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Mathura News: रेलवे स्टेशन पर खड़ीं दो रेन गन हो रहीं कबाड़
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कोसीकलां। रेलवे स्टेशन परिसर में प्रदूषण और धूल पर नियंत्रण के लिए मंगाईं गईं दो रेन गन उपयोग के अभाव में कबाड़ में तब्दील होती जा रही हैं। लाखों रुपये की लागत से मंगाई यह आधुनिक रेल गन काफी समय से बंद खड़ी हैं।
रेलवे स्टेशन के माल गोदाम क्षेत्र में माल की लोडिंग और अनलोडिंग होती है। इस दौरान सीमेंट, गिट्टी, खाद, अनाज तथा अन्य सामान की ढुलाई से भारी मात्रा में धूल उड़ती है, जिससे स्टेशन परिसर के साथ आसपास के क्षेत्र में प्रदूषण बढ़ जाता है। धूल के कण यात्रियों, रेल कर्मचारियों के लिए परेशानी का कारण बनते हैं। इन्हीं समस्याओं को देखते हुए रेलवे प्रशासन द्वारा रेन गन की व्यवस्था की गई थी, ताकि पानी की फुहारों के माध्यम से उड़ने वाली धूल को नियंत्रित किया जा सके।
दैनिक यात्री दीपक अग्रवाल का कहना था कि यदि रेन गन का नियमित संचालन किया जाए तो स्टेशन परिसर और माल गोदाम क्षेत्र में प्रदूषण का स्तर काफी हद तक कम किया जा सकता है। देखरेख और संचालन के अभाव में यह रेल गन बेकार साबित हो रही हैं। स्टेशन अधीक्षक राजूलाल मीणा ने बताया कि माल गोदाम पर आने वाले सामान से उड़ने वाली धूल को रोकने के लिए रेन गन का उपयोग किया जाता है।
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रेलवे स्टेशन के माल गोदाम क्षेत्र में माल की लोडिंग और अनलोडिंग होती है। इस दौरान सीमेंट, गिट्टी, खाद, अनाज तथा अन्य सामान की ढुलाई से भारी मात्रा में धूल उड़ती है, जिससे स्टेशन परिसर के साथ आसपास के क्षेत्र में प्रदूषण बढ़ जाता है। धूल के कण यात्रियों, रेल कर्मचारियों के लिए परेशानी का कारण बनते हैं। इन्हीं समस्याओं को देखते हुए रेलवे प्रशासन द्वारा रेन गन की व्यवस्था की गई थी, ताकि पानी की फुहारों के माध्यम से उड़ने वाली धूल को नियंत्रित किया जा सके।
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दैनिक यात्री दीपक अग्रवाल का कहना था कि यदि रेन गन का नियमित संचालन किया जाए तो स्टेशन परिसर और माल गोदाम क्षेत्र में प्रदूषण का स्तर काफी हद तक कम किया जा सकता है। देखरेख और संचालन के अभाव में यह रेल गन बेकार साबित हो रही हैं। स्टेशन अधीक्षक राजूलाल मीणा ने बताया कि माल गोदाम पर आने वाले सामान से उड़ने वाली धूल को रोकने के लिए रेन गन का उपयोग किया जाता है।
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