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एक किसान ट्रेन के आगे कूदा, दूसरे ने लगाई फांसी
ब्यूरो, अमर उजाला मथुरा
Updated Tue, 21 Apr 2015 11:54 PM IST
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ओलावृष्टि और पकी फसल पर बरसात से हुई बर्बादी के बाद सरकारी आश्वासनों से भी किसान राहत महसूस नहीं कर रहे हैं। यही कारण है कि वे आत्महत्या जैसा कदम उठा रहे हैं। मंगलवार को जिले में दो किसानों ने आत्महत्या कर ली। एक किसान ने मगोर्रा थाना क्षेत्र में खेत पर खड़े पेड़ से लटक कर फांसी लगा ली, तो दूसरे ने फरह क्षेत्र में रात के समय ट्रेन के आगे छलांग लगाकर आत्महत्या कर ली।
थाना रिफाइनरी के गांव समसपुर निवासी किसान ब्रिजेंद्र सिंह (55) पुत्र करन सिंह ने थाना मगोर्रा क्षेत्र के गांव कोसीखुर्द में छह बीघा जमीन 1,20,000 रुपये में किराए पर ली थी। इसके अलावा उनके पास गांव में अपनी आठ बीघा जमीन भी थी। प्रकृति की मार से पूरी फसल बर्बाद हो जाने से ब्रिजेंद्र सिंह खासे परेशान थे। जो कुछ फसल खेत में बची थी उसे काटने के लिए मजदूर नहीं मिले तो सोमवार को वह कंबाइन मशीन आपरेटर को लेकर खेत पर गए। उसने गेहूं की बाली मीढ़कर बताया कि इसमें दाना नहीं है। यह जानकार उनकी चिंता और बढ़ गई।
ऑपरेटर चला गया और ब्रिजेंद्र सिंह खेत पर ही रहे। रात में उन्होेंने खेत पर रस्सी के सहारे पेड़ से लटक कर आत्महत्या कर ली। सुबह परिवारीजनों को इसकी जानकारी हो सकी। मगोर्रा पुलिस ने शव पोस्टमार्टम के लिए भिजवाया। मृतक के पुत्र अमित ने बताया कि वे बहन की शादी करने के बाद दोनों भाइयों के लिए रोजगार का इंतजाम कराने की कहते थे, लेकिन फसल बर्बाद होने से कर्जा और बढ़ गया।
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दूसरा मामला थाना फरह क्षेत्र का है। गांव पौरी शहजादपुर निवासी राजवीर के पास दो बीघा खेत था। उन्होंने गांव के जमींदारों से 10 बीघा खेती 15 मन गेहूं और 15 मन भूसा प्रति बीघा के हिसाब से और ले रखी थी। प्रकृति की मार से फसल खराब हो जाने से वह खासा परेशान थे। दो दिन पहले उन्होंने लांक कुटवाया तो पूरी खेती में 100 मन गेहूं ही निकले। जबकि लागत में सवा लाख रुपये से अधिक खर्चा आया था। यह देख कर वह परेशान हो गए और रात को उठकर गांव के निकट जंगल से गुजर रही मथुरा-आगरा रेलवे लाइन पर सो गए। वहां से गुजरी ट्रेन से कटकर उनकी मौत हो गई। सुबह खोजबीन में पता चला तो रेलवे लाइन पर उनका शव मिला। पुलिस ने शव पोस्टमार्टम को भेज दिया।
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थाना रिफाइनरी के गांव समसपुर निवासी किसान ब्रिजेंद्र सिंह (55) पुत्र करन सिंह ने थाना मगोर्रा क्षेत्र के गांव कोसीखुर्द में छह बीघा जमीन 1,20,000 रुपये में किराए पर ली थी। इसके अलावा उनके पास गांव में अपनी आठ बीघा जमीन भी थी। प्रकृति की मार से पूरी फसल बर्बाद हो जाने से ब्रिजेंद्र सिंह खासे परेशान थे। जो कुछ फसल खेत में बची थी उसे काटने के लिए मजदूर नहीं मिले तो सोमवार को वह कंबाइन मशीन आपरेटर को लेकर खेत पर गए। उसने गेहूं की बाली मीढ़कर बताया कि इसमें दाना नहीं है। यह जानकार उनकी चिंता और बढ़ गई।
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ऑपरेटर चला गया और ब्रिजेंद्र सिंह खेत पर ही रहे। रात में उन्होेंने खेत पर रस्सी के सहारे पेड़ से लटक कर आत्महत्या कर ली। सुबह परिवारीजनों को इसकी जानकारी हो सकी। मगोर्रा पुलिस ने शव पोस्टमार्टम के लिए भिजवाया। मृतक के पुत्र अमित ने बताया कि वे बहन की शादी करने के बाद दोनों भाइयों के लिए रोजगार का इंतजाम कराने की कहते थे, लेकिन फसल बर्बाद होने से कर्जा और बढ़ गया।
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दूसरा मामला थाना फरह क्षेत्र का है। गांव पौरी शहजादपुर निवासी राजवीर के पास दो बीघा खेत था। उन्होंने गांव के जमींदारों से 10 बीघा खेती 15 मन गेहूं और 15 मन भूसा प्रति बीघा के हिसाब से और ले रखी थी। प्रकृति की मार से फसल खराब हो जाने से वह खासा परेशान थे। दो दिन पहले उन्होंने लांक कुटवाया तो पूरी खेती में 100 मन गेहूं ही निकले। जबकि लागत में सवा लाख रुपये से अधिक खर्चा आया था। यह देख कर वह परेशान हो गए और रात को उठकर गांव के निकट जंगल से गुजर रही मथुरा-आगरा रेलवे लाइन पर सो गए। वहां से गुजरी ट्रेन से कटकर उनकी मौत हो गई। सुबह खोजबीन में पता चला तो रेलवे लाइन पर उनका शव मिला। पुलिस ने शव पोस्टमार्टम को भेज दिया।