{"_id":"69260b41cf2efbd4cc0441e5","slug":"under-whose-patronage-did-the-rs-16-lakh-scam-take-place-in-vrindavan-mathura-news-c-161-1-mt11010-100621-2025-11-26","type":"story","status":"publish","title_hn":"Mathura News: वृंदावन में किसकी सरपरस्ती में हो गया 16 लाख रुपये का खेल","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Mathura News: वृंदावन में किसकी सरपरस्ती में हो गया 16 लाख रुपये का खेल
विज्ञापन
वृंदावन। वृंदावन में पुलिस प्रशासन की इतनी सक्रियता के बाद भी ई-रिक्शा चालकों से लाखों रुपये लेने के बाद कंपनी अपने कार्यालय को बंद कर रफूचक्कर हो गई। रुट निर्धारण के लिए बार कोड किस अधिकारी के लिखित आदेश पर बांटे गए, इसका जवाब किसी के पास नहीं है। कंपनी ने करीब 1400 से अधिक ई रिक्शाओं के रजिस्ट्रेशन किए और बार कोड लगाए, जिसके बदले में प्रत्येक से 1180 रुपये लिए। इस हिसाब से करीब 16,52,000 रुपये ई रिक्शा चालकों से लिए गए। रुपया लेने के बाद कंपनी वृंदावन से अपना कार्यालय बंद कर चली गई है। सवाल उठ रहा है आखिर किसकी सरपरस्ती में बाहर की कंपनी ने यहां आकर ऐसा खेल किया।
वृंदावन में ई–रिक्शा संचालन के लिए पीएसए डिजिटल कंपनी रुट निर्धारित कर रही थी। ई रिक्शाओं पर बार कोड लगाने के लिए 1180 रुपये लिए गए। ई-रिक्शा संचालन समिति के संरक्षक ताराचंद गोस्वामी कंपनी का सहयोग कर रहे थे। कंपनी ने करीब 1400 ई रिक्शाओं को बारकोड दिए। कुछ दिन तो कोड के हिसाब से चालक लगे लेकिन कुछ दिन के बाद ढर्रा बदल गया। जिससे हालात जस के तस हो गए। सही रुट पर जाने के भी पुलिस चेकिंग में उनके ई-रिक्शाओं को सीज कर रही थी। किसी न किसी कमी पर उनका चालान किया जाने लगा तो चालकों को ठगी का शिकार होना पता लगा।
उन्होंने कंपनी के ऑफिस पर जाना शुरू किया और शिकायत दर्ज कराई तो वहां मौजूद लोगों ने कहना शुरू कर दिया कि अब कंपनी काम नहीं देख रही। जब दर्जनों ई रिक्शा चालक पहुंचने लगे तो कंपनी वहां से कार्यालय बंद करके की चली गई। जिन फोन नंबर को ई रिक्शा चालकों को दिया गया था,वह नंबर कभी बंद आते हैं तो कभी कोई उन्हें उठाता नहीं है। रिक्शा चालक सोनू ने बताया कि उसने और उसके दोस्त मोहन ने दोनों का रुट लिया था लेकिन उनको ई रिक्शा संचालन में काफी दिक्कत आई इसलिए उन्होंने ऑफिस पर पिछले दिनों संपर्क किया तो जानकारी मिली है कंपनी से यहां से कार्यालय बंद कर भाग गई है।
विज्ञापन
आदेश के नाम पर चुप्पी साधी
पीएसए कंपनी के संचालक मनीष आहूजा से संपर्क किया तो उसने बताया कि हमने तो रुट बांट दिए थे। अब जिम्मेदारी तो पुलिस की है। उनसे जब से पूछा कि कार्यालय बंद करने की सूचना पुलिस या प्रशासन के अधिकारी को दी तो उन्होंने इंकार कर दिया। रुट बांटने के आदेश को लेकर जानकारी की गई तो उन्होंने कहा ई रिक्शा संचालन समिति को अधिकारियों ने आदेश दिए थे।
शुभारंभ में लगा दिया था डीएम, एसएसपी का बैनर
पीएसए कंपनी के कार्यालय के शुभारंभ के मौके पर कंपनी की ओर से डीएम और एसएसपी को मुख्य अतिथि बनाकर बैनर लगाए थे लेकिन शुभारंभ में कोई अधिकारी नहीं पहुंचा था। उस दौरान लोगों से कहा था कि एक मीटिंग होने के कारण अधिकारी नहीं आ पाए हैं।
हमें ई रिक्शा संचालन समिति के पदाधिकारियों ने काम नहीं करने दिया। इसलिए हम चले गए। प्रशासन जब भी सहयोग करने की कहता है तो हम कर देते हैं।
मनीष आहूजा
कंपनी ने वृंदावन में बड़ा धोखा किया गया है। वह केवल रुपया लेकर चली गई लेकिन व्यवस्था नहीं बना पाई।
ताराचंद गोस्वामी , समिति संरक्षक
इस मामले की जांच कराई जाएगी। किस के आदेश रुट बांटे गए और अब कंपनी अचानक कैसे चली गई, इस बात की जानकारी की जाएगी। जांच में गलत पाए जाने पर कार्रवाई की जाएगी।
श्लोक कुमार, एसएसपी
विज्ञापन
वृंदावन में ई–रिक्शा संचालन के लिए पीएसए डिजिटल कंपनी रुट निर्धारित कर रही थी। ई रिक्शाओं पर बार कोड लगाने के लिए 1180 रुपये लिए गए। ई-रिक्शा संचालन समिति के संरक्षक ताराचंद गोस्वामी कंपनी का सहयोग कर रहे थे। कंपनी ने करीब 1400 ई रिक्शाओं को बारकोड दिए। कुछ दिन तो कोड के हिसाब से चालक लगे लेकिन कुछ दिन के बाद ढर्रा बदल गया। जिससे हालात जस के तस हो गए। सही रुट पर जाने के भी पुलिस चेकिंग में उनके ई-रिक्शाओं को सीज कर रही थी। किसी न किसी कमी पर उनका चालान किया जाने लगा तो चालकों को ठगी का शिकार होना पता लगा।
विज्ञापन
उन्होंने कंपनी के ऑफिस पर जाना शुरू किया और शिकायत दर्ज कराई तो वहां मौजूद लोगों ने कहना शुरू कर दिया कि अब कंपनी काम नहीं देख रही। जब दर्जनों ई रिक्शा चालक पहुंचने लगे तो कंपनी वहां से कार्यालय बंद करके की चली गई। जिन फोन नंबर को ई रिक्शा चालकों को दिया गया था,वह नंबर कभी बंद आते हैं तो कभी कोई उन्हें उठाता नहीं है। रिक्शा चालक सोनू ने बताया कि उसने और उसके दोस्त मोहन ने दोनों का रुट लिया था लेकिन उनको ई रिक्शा संचालन में काफी दिक्कत आई इसलिए उन्होंने ऑफिस पर पिछले दिनों संपर्क किया तो जानकारी मिली है कंपनी से यहां से कार्यालय बंद कर भाग गई है।
विज्ञापन
आदेश के नाम पर चुप्पी साधी
पीएसए कंपनी के संचालक मनीष आहूजा से संपर्क किया तो उसने बताया कि हमने तो रुट बांट दिए थे। अब जिम्मेदारी तो पुलिस की है। उनसे जब से पूछा कि कार्यालय बंद करने की सूचना पुलिस या प्रशासन के अधिकारी को दी तो उन्होंने इंकार कर दिया। रुट बांटने के आदेश को लेकर जानकारी की गई तो उन्होंने कहा ई रिक्शा संचालन समिति को अधिकारियों ने आदेश दिए थे।
शुभारंभ में लगा दिया था डीएम, एसएसपी का बैनर
पीएसए कंपनी के कार्यालय के शुभारंभ के मौके पर कंपनी की ओर से डीएम और एसएसपी को मुख्य अतिथि बनाकर बैनर लगाए थे लेकिन शुभारंभ में कोई अधिकारी नहीं पहुंचा था। उस दौरान लोगों से कहा था कि एक मीटिंग होने के कारण अधिकारी नहीं आ पाए हैं।
हमें ई रिक्शा संचालन समिति के पदाधिकारियों ने काम नहीं करने दिया। इसलिए हम चले गए। प्रशासन जब भी सहयोग करने की कहता है तो हम कर देते हैं।
मनीष आहूजा
कंपनी ने वृंदावन में बड़ा धोखा किया गया है। वह केवल रुपया लेकर चली गई लेकिन व्यवस्था नहीं बना पाई।
ताराचंद गोस्वामी , समिति संरक्षक
इस मामले की जांच कराई जाएगी। किस के आदेश रुट बांटे गए और अब कंपनी अचानक कैसे चली गई, इस बात की जानकारी की जाएगी। जांच में गलत पाए जाने पर कार्रवाई की जाएगी।
श्लोक कुमार, एसएसपी