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Mathura News: रथ की जांच के लिए सेवायत के घर पहुंची टीम
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वृंदावन। ठाकुर श्रीबांकेबिहारी मंदिर की संपत्ति की जांच अब गोस्वामी के घर तक पहुंच गई है। हाईपावर्ड कमेटी के आदेश पर चांदी के रथ और शेषनाग को लेकर गठित जांच कमेटी ने जांच शुरू कर दी है। रविवार को जांच करने के लिए पुलिस-प्रशासन की संयुक्त टीम एक गोस्वामी के घर पहुंची। गोस्वामी को पत्र सौंपा गया कि जांच होने तक ठाकुरजी की संपत्ति को जस की तस रखा रहने दें। वहीं सेवायत का आरोप है कि काफी संख्या में पुलिस और प्रशासन के अधिकारी घर में घुस आए और मूल्यवान वस्तुओं के बारे में जानकारी मांगने लगे। सेवायत जब तक एकत्रित हुए तक सभी लोग वहां से चले गए।
जगन्नाथ रथयात्रा में इस बार श्रीबांकेबिहारीजी को चांदी के रथ पर विराजमान नहीं किया गया था। उसके बाद सावन की महाशिवरात्रि पर भी चांदी के शेषनाग पर आराध्य को विराजित नहीं किया गया। जबकि पूर्व के वर्षों में रथ और शेषनाग दोनों ही मंदिर में ठाकुरजी की सेवा में लगते आए थे। इस पर सवाल खड़े हुए तो सेवायत ज्ञानेंद्र किशोर गोस्वामी ने कहा कि रथ और शेषनाग उनके अपने ट्रस्ट के हैं। वह अपनी सेवा में प्रयोग करते हैं या फिर कोई सेवायत मांगता है तो ठाकुरजी की सेवा के लिए दे देते हैं।
श्रीबांकेबिहारी मंदिर प्रबंधन हाईपावर्ड कमेटी ने पिछली बैठक में सभी पदाधिकारियों की रजामंदी से जांच के लिए एक कमेटी का गठन किया। जिसमें एमवीडीए की उपाध्यक्ष लक्ष्मी एन, एसएसपी श्लोक कुमार सहित तीन लोगों को शामिल किया था। रविवार को पुलिस प्रशासन की संयुक्त टीम मंदिर के सेवायत ज्ञानेंद्र किशोर गोस्वामी के यहां पहुंची। सीओ वृंदावन संदीप सिंह ने बताया कि प्रभारी अपर नगर मजिस्ट्रेट रामप्रसाद त्रिपाठी के साथ जांच के दायरे में आए ज्ञानेंद्र किशोर गोस्वामी के घर जाकर उनको पत्र दिया गया। जिसमें उसने कहा कि जांच के दायरे में आने वाली ठाकुरजी को भेंट स्वरूप दी गई किसी भी संपत्ति को जस का तस रखा जाए और जांच में टीम का सहयोग किया जाए।
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वहीं कमेटी के सेवायत सदस्य हिमांशु गोस्वामी ने कहा कि ज्ञानेंद्र किशोर गोस्वामी के यहां करीब 30 से 40 पुलिसकर्मी और अधिकारी बिना किसी पूर्व नोटिस के पहुंच गए। टीम ने घर में मौजूद लोगों से कथित तौर पर कीमती सामान दिखाने की मांग की गई। गोस्वामी समाज के लोगों ने अधिकारियों से कार्रवाई से संबंधित नोटिस और सरकारी दस्तावेज दिखाने को कहा। इस दौरान आसपास के लोग भी मौके पर एकत्र हो गए। मामला बढ़ता देख सभी अधिकारी व पुलिसकर्मी चले गए। पूरी घटना घर में लगे सीसीटीवी कैमरों में रिकॉर्ड हुई है
नोटिस देकर यह मांगी जानकारी
अधिकारियों की ओर सेवायत को जो नोटिस जारी किया गया है उसमें लिखा है कि जांच पूरी होने तक उक्त रथ को यथास्थिति में सुरक्षित स्थान पर संरक्षित रखा जाए। उसके मूल स्वरूप में किसी प्रकार का परिवर्तन न किया जाए। बिना सक्षम अनुमति स्थानांतरण/उपयोग पर रोक रहेगी। रथ मंदिर को किस व्यक्ति/संस्था द्वारा प्रदान किया गया था, उस दानदाता/जजमान का पूरा नाम, पता, मोबाइल नंबर सहित अन्य संबंधित अभिलेख प्रस्तुत किए जाएं। रथ के निर्माण, खरीद अथवा दान के संबंध में कोई कर रसीद, बिल, वाउचर, भुगतान रसीद अथवा अन्य वित्तीय अभिलेख उपलब्ध हैं अथवा नहीं, इसकी जानकारी दी जाए। रथ को सर्वप्रथम मंदिर परिसर में कब लाया/स्थापित किया गया था तथा उसके बाद के वर्षों में कब-कब मंदिर में स्थापित अथवा उपयोग किया गया, इसकी वर्ष एवं दिनांकवार स्पष्ट जानकारी उपलब्ध कराई जाए।
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जगन्नाथ रथयात्रा में इस बार श्रीबांकेबिहारीजी को चांदी के रथ पर विराजमान नहीं किया गया था। उसके बाद सावन की महाशिवरात्रि पर भी चांदी के शेषनाग पर आराध्य को विराजित नहीं किया गया। जबकि पूर्व के वर्षों में रथ और शेषनाग दोनों ही मंदिर में ठाकुरजी की सेवा में लगते आए थे। इस पर सवाल खड़े हुए तो सेवायत ज्ञानेंद्र किशोर गोस्वामी ने कहा कि रथ और शेषनाग उनके अपने ट्रस्ट के हैं। वह अपनी सेवा में प्रयोग करते हैं या फिर कोई सेवायत मांगता है तो ठाकुरजी की सेवा के लिए दे देते हैं।
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श्रीबांकेबिहारी मंदिर प्रबंधन हाईपावर्ड कमेटी ने पिछली बैठक में सभी पदाधिकारियों की रजामंदी से जांच के लिए एक कमेटी का गठन किया। जिसमें एमवीडीए की उपाध्यक्ष लक्ष्मी एन, एसएसपी श्लोक कुमार सहित तीन लोगों को शामिल किया था। रविवार को पुलिस प्रशासन की संयुक्त टीम मंदिर के सेवायत ज्ञानेंद्र किशोर गोस्वामी के यहां पहुंची। सीओ वृंदावन संदीप सिंह ने बताया कि प्रभारी अपर नगर मजिस्ट्रेट रामप्रसाद त्रिपाठी के साथ जांच के दायरे में आए ज्ञानेंद्र किशोर गोस्वामी के घर जाकर उनको पत्र दिया गया। जिसमें उसने कहा कि जांच के दायरे में आने वाली ठाकुरजी को भेंट स्वरूप दी गई किसी भी संपत्ति को जस का तस रखा जाए और जांच में टीम का सहयोग किया जाए।
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वहीं कमेटी के सेवायत सदस्य हिमांशु गोस्वामी ने कहा कि ज्ञानेंद्र किशोर गोस्वामी के यहां करीब 30 से 40 पुलिसकर्मी और अधिकारी बिना किसी पूर्व नोटिस के पहुंच गए। टीम ने घर में मौजूद लोगों से कथित तौर पर कीमती सामान दिखाने की मांग की गई। गोस्वामी समाज के लोगों ने अधिकारियों से कार्रवाई से संबंधित नोटिस और सरकारी दस्तावेज दिखाने को कहा। इस दौरान आसपास के लोग भी मौके पर एकत्र हो गए। मामला बढ़ता देख सभी अधिकारी व पुलिसकर्मी चले गए। पूरी घटना घर में लगे सीसीटीवी कैमरों में रिकॉर्ड हुई है
नोटिस देकर यह मांगी जानकारी
अधिकारियों की ओर सेवायत को जो नोटिस जारी किया गया है उसमें लिखा है कि जांच पूरी होने तक उक्त रथ को यथास्थिति में सुरक्षित स्थान पर संरक्षित रखा जाए। उसके मूल स्वरूप में किसी प्रकार का परिवर्तन न किया जाए। बिना सक्षम अनुमति स्थानांतरण/उपयोग पर रोक रहेगी। रथ मंदिर को किस व्यक्ति/संस्था द्वारा प्रदान किया गया था, उस दानदाता/जजमान का पूरा नाम, पता, मोबाइल नंबर सहित अन्य संबंधित अभिलेख प्रस्तुत किए जाएं। रथ के निर्माण, खरीद अथवा दान के संबंध में कोई कर रसीद, बिल, वाउचर, भुगतान रसीद अथवा अन्य वित्तीय अभिलेख उपलब्ध हैं अथवा नहीं, इसकी जानकारी दी जाए। रथ को सर्वप्रथम मंदिर परिसर में कब लाया/स्थापित किया गया था तथा उसके बाद के वर्षों में कब-कब मंदिर में स्थापित अथवा उपयोग किया गया, इसकी वर्ष एवं दिनांकवार स्पष्ट जानकारी उपलब्ध कराई जाए।