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'मेरा बेटा दे दो...': संत प्रेमानंद के आश्रम के द्वार पर फफक पड़ी मां; सत्संग से जुड़ा मन, नहीं लौटकर आया घर

Sun, 04 Oct 2026 03:23 PM IST
Sharukh Khan अमर उजाला नेटवर्क, मथुरा
अमर उजाला नेटवर्क, मथुरा Published by: Sharukh Khan Updated Sun, 04 Oct 2026 03:23 PM IST
सार

मथुरा में संत प्रेमानंद महाराज के आश्रम के द्वार पर महाराष्ट्र के संभाजी नगर से आई मां उज्ज्वला फफक पड़ी। उन्होंने कहा कि मेरा बेटा दे दो। संत के वीडियो-सत्संग से प्रभावित होकर उनका बेटा घर से निकला था।

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mother broke down in sobs at the gate of Saint Premanand Maharaj ashram
महाराष्ट्र से बेटे की तलाश में आई मां उज्ज्वला फोटो दिखाते हुए - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी

विस्तार

‘मेरा बेटा दे दो...।’ यह कहते-कहते महाराष्ट्र के संभाजी नगर से आई मां उज्ज्वला परमेश्वर ताकफिरे की आंखों से आंसू छलक पड़े। आश्रम के बाहर खड़ी मां की आवाज में बेटे से मिलने की ऐसी तड़प थी कि आसपास खड़े लोग भी भावुक हो गए। 
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छह साल पहले पति को खो चुकी उज्ज्वला के लिए अब उनका 20 वर्षीय बेटा ओम ही परिवार का सहारा और उम्मीद है, लेकिन संत की शरण में जाने के बाद से वह घर नहीं लौटा। मां को उम्मीद है कि उनका बेटा वृंदावन में ही कहीं है और एक दिन सामने आकर ‘मां...’ पुकारेगा।
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ओम कोई अचानक घर छोड़कर निकल जाने वाला युवक नहीं था। मां के मुताबिक वह संत प्रेमानंद महाराज के वीडियो देखता था। उनके बताए नियमों का पालन करता, सुबह जल्दी उठता और घंटों साधना करता था। धीरे-धीरे संत के प्रति उसकी आस्था इतनी गहरी हो गई कि 21 जून को वह घर से वृंदावन के लिए निकल आया। इसके बाद परिवार के लिए उसका कोई पता नहीं।
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बेटे की तलाश में वह 23 जून को वृंदावन पहुंचीं। उनका कहना है कि आश्रम के लोगों ने उन्हें सीसीटीवी फुटेज दिखाया, जिसमें उन्हें अपना बेटा दिखाई दिया। इसके बाद उन्हें यमुना पार ले जाया गया। वहां कुछ समय बैठाए रखा गया, लेकिन बेटे से मुलाकात नहीं कराई गई। उज्ज्वला का आरोप है कि बाद में उनसे कह दिया गया कि गलतफहमी हुई थी।

तब से उज्ज्वला की आंखों में बेटे की एक झलक पाने की उम्मीद है। महाराष्ट्र से वृंदावन तक वह कई चक्कर लगा चुकी हैं। बेटे की गुमशुदगी संभाजी थाने में दर्ज है। परिवार में दो बेटियां और एक बेटा है। आश्रम के बाहर बेटे की याद में फूट-फूटकर रोती मां की बार-बार एक ही शब्द पुकार रही थी-‘मेरा बेटा दे दो...।’

 

सत्संग से जुड़ा मन, नहीं लौटकर आया घर
वृंदावन की गलियों में सिर्फ ओम की मां ही अपने बेटे को नहीं तलाश रही हैं। नगर के निकट बड़ी आटस गांव निवासी किशोरी लाल और उनकी पत्नी भी 14 वर्षीय बेटे की तलाश में यहां पहुंचे हैं। किशोरी लाल का कहना है कि उनका बेटा संत प्रेमानंद महाराज के वीडियो और सत्संग सुनता था।
 

10 सितंबर की सुबह छह बजे वह घर से निकला और फिर वापस नहीं आया। घरवालों ने रिश्तेदारों से लेकर परिचितों तक तलाश की। कोई सुराग नहीं मिला तो 23 सितंबर को जैंत थाने में गुमशुदगी दर्ज कराई। 

 

परिवार को उसके साथियों से जानकारी मिली कि उसे 11 सितंबर को सुनरख में देखा गया था। इसके बाद से माता-पिता लगातार उसकी तलाश में जुटे हैं। हर गुजरते दिन के साथ उम्मीद और चिंता दोनों बढ़ रही हैं।

बेटे का पत्र मिला, फिर भी पिता को आश्रम में होने की उम्मीद
कासगंज की आवास विकास कॉलोनी निवासी चंद्रपाल चौहान की कहानी भी कुछ ऐसी ही है। उनका 16 वर्षीय बेटा मयंक सिंह चौहान उर्फ मनु सात अगस्त की रात करीब डेढ़ बजे घर से चला गया। कमरे में एक पत्र मिला, जिसमें दिल्ली जाकर नौकरी करने की बात लिखी थी। 

 

बावजूद इसके पिता का कहना है कि मयंक संत प्रेमानंद महाराज से प्रभावित था। वह नामजप करता था और उनके बताए नियमों का पालन करता था। इसी कारण परिवार को आशंका है कि वह वृंदावन आया हो सकता है।

 

बेटे की तलाश में पिता कई बार आश्रम पहुंचे। उनका आरोप है कि उन्हें अंदर प्रवेश नहीं करने दिया गया। आश्रम की ओर से उन्हें बताया गया कि बेटे के संबंध में कोई जानकारी मिली तो उन्हें बताया जाएगा। पीड़ित ने कासगंज थाने और वृंदावन कोतवाली में भी मदद मांगी है। दो महीने से बेटे की तलाश कर रहे पिता की उम्मीद अब भी आश्रम से जुड़ी है।

परिजन बच्चों के लापता होने की शिकायतें कर रहे हैं। अभी स्थानीय स्तर पर कोई प्रार्थनापत्र नहीं दिया गया है। पुलिस जांच में जुटी है, प्रार्थनापत्र मिलने के बाद कार्रवाई की जाएगी। - संदीप सिंह, सीओ वृंदावन
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