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Mathura News: मथुरा की शाही ईदगाह मस्जिद के निर्माण की तिथि का नहीं कोई सरकारी दस्तावेज
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- आगरा स्थित एएसआई कार्यालय ने एक आरटीआई पर जवाब
संवाद न्यूज एजेंसी
मथुरा। श्रीकृष्ण जन्मभूमि-ईदगाह प्रकरण में पुरातत्व विभाग में दाखिल एक आरटीआई के जवाब में नया खुलासा हुआ है। शाही ईदगाह के निर्माण संबंधी कोई भी तिथि व उसका दस्तावेज पुरातत्व विभाग के पास नहीं है। जबकि शाही मस्जिद पुरातत्व विभाग द्वारा संरक्षित है। इतना ही नहीं, विभाग के पास यह भी जानकारी नहीं है कि शाही ईदगाह मस्जिद की कितनी बार मरम्मत कराई गई है।
श्रीकृष्ण जन्मभूमि मुक्ति न्यास के अध्यक्ष एवं जन्मभूमि के पक्षकार महेंद्र प्रताप सिंह ने बताया कि उन्होंने एक मार्च 2024 को आरटीआई दाखिल की थी। इसमें सवाल किया था कि क्या शाही ईदगाह मस्जिद एएसआई के अधीन है। इसके जवाब में हां लिखकर आया है। वहीं, दूसरा सवाल यह था कि एएसआई के अधीन होने के बाद कितनी बार इसकी मरम्मत कराई गई या खुद ईदगाह कमेटी ने कराई। इसका कोई रिकॉर्ड नहीं पाया गया है। वहीं, तीसरा सवाल यहा था कि क्या श्रीकृष्ण जन्मभूमि तोड़कर मस्जिद बनाई गई है, हां तो किस सन् में बनाई गई है। इस संबंध में एलेक्जेंडर कनिंघम की रिपोर्ट और दस्तावेज क्या है। इसके जबाव में लिखा है कि श्रीकृष्ण जन्मभूमि पर मस्जिद के निर्माण की तिथि से संबंधित दस्तावेज कार्यालय में नहीं हैं। महेंद्र प्रताप ने बताया है कि भारतीय पुरातत्व विभाग का यह अभिलेख सुप्रीम कोर्ट में दाखिल कर इलाहाबाद हाईकोर्ट के एडवोकेट कमीशन के आदेश पर जारी स्टे को हटाने की प्रार्थना की जाएगी।
मंदिर तोड़कर मस्जिद बनाने की बात पहले ही कर चुका है पुरातत्व विभाग
पूर्व में दाखिल एक आरटीआई के जवाब में पुरातत्व विभाग ने ब्रिटिश हुकूमत में संचालित जन कार्य विभाग के बिल्डिंग एंड रोड सेक्शन के द्वारा 1920 में इलाहाबाद से प्रकाशित गजट में दर्ज उप्र के विभिन्न जिलों के 39 स्मारकों की सूची उपलब्ध कराई थी। इस सूची में 37 नंबर पर कटरा केशव देव भूमि पर श्रीकृष्ण जन्मभूमि का उल्लेख किया था। जिसमें लिखा था कि कटरा टीले पर पहले केशवदेव का एक मंदिर था, जिसे ध्वस्त कर दिया गया था और उस स्थान का उपयोग मस्जिद के लिए किया गया था।
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संवाद न्यूज एजेंसी
मथुरा। श्रीकृष्ण जन्मभूमि-ईदगाह प्रकरण में पुरातत्व विभाग में दाखिल एक आरटीआई के जवाब में नया खुलासा हुआ है। शाही ईदगाह के निर्माण संबंधी कोई भी तिथि व उसका दस्तावेज पुरातत्व विभाग के पास नहीं है। जबकि शाही मस्जिद पुरातत्व विभाग द्वारा संरक्षित है। इतना ही नहीं, विभाग के पास यह भी जानकारी नहीं है कि शाही ईदगाह मस्जिद की कितनी बार मरम्मत कराई गई है।
श्रीकृष्ण जन्मभूमि मुक्ति न्यास के अध्यक्ष एवं जन्मभूमि के पक्षकार महेंद्र प्रताप सिंह ने बताया कि उन्होंने एक मार्च 2024 को आरटीआई दाखिल की थी। इसमें सवाल किया था कि क्या शाही ईदगाह मस्जिद एएसआई के अधीन है। इसके जवाब में हां लिखकर आया है। वहीं, दूसरा सवाल यह था कि एएसआई के अधीन होने के बाद कितनी बार इसकी मरम्मत कराई गई या खुद ईदगाह कमेटी ने कराई। इसका कोई रिकॉर्ड नहीं पाया गया है। वहीं, तीसरा सवाल यहा था कि क्या श्रीकृष्ण जन्मभूमि तोड़कर मस्जिद बनाई गई है, हां तो किस सन् में बनाई गई है। इस संबंध में एलेक्जेंडर कनिंघम की रिपोर्ट और दस्तावेज क्या है। इसके जबाव में लिखा है कि श्रीकृष्ण जन्मभूमि पर मस्जिद के निर्माण की तिथि से संबंधित दस्तावेज कार्यालय में नहीं हैं। महेंद्र प्रताप ने बताया है कि भारतीय पुरातत्व विभाग का यह अभिलेख सुप्रीम कोर्ट में दाखिल कर इलाहाबाद हाईकोर्ट के एडवोकेट कमीशन के आदेश पर जारी स्टे को हटाने की प्रार्थना की जाएगी।
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मंदिर तोड़कर मस्जिद बनाने की बात पहले ही कर चुका है पुरातत्व विभाग
पूर्व में दाखिल एक आरटीआई के जवाब में पुरातत्व विभाग ने ब्रिटिश हुकूमत में संचालित जन कार्य विभाग के बिल्डिंग एंड रोड सेक्शन के द्वारा 1920 में इलाहाबाद से प्रकाशित गजट में दर्ज उप्र के विभिन्न जिलों के 39 स्मारकों की सूची उपलब्ध कराई थी। इस सूची में 37 नंबर पर कटरा केशव देव भूमि पर श्रीकृष्ण जन्मभूमि का उल्लेख किया था। जिसमें लिखा था कि कटरा टीले पर पहले केशवदेव का एक मंदिर था, जिसे ध्वस्त कर दिया गया था और उस स्थान का उपयोग मस्जिद के लिए किया गया था।
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