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Mathura News: केंद्रीय एजेंसियों की रिपोर्ट तय करेगी शहर की स्वच्छता में रैकिंग
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मथुरा। स्वच्छ भारत अभियान के अंतर्गत किए जा रहे नगरीय निकायों के प्रयासों का अब आकलन शुरू हो गया है। केंद्रीय एजेंसियां निकायों में पहुंचकर स्वच्छता की स्थिति का मौका मुआयना कर रही हैं। गोपनीय तरीके से स्वच्छता के संसाधनों की भी पड़ताल की जा रही है। केंद्रीय एजेंसियों की यही रिपोर्ट शहर की स्वच्छता में रैंकिंग तय करेगी।
पिछले पांच साल से देश के बड़े शहरों की स्वच्छता रैंकिंग की जा रही है। इस प्रक्रिया में मथुरा-वृंदावन नगर निगम भी निरंतर शामिल हो रहा है। इसके लिए वर्ष भर तय मापदंडों को हासिल करने के प्रयास किए जाते हैं। इस बार भी नगर निगम ने अगस्त माह में ही अपना स्वच्छता संबंधी पूरा विवरण भेज दिया था। इसमें डोर टू डोर कूड़ा कलेक्शन, व्यावसायिक और आवासीय क्षेत्रों में सफाई का समय, शौचालयों की श्रेणी और संख्या, धूल से निपटने के उपाय, सफाई उपकरणों की संख्या और उनके प्रयोग के तौर तरीके की जानकारी दी गई।
यही नहीं, यह भी बताया कि जनता की शिकायतों का निस्तारण किस तरीके से किया जा रहा है। इसके आधार पर अब केंद्रीय एजेंसियां जमीनी हकीकत की जानकारी कर रही हैं। अब तक कई एजेंसियों ने सर्वे की प्रक्रिया को पूरा कर लिया है। सर्वे की यह प्रक्रिया अब भी जारी है। हालांकि इस सर्वे की जानकारी निगम के अधिकारियों को नहीं दी जा रही है। नगर निगम के उपलब्ध डाटा के तहत ही जांच पड़ताल और मौका मुआयना किया जा रहा है।
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20 हजार लोगों ने दिया है फीडबैक
नगर निगम के स्वच्छता सर्वे में विभिन्न केंद्रीय एजेंसियों ने स्थानीय लोगों से भी फीडबैक लिया है। सिटी एप एवं अन्य माध्यमों से 20 हजार लोगों ने मथुरा-वृंदावन से स्वच्छता की जानकारी दी है। स्थानीय लोगों द्वारा दिया गया यह फीडबैक रैंकिंग में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। गौरतलब रहे कि मथुरा-वृंदावन को 2018 में 458वीं रैंक मिली थी, जबकि 2019 में 133, 2020 में 58 और 2021 में 83वीं रैंक मिली है।
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पिछले पांच साल से देश के बड़े शहरों की स्वच्छता रैंकिंग की जा रही है। इस प्रक्रिया में मथुरा-वृंदावन नगर निगम भी निरंतर शामिल हो रहा है। इसके लिए वर्ष भर तय मापदंडों को हासिल करने के प्रयास किए जाते हैं। इस बार भी नगर निगम ने अगस्त माह में ही अपना स्वच्छता संबंधी पूरा विवरण भेज दिया था। इसमें डोर टू डोर कूड़ा कलेक्शन, व्यावसायिक और आवासीय क्षेत्रों में सफाई का समय, शौचालयों की श्रेणी और संख्या, धूल से निपटने के उपाय, सफाई उपकरणों की संख्या और उनके प्रयोग के तौर तरीके की जानकारी दी गई।
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यही नहीं, यह भी बताया कि जनता की शिकायतों का निस्तारण किस तरीके से किया जा रहा है। इसके आधार पर अब केंद्रीय एजेंसियां जमीनी हकीकत की जानकारी कर रही हैं। अब तक कई एजेंसियों ने सर्वे की प्रक्रिया को पूरा कर लिया है। सर्वे की यह प्रक्रिया अब भी जारी है। हालांकि इस सर्वे की जानकारी निगम के अधिकारियों को नहीं दी जा रही है। नगर निगम के उपलब्ध डाटा के तहत ही जांच पड़ताल और मौका मुआयना किया जा रहा है।
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20 हजार लोगों ने दिया है फीडबैक
नगर निगम के स्वच्छता सर्वे में विभिन्न केंद्रीय एजेंसियों ने स्थानीय लोगों से भी फीडबैक लिया है। सिटी एप एवं अन्य माध्यमों से 20 हजार लोगों ने मथुरा-वृंदावन से स्वच्छता की जानकारी दी है। स्थानीय लोगों द्वारा दिया गया यह फीडबैक रैंकिंग में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। गौरतलब रहे कि मथुरा-वृंदावन को 2018 में 458वीं रैंक मिली थी, जबकि 2019 में 133, 2020 में 58 और 2021 में 83वीं रैंक मिली है।