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Mathura News: जो कभी बगीचों को सींचता था... वह वृंदावन माइनर हुआ लापता

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Fri, 30 Jan 2026 02:04 AM IST
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The Vrindavan Minor, which once irrigated the gardens, has disappeared
मथुरा। वृंदावन के बाग-बगीचों की मीठे पानी से सिंचाई के लिए 74 साल पहले बनवाए गए साढ़े आठ किलोमीटर लंबे वृंदावन माइनर का अस्तित्व अब लगभग समाप्त हो गया है। माइनर पर अतिक्रमण करके मकान बनवा दिए गए। दो किलोमीटर तक माइनर का नामोनिशान तक नहीं मिल पा रहा है। अब सिंचाई विभाग इस माइनर की तलाश कराएगा। इसके लिए टीम का गठन किया गया है। सिंचाई विभाग इसे तलाश करके जीर्णोद्धार करवाएगा।
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छटीकरा से वृंदावन के कैलाश नगर तक 8.600 मीटर के बीच माइनर के बड़े भूभाग पर अवैध रूप कब्जे कर लिए गए हैं। बात इतनी ही नहीं सिंचाई विभाग की बेशकीमती भूमि पर नजर रखने वालों ने माइनर के नक्शे को भी खुद-बुर्द करने की कोशिश की है। विभाग की ओर से लगातार इसे पुनर्जीवित करने की योजना पर काम किया जा रहा है। सिंचाई विभाग के अधिकारियों ने बताया कि वृंदावन में खारे पानी की समस्या से निजात दिलाने के लिए माइनर का निर्माण वर्ष 1952 में कराया गया था। इसे निर्मित किए जाने का उद्देश्य वृंदावन के उपवनों के पेड़-पौधों को मीठे जल से सिंचित करना था।
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इससे निधिवन, सेवा कुंज, भांडीरवन, मधुवन सहित राधा कुंड और श्याम कुंड आदि की मीठे पानी से सिंचाई की जाती थी। इसी से राधा बावड़ी और बिहारी जी के बगीचे की सिंचाई होती थी। मौजूदा समय में यह छटीकरा से केशवधाम तक ही नजर आता है। सिंचाई विभाग के अनुसार शून्य से 3.800 मीटर के बाद शहरीकरण होने के कारण इस अस्तित्व खतरे में पड़ गया। शासन के आदेश पर वर्ष 2012 में इस माइनर के किनारे कुछ हिस्से पर सड़क का निर्माण कराया गया। वर्तमान में इस माइनर पर 7.500 से 8.600 मीटर पर अतिक्रमण कर लिए गए हैं। ऐसे में इसे फिर से तलाश करने की कवायद की जा रही है।
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वर्जन -
वृंदावन माइनर को लेकर सिंचाई विभाग द्वारा टीम का गठन किया गया है। टीम अपनी रिपोर्ट तैयार कर रही है। इस माइनर का जीर्णोद्धार किया जाएगा। अतिक्रमण की गई भूमि पर जल्द ही चिह्नांकन का काम शुरू जाएगा।- नवीन कुमार, अधिशासी अभिंयंता, सिंचाई विभाग
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