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हत्या में होमगार्ड समेत तीन को आजीवन कारावास
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मथुरा। महिला की हत्या के मामले में बृहस्पतिवार को एडीजे-चतुर्थ सुदामा प्रसाद की कोर्ट ने होमगार्ड सहित तीन दोषियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। महिला अपने घर से होमगार्ड के फोन करने पर दो लाख रुपये लेकर भागी थी। बाद में होमगार्ड ने दो साथियों के साथ मिलकर महिला की हत्या कर शव छाता रेलवे स्टेशन के पास फेंक दिया। परिजनों ने महिला के शव की शिनाख्त की थी। निर्णय के बाद तीन दोषियों को न्यायालय ने जेल भेज दिया।
अकबरपुर छाता निवासी बच्चू सिंह के घर पर नजदीक के ही गांव कौंकेरा निवासी होमगार्ड महेंद्र सिंह का आना-जाना था। जिसका विरोध बच्चू सिंह की पुत्री भगवान देई करती थी। बच्चू तथा उसके भाईयों ने 8 जुलाई 2011 को जमीन बेची थी। जिससे बच्चू सिंह के हिस्से में दो लाख रुपये आए थे। यह पैसे उसके घर पर ही रखे हुए थे। 12 जुलाई 2011 को बच्चू सिंह के घर पर फोन आया। फोन बच्चू की पुत्री भगवान देई ने उठाया।
फोन पर होमगार्ड महेंद्र ने भगवान देई से अपनी मां लक्ष्मी से बात कराने को कहा। महेंद्र के फोन के कुछ देर बाद लक्ष्मी घर से दो लाख रुपये लेेकर घर पर मायके जाने की कहकर चली गई शाम को जब वह नहीं मिली तो खोजबीन की।
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लक्ष्मी का शव 15 जुलाई को छाता रेलवे स्टेशन के पास मिला। परिजनों ने शव की शिनाख्त पोस्टमार्टम हाउस पहुंचकर की। शव मिलने के अगले दिन लक्ष्मी के पति बच्चू सिंह ने होमगार्ड के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई। पुलिस ने वारदात के खुलासे में माना कि होमगार्ड ने अपने साथी गंगाधर निवासी छाता, बनिया उर्फ बलवीर निवासी अकबरपुर के साथ चाकू मारकर लक्ष्मी की हत्या की थी। तीनों के खिलाफ पुलिस ने चार्जशीट दाखिल की।
केस की सुनवाई एडीजे-चतुर्थ विशेष न्यायाधीश सुदामा प्रसाद के न्यायालय में हुई। बृहस्पतिवार को न्यायालय ने तीनों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। एडीजीसी भीष्म दत्त सिंह तोमर ने बताया कि दस-दस हजार रुपये के अर्थदंड से दंडित किया। अर्थदंड न देने पर तीन-तीन माह का अतिरिक्त कारावास की सजा काटनी होगी।
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अकबरपुर छाता निवासी बच्चू सिंह के घर पर नजदीक के ही गांव कौंकेरा निवासी होमगार्ड महेंद्र सिंह का आना-जाना था। जिसका विरोध बच्चू सिंह की पुत्री भगवान देई करती थी। बच्चू तथा उसके भाईयों ने 8 जुलाई 2011 को जमीन बेची थी। जिससे बच्चू सिंह के हिस्से में दो लाख रुपये आए थे। यह पैसे उसके घर पर ही रखे हुए थे। 12 जुलाई 2011 को बच्चू सिंह के घर पर फोन आया। फोन बच्चू की पुत्री भगवान देई ने उठाया।
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फोन पर होमगार्ड महेंद्र ने भगवान देई से अपनी मां लक्ष्मी से बात कराने को कहा। महेंद्र के फोन के कुछ देर बाद लक्ष्मी घर से दो लाख रुपये लेेकर घर पर मायके जाने की कहकर चली गई शाम को जब वह नहीं मिली तो खोजबीन की।
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लक्ष्मी का शव 15 जुलाई को छाता रेलवे स्टेशन के पास मिला। परिजनों ने शव की शिनाख्त पोस्टमार्टम हाउस पहुंचकर की। शव मिलने के अगले दिन लक्ष्मी के पति बच्चू सिंह ने होमगार्ड के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई। पुलिस ने वारदात के खुलासे में माना कि होमगार्ड ने अपने साथी गंगाधर निवासी छाता, बनिया उर्फ बलवीर निवासी अकबरपुर के साथ चाकू मारकर लक्ष्मी की हत्या की थी। तीनों के खिलाफ पुलिस ने चार्जशीट दाखिल की।
केस की सुनवाई एडीजे-चतुर्थ विशेष न्यायाधीश सुदामा प्रसाद के न्यायालय में हुई। बृहस्पतिवार को न्यायालय ने तीनों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। एडीजीसी भीष्म दत्त सिंह तोमर ने बताया कि दस-दस हजार रुपये के अर्थदंड से दंडित किया। अर्थदंड न देने पर तीन-तीन माह का अतिरिक्त कारावास की सजा काटनी होगी।