाल गो-विज्ञान अनुसंधान एवं प्रशिक्षण केंद्र में चल रहे पश्चिम उत्तर प्रदेश कार्यकर्ता विकास वर्ग-प्रथम में बुधवार को पहुंचे संघ प्रमुख शनिवार को अपने प्रवास के अंतिम दिन सुबह संघ स्थल पर शाखा में शामिल हुए। इसके बाद सुबह 10.50 बजे उन्होंने संवाद सत्र में भाग लिया। इस दौरान उन्होंने स्वयंसेवकों से शताब्दी वर्ष पर जोर देकर कहा कि विजयादशमी पर शताब्दी वर्ष के कार्यक्रम होंगे। इसका प्रारंभ विजयादशमी से पूर्ण गणवेश में होगा।
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संघ प्रमुख ने स्वयंसेवकों से कहा कि हमें शताब्दी वर्ष के लिए जो भी दायित्व मिले हैं, उनका पूरी तरह निर्वहन करें। इसके लिए उन्होंने संघ की शाखाओं को विस्तार करने पर जोर दिया और मजबूत करने को कहा। इसके अलावा करीब तीन बजे से उन्होंने स्वयंसेवकों के साथ प्रश्नोत्तरी सत्र में हिस्सा लिया। स्वयंसेवकों ने यहां कई तरह के सवाल कर अपनी जिज्ञासा शांत की। कुछ स्वयंसेवकों ने शाखाओं को मजबूत करने का तरीका पूछा। एक स्वयंसेवक ने शताब्दी वर्ष में किस तरह से कार्य करना है, यह सवाल किया। जबकि पंच परिवर्तन को किस तरीके से समाज में ले जाएं, इस पर भी स्वयंसेवकों ने सवाल किए।
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18 को होगा दीक्षांत समारोह
प्रश्नोत्तरी सत्र में करीब 20 स्वयंसेवकों ने संघ प्रमुख से सवाल किए और उन्होंने विस्तार से सवालों के जवाब दिया। इसके बाद शाम 4:45 बजे संघ प्रमुख यहां से रवाना हो गए। इसके अलावा 17 जून को शिविर का समापन समारोह होगा। इस दौरान प्रशिक्षु पूर्ण गणवेश में योगाभ्यास व संघ की पद्धति का अभ्यास करेंगे। इसके बाद शाम को प्रेस वार्ता होगी। 18 जून को दीक्षांत समारोह का आयोजन होगा। इसमें प्रशिक्षुओं को विदाई दी जाएगी।