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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Mathura News ›   Two rooms of the 435-year-old Govind Dev Temple were opened after 25 years

Mathura News: 435 साल पुराने गोविंद देव मंदिर के दो कमरे 25 साल बाद खोले

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Fri, 05 Dec 2025 01:01 AM IST
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Two rooms of the 435-year-old Govind Dev Temple were opened after 25 years
गोंविंद देव मंदिर में पत्थर के ऊपर तराशी नक्काशी।
मनमोहन पारीक
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वृंदावन। नगर के प्राचीन सप्त देवालयों में से एक 435 साल पुराने गोविंद देव मंदिर के गर्भगृह के ऊपर का बना कमरा सहित दो कमरे 25 साल के बाद खोले गए। लाल बलुआ पत्थर की तंग एवं अंधकारमय सीढ़ियों को चढ़कर कमरे में जाने के लिए दो दरवाजों में लगे पुराने तालों तोड़ने के बाद कमरों तक पहुंचा गया। कमरे में पत्थर के टुकड़े मिले। दूसरा 30 फीट व्यास की विशाल चक्की के आकार का कमरा खोला गया। विशेष कक्ष को लेकर लोगों में चर्चाएं थी कि गर्भगृह के ऊपर कक्ष में सांपों का जोड़ा रहता है। कक्ष खुलने के बाद यह भ्रांतियां दूर हुईं।
प्राचीन गोविंद देव मंदिर के सेवायत सुकुमार गोस्वामी ने मंदिर के गर्भगृह के ऊपर 25 साल से बंद विशाल कक्ष को खोलने और उसकी सफाई कराने का एएसआई से आग्रह किया था। इस पर एएसआई के वरिष्ठ संरक्षक सहायक नितिन प्रिय राहुल की मौजूदगी में कर्मचारियों ने कमरा खोला। लाल बलुआ पत्थर से बने विशाल मंदिर के गर्भगृह के ठीक ऊपर बने कमरे में जाने के लिए दाएं और बाएं तरफ से संकरी पत्थर की सीढ़ियां बनी हैं। उन सीढ़ियों में प्रकाश व्यवस्था न होने के कारण घना अंधकार बना रहता है। एएसआई टीम दाई ओर बनी सीढ़ियों से चढ़कर गर्भगृह के ऊपर लोहे के गेट में लगे ताले को तोड़ा। इसके बाद फिर करीब 32 सीढ़ियां चढ़ने के बाद एक लोहे के सीखचों से बने गेट में लगा पुराना ताला तोड़ा गया। गुंबदाकार विशेष कमरा चूना से बना है। इसमें दो बड़े रोशनदान हैं। इनमें से कमरे में रोशनी आती है। कमरे के तीन तरफ विशाल आले बने हैं। कमरे के एक तरफ नीचे कुछ पत्थर के टुकड़े रखे थे। कमरे में धूल पाई गई। इस कमरे से सटा एक और कमरा खोला गया, जो कि लगभग 30 फीट व्यास का चक्की आकार में बना था। अनुमान लगाया जा रहा है कि यहां पहले कभी बड़ी चक्की हो सकती है। एएसआई द्वारा दोनों कमरों की सफाई कराई कार्य कराया जा रहा है।
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ठाकुर गोविंद देव मंदिर के सेवायत सुकुमार गोस्वामी ने बताया कि विशेष कमरे में कभी ठाकुरजी का शयन कक्ष रहा होगा। गर्भगृह के ऊपर बने होने के कारण यह कमरा किसी अन्य उपयोग में नहीं आ सकता। वरिष्ठ संरक्षक सहायक नितिन प्रिय राहुल ने बताया कि प्राचीन गोविंद देव मंदिर के दो कमरों को सफाई के लिए खोला गया। लंबे समय से बंद होने के कारण लोगों में यह भ्रांतियां थी कि इन कमरों में सांपों का जोड़ा रहता है। सफाई हो जाने से यह भ्रांतियां भी दूर हो गई। सफाई के बाद इन कमरों को फिर से बंद कर दिया जाएगा। संवाद
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आमेर के राजा ने बनवाया मंदिर का निर्माण
मंदिर के शिला लेख से पता चला कि मुगल शासक अकबर के राज्यकाल के 34वें वर्ष सन 1590 ईसवी में आमेर के राजा मानसिंह ने योग पीठ स्थान पर गोविंद देवजी का भव्य मंदिर बनवाया। औरंगजेब के शासन काल में बृज पर हुए हमले के समय मंदिर को क्षति पहुंची। गोविंदजी को उनके भक्त जयपुर ले गए। तब से गोविंद जी जयपुर के राजकीय महल मंदिर में विराजमान हैं।
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