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UP: आगरा में जीएम जलकल निलंबित, फाइलों की हेराफेरी और भ्रष्टाचार का आरोप; नगरायुक्त की रिपोर्ट के बाद कार्रवाई
Thu, 23 Apr 2026 11:07 PM IST
Arun Parashar
संवाद न्यूज एजेंसी, आगरा
संवाद न्यूज एजेंसी, आगरा
Published by: Arun Parashar
Updated Thu, 23 Apr 2026 11:07 PM IST
सार
आगरा के जलकल विभाग में शासनस्तर से बड़ी कार्रवाई की गई। शासन ने जीएम जलकल अरुणेन्द्र कुमार राजपूत को निलंबित कर दिया है। उन पर भ्रष्टाचार के आरोपों के बाद कार्रवाई की गई है।
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जलकल महाप्रबंधक अरुणेन्द्र कुमार राजपूत।
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
विस्तार
अवैध नियुक्तियां, कार्यों में भ्रष्टाचार और फाइलों की हेराफेरी के आरोप में बृहस्पतिवार को शासन ने जलकल महाप्रबंधक अरुणेन्द्र कुमार राजपूत को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। निलंबन अवधि में एके राजपूत स्थानीय निकाय निदेशालय, लखनऊ कार्यालय से संबद्ध रहेंगे।
प्रमुख सचिव द्वारा जलकल महाप्रबंधक को निलंबित किए जाने के आदेश के बाद विभाग में खलबली मच गई है। अरुणेन्द्र कुमार के खिलाफ कार्रवाई की पटकथा लंबे समय से लिखी जा रही थी। रिपोर्ट के अनुसार सितम्बर 2024 तक जलकर वसूली का लक्ष्य पूरा नहीं किया गया। 18 मार्च 2025 को जनता की समस्याओं के समाधान के लिए आयोजित सम्भव जनसुनवाई कार्यक्रम से वह अनुपस्थित रहे। भीषण गर्मी के दौरान पिछले साल मई 2025 में पेयजल आपूर्ति सुचारू रखने में भी वह नाकाम रहे।
अगस्त 2025 तक की कर वसूली पिछले वर्ष की तुलना में भी कम रही, जिसके लिए उन्हें कारण बताओ नोटिस भी दिया गया था, लेकिन उनकी कार्यप्रणाली में कोई सुधार नहीं हुआ। जिसके बाद इन आरोपों के साथ 19 अप्रैल को नगरायुक्त अंकित खंडेलवाल ने महाप्रबंधक के विरुद्ध कार्रवाई की सिफारिश निदेशक को भेजी थी।
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प्रमुख सचिव द्वारा जलकल महाप्रबंधक को निलंबित किए जाने के आदेश के बाद विभाग में खलबली मच गई है। अरुणेन्द्र कुमार के खिलाफ कार्रवाई की पटकथा लंबे समय से लिखी जा रही थी। रिपोर्ट के अनुसार सितम्बर 2024 तक जलकर वसूली का लक्ष्य पूरा नहीं किया गया। 18 मार्च 2025 को जनता की समस्याओं के समाधान के लिए आयोजित सम्भव जनसुनवाई कार्यक्रम से वह अनुपस्थित रहे। भीषण गर्मी के दौरान पिछले साल मई 2025 में पेयजल आपूर्ति सुचारू रखने में भी वह नाकाम रहे।
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अगस्त 2025 तक की कर वसूली पिछले वर्ष की तुलना में भी कम रही, जिसके लिए उन्हें कारण बताओ नोटिस भी दिया गया था, लेकिन उनकी कार्यप्रणाली में कोई सुधार नहीं हुआ। जिसके बाद इन आरोपों के साथ 19 अप्रैल को नगरायुक्त अंकित खंडेलवाल ने महाप्रबंधक के विरुद्ध कार्रवाई की सिफारिश निदेशक को भेजी थी।
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निलंबन आदेश में राजपूत पर फाइलों को जानबूझकर छिपाने और उनमें हेर-फेर करने की आशंका जताई गई है। ताजगंज जोन के चमरौली क्षेत्र में पाइप लाइन बिछाने के नाम पर 5-5 लाख की पांच फाइलों से कार्य कराए थे। जांच समिति के इन फाइलों को बार-बार मांगे जाने के बावजूद प्रस्तुत नहीं किया।
अवैध नियुक्तियों का मामला बना गले की फांस
जलकल विभाग में सुमित पचौरी की मृतक आश्रित के रूप में नियम विरुद्ध नियुक्ति और रजनीश शर्मा, चरनजीत व ललित दक्ष जैसे लिपिकों को बिना टाइपिंग परीक्षा पास किए गुपचुप तरीके से दी गई पदोन्नति की फाइलों को दबाना महाप्रबंधक के गले की फांस बन गया। इसके अलावा सेवानिवृत्त सहायक अभियंता राजकुमार शर्मा के बकाया वेतन और पेंशन से जुड़ी इलाहाबाद उच्च न्यायालय में लंबित रिट याचिका में भी राजपूत की लापरवाही सामने आई। न्यायालय के आदेश के क्रम में 15 दिसंबर 2025 तक प्रत्यावेदन का निस्तारण होना था, लेकिन संबंधित अभिलेख उपलब्ध न कराने के कारण मामला लटक गया, जिससे शासन के खिलाफ प्रतिकूल आदेश पारित होने की स्थिति बन गई है।
निदेशक स्थानीय निकाय करेंगे आगे की जांच
निलंबन अवधि में एके राजपूत स्थानीय निकाय निदेशालय, लखनऊ के कार्यालय से संबद्ध रहेंगे। शासन ने निदेशक, स्थानीय निकाय निदेशालय को जांच अधिकारी नामित किया गया है। नगर आयुक्त आगरा को निर्देशित किया गया है कि वह एक सप्ताह के भीतर साक्ष्यों सहित आरोप पत्र गठित कर शासन को भेजें।
अवैध नियुक्तियों का मामला बना गले की फांस
जलकल विभाग में सुमित पचौरी की मृतक आश्रित के रूप में नियम विरुद्ध नियुक्ति और रजनीश शर्मा, चरनजीत व ललित दक्ष जैसे लिपिकों को बिना टाइपिंग परीक्षा पास किए गुपचुप तरीके से दी गई पदोन्नति की फाइलों को दबाना महाप्रबंधक के गले की फांस बन गया। इसके अलावा सेवानिवृत्त सहायक अभियंता राजकुमार शर्मा के बकाया वेतन और पेंशन से जुड़ी इलाहाबाद उच्च न्यायालय में लंबित रिट याचिका में भी राजपूत की लापरवाही सामने आई। न्यायालय के आदेश के क्रम में 15 दिसंबर 2025 तक प्रत्यावेदन का निस्तारण होना था, लेकिन संबंधित अभिलेख उपलब्ध न कराने के कारण मामला लटक गया, जिससे शासन के खिलाफ प्रतिकूल आदेश पारित होने की स्थिति बन गई है।
निदेशक स्थानीय निकाय करेंगे आगे की जांच
निलंबन अवधि में एके राजपूत स्थानीय निकाय निदेशालय, लखनऊ के कार्यालय से संबद्ध रहेंगे। शासन ने निदेशक, स्थानीय निकाय निदेशालय को जांच अधिकारी नामित किया गया है। नगर आयुक्त आगरा को निर्देशित किया गया है कि वह एक सप्ताह के भीतर साक्ष्यों सहित आरोप पत्र गठित कर शासन को भेजें।