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Mathura News: थम गई विवाह की शहनाइयों की गूंज
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कोसीकलां/मथुरा। बुधवार को गुरु (बृहस्पति) तारा अस्त होने के साथ ही विवाह की शहनाइयों की गूंज थम गई। करीब पांच माह के इंतजार के पश्चात देवउठनी एकादशी से विवाह कार्य फिर से प्रारंभ होंगे। दीपक ज्योतिष भागवत संस्थान के निदेशक ज्योतिषाचार्य आचार्य कामेश्वर चतुर्वेदी ने बताया कि 12 जून से 6 जुलाई तक देवगुरु बृहस्पति अस्त रहेंगे। जिसके चलते विवाह यज्ञोपवीत आदि सभी मांगलिक कार्य बंद रहेंगे।
कोठीफोछा मंदिर, कोसीकलां के ज्योतिषाचार्य छैल बिहारी शास्त्री के अनुसार छह जुलाई को देवशयनी एकादशी पर भगवान विष्णु क्षीरसागर में योग निंद्रा में चार माह के लिए चले जाएंगे और चातुर्मास शुरू हो जाएंगे। ऐसे में नवंबर तक मांगलिक और विवाह कार्यों पर विराम लग जाएगा, जो फिर 2 नवंबर 2025 को देवउठनी एकादशी से प्रारंभ होंगे। शास्त्री के अनुसार, अमूमन आषाढ़ माह में देवशयनी एकादशी से पहले तक विवाह लग्न मुहूर्त होते हैं, लेकिन गुरु ग्रह के अस्त होने से इस बार आषाढ़ में विवाह नहीं होंगे। हालांकि, 4 जुलाई को भडली नवमी अबूझ मुहूर्त तिथि होने पर लोक परंपरा के अनुसार कुछ लोग विवाह कार्य कर सकते हैं। संवाद
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कोठीफोछा मंदिर, कोसीकलां के ज्योतिषाचार्य छैल बिहारी शास्त्री के अनुसार छह जुलाई को देवशयनी एकादशी पर भगवान विष्णु क्षीरसागर में योग निंद्रा में चार माह के लिए चले जाएंगे और चातुर्मास शुरू हो जाएंगे। ऐसे में नवंबर तक मांगलिक और विवाह कार्यों पर विराम लग जाएगा, जो फिर 2 नवंबर 2025 को देवउठनी एकादशी से प्रारंभ होंगे। शास्त्री के अनुसार, अमूमन आषाढ़ माह में देवशयनी एकादशी से पहले तक विवाह लग्न मुहूर्त होते हैं, लेकिन गुरु ग्रह के अस्त होने से इस बार आषाढ़ में विवाह नहीं होंगे। हालांकि, 4 जुलाई को भडली नवमी अबूझ मुहूर्त तिथि होने पर लोक परंपरा के अनुसार कुछ लोग विवाह कार्य कर सकते हैं। संवाद
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